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भूपेश को कुरेदा है तो सुनो भी...:

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तल्खी भरे अंदाज में जवाब देना
स्वाभाविक था,इसलिए कि उन्हे बार-बार कुरेदा जा रहा था कि ढाई-ढाई साल का
क्या हुआ? आखिर ढाई साल वाली बात आई कहां से और किसने इसे हवा दी? इस पर
उखडऩा भी स्वाभाविक था। मुख्यमंत्री का जवाब पूरी तरह माकूल पाकर लोग सन्न
रह गए। आलाकमान ने कुर्सी दी है और कहें तो तुरंत इस्तीफा देने तैयार
हूं..। दरअसल सूबे में कांग्रेस की राजनीति जो अभी है उससे लगता नहीं कि
आलाकमान भूपेश बघेल की जगह किसी और को जिम्मेदारी सौंपने के मूड में हैं।
दरअसल शुक्रवार को भूपेश बघेल के बयान की चौतरफा चर्चा हो रही है। भूपेश ने
किसी पर तोहमत तो नहीं लगायी लेकिन इतना जरूर कहा कि ऐसा चाहने वाले छग का
विकास नहीं चाहते। वहीं कांग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली है,तो विपक्ष के
नेता इस पर जवाब देने से बचते रहें,कुछ भाजपा नेताओं ने यह जरूर कहा कि
अंदरखाने की बात सामने आ रही है।


छत्तीसगढ़ में पन्द्रह साल बाद
कांग्रेस की सरकार बनी और इतने बहुमत से कि किसी के गले नहीं उतर रही थी। 
निश्चित रूप से यह सामूहिक प्रयास था लेकिन नेतृत्व भूपेश बघेल का ही था और
इसीलिए कांग्रेस आलाकमान ने उन्हे मुख्यमंत्री बनाया। तब प्रमुख दो
दावेदार रहे टी.एस.सिंहदेव व ताम्रध्वज साहू को नंबर दो व तीन का स्थान
देकर आलाकमान ने संतुष्ट कर लिया था लेकिन सत्ता व संगठन में समन्वय के बीच
दो साल बीत गए,कहीं पर भी नेतृत्व परिवर्तन की बात नहीं आई। अगर ढाई साल
की बात आ भी रही हैं तो अभी तो छह माह है लेकिन दो साल पूरे होने के बीच
इसकी चर्चा सरगर्म होने से कांग्रेस नेता खुद भौंचक है। मुख्यमंत्री भी इसी
पर उखड़ गए,आखिर ढाई-ढाई साल की बात आई कहां से और कब हुई थी कोई तो प्रुफ
करे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश बघेल का अंदाज आज प्रदेश अध्यक्ष वाली
ही नजर आई जब वे विपक्ष की भूमिका में थे। दरअसल अभी कांग्रेस में भूपेश
बघेल के खिलाफ आवाज उठाने या विरोध करने की स्थिति में कोई भी नेता नहीं
हैं। कांग्रेस आलाकमान भी उनके कामकाज से पूरी तरह से संतुष्ट है।
सोनिया,राहुल व प्रियंका को वे बराबर ब्रीफ करते रहे हैं। इसलिए अभी दूर तक
सोंचना भी मुनासिब नहीं दिखता।




रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तल्खी भरे अंदाज में जवाब देना
स्वाभाविक था,इसलिए कि उन्हे बार-बार कुरेदा जा रहा था कि ढाई-ढाई साल का
क्या हुआ? आखिर ढाई साल वाली बात आई कहां से और किसने इसे हवा दी? इस पर
उखडऩा भी स्वाभाविक था। मुख्यमंत्री का जवाब पूरी तरह माकूल पाकर लोग सन्न
रह गए। आलाकमान ने कुर्सी दी है और कहें तो तुरंत इस्तीफा देने तैयार
हूं..। दरअसल सूबे में कांग्रेस की राजनीति जो अभी है उससे लगता नहीं कि
आलाकमान भूपेश बघेल की जगह किसी और को जिम्मेदारी सौंपने के मूड में हैं।
दरअसल शुक्रवार को भूपेश बघेल के बयान की चौतरफा चर्चा हो रही है। भूपेश ने
किसी पर तोहमत तो नहीं लगायी लेकिन इतना जरूर कहा कि ऐसा चाहने वाले छग का
विकास नहीं चाहते। वहीं कांग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली है,तो विपक्ष के
नेता इस पर जवाब देने से बचते रहें,कुछ भाजपा नेताओं ने यह जरूर कहा कि
अंदरखाने की बात सामने आ रही है।


छत्तीसगढ़ में पन्द्रह साल बाद
कांग्रेस की सरकार बनी और इतने बहुमत से कि किसी के गले नहीं उतर रही थी। 
निश्चित रूप से यह सामूहिक प्रयास था लेकिन नेतृत्व भूपेश बघेल का ही था और
इसीलिए कांग्रेस आलाकमान ने उन्हे मुख्यमंत्री बनाया। तब प्रमुख दो
दावेदार रहे टी.एस.सिंहदेव व ताम्रध्वज साहू को नंबर दो व तीन का स्थान
देकर आलाकमान ने संतुष्ट कर लिया था लेकिन सत्ता व संगठन में समन्वय के बीच
दो साल बीत गए,कहीं पर भी नेतृत्व परिवर्तन की बात नहीं आई। अगर ढाई साल
की बात आ भी रही हैं तो अभी तो छह माह है लेकिन दो साल पूरे होने के बीच
इसकी चर्चा सरगर्म होने से कांग्रेस नेता खुद भौंचक है। मुख्यमंत्री भी इसी
पर उखड़ गए,आखिर ढाई-ढाई साल की बात आई कहां से और कब हुई थी कोई तो प्रुफ
करे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश बघेल का अंदाज आज प्रदेश अध्यक्ष वाली
ही नजर आई जब वे विपक्ष की भूमिका में थे। दरअसल अभी कांग्रेस में भूपेश
बघेल के खिलाफ आवाज उठाने या विरोध करने की स्थिति में कोई भी नेता नहीं
हैं। कांग्रेस आलाकमान भी उनके कामकाज से पूरी तरह से संतुष्ट है।
सोनिया,राहुल व प्रियंका को वे बराबर ब्रीफ करते रहे हैं। इसलिए अभी दूर तक
सोंचना भी मुनासिब नहीं दिखता।



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