रायपुर 17 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की आह्वान पर जिले में “ज्ञानभारतम् मिशन” के अंतर्गत दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों, हस्तलिपियों, ताम्रपत्र, ताड़पत्र एवं हस्तलिखित ग्रंथों का संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, जिससे देश के समृद्ध संास्कृतिक विरासत कोे सुरक्षित रखा जा सके। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जैन धर्म के अमूल्य ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां एकत्र की गई हैं और इनका ज्ञानभारतम् पोर्टल में संग्रहण किया गया है।नालंदा लाईब्रेरी की लाईब्रेरियन श्रीमती मंजला जैन ने रायपुर के चूड़ीलाइन निवासी श्री अजय गंगवाल से पाण्डुलिपि प्राप्त की। श्री गंगवाल सन् 1915 में स्थापित श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष हैं। उनके संरक्षण में मंदिर परिसर में राजस्थानी शैली में निर्मित लगभग 200 वर्ष प्राचीन 21 दुर्लभ चित्र लिपियाँ व पांडुलिपियाँ रखी हुई थी जो जैन धर्म की संस्कृति, अनुष्ठानों से संबंधित हैं। इनका संग्रहण कर लिया गया है।
इसी तरह डॉ एस एल कोका के संरक्षण में अंगेजी में लेखक महादेव लाल बारगाह की मूल लिखित पांडुलिपि प्राप्त हुई है जिसमें सारंगढ़ रियासत, शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का वर्णन 100 पृष्ठों में लिखा गया है। इतिहासकार श्री रमेन्द्र नाथ मिश्र से ओड़िया लिपि में ओड़िया भाषा के 15 दुर्लभ ताड़पत्र जिनके क़रीब 6000 पृष्ठ हैं प्राप्त हुए हैं जो संबलपुर, सारंगढ़, रायगढ़ आदि जमींदारी गांवों से प्राप्त हुए हैं जिसमें धार्मिक, आयुर्वेदिक, ज्योतिषी आदि का उल्लेख है। श्री मिश्र से ही कलचूरी शासन के अंतिम शासक राजा अमर सिंह देव द्वारा सन् 1735 में देवनागरी लिपि में लिखा दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है। इनका भी संग्रहण कर लिया गया है।
रायपुर 17 अप्रैल 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की आह्वान पर जिले में “ज्ञानभारतम् मिशन” के अंतर्गत दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों, हस्तलिपियों, ताम्रपत्र, ताड़पत्र एवं हस्तलिखित ग्रंथों का संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, जिससे देश के समृद्ध संास्कृतिक विरासत कोे सुरक्षित रखा जा सके। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जैन धर्म के अमूल्य ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां एकत्र की गई हैं और इनका ज्ञानभारतम् पोर्टल में संग्रहण किया गया है।नालंदा लाईब्रेरी की लाईब्रेरियन श्रीमती मंजला जैन ने रायपुर के चूड़ीलाइन निवासी श्री अजय गंगवाल से पाण्डुलिपि प्राप्त की। श्री गंगवाल सन् 1915 में स्थापित श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष हैं। उनके संरक्षण में मंदिर परिसर में राजस्थानी शैली में निर्मित लगभग 200 वर्ष प्राचीन 21 दुर्लभ चित्र लिपियाँ व पांडुलिपियाँ रखी हुई थी जो जैन धर्म की संस्कृति, अनुष्ठानों से संबंधित हैं। इनका संग्रहण कर लिया गया है।
इसी तरह डॉ एस एल कोका के संरक्षण में अंगेजी में लेखक महादेव लाल बारगाह की मूल लिखित पांडुलिपि प्राप्त हुई है जिसमें सारंगढ़ रियासत, शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का वर्णन 100 पृष्ठों में लिखा गया है। इतिहासकार श्री रमेन्द्र नाथ मिश्र से ओड़िया लिपि में ओड़िया भाषा के 15 दुर्लभ ताड़पत्र जिनके क़रीब 6000 पृष्ठ हैं प्राप्त हुए हैं जो संबलपुर, सारंगढ़, रायगढ़ आदि जमींदारी गांवों से प्राप्त हुए हैं जिसमें धार्मिक, आयुर्वेदिक, ज्योतिषी आदि का उल्लेख है। श्री मिश्र से ही कलचूरी शासन के अंतिम शासक राजा अमर सिंह देव द्वारा सन् 1735 में देवनागरी लिपि में लिखा दुर्लभ ताम्रपत्र प्राप्त हुआ है। इनका भी संग्रहण कर लिया गया है।



Journalist खबरीलाल














