रायपुर। भाजपा शासन काल में करोड़ों की लागत से बन रहे स्काई वाक का
निर्माण कांग्रेस की सरकार आने के बाद से इस पर रोक लगा दी थी और राज्य
सरकार ने समिति का गठन कर फैसला लिया कि इसे तोड़ा नहीं जाएगा पर इसका
इस्तेमाल कैसा किया जाए इस पर फैसला लिया जाना है। लोक निर्माण विभाग
(पीडब्ल्यूडी) के सेतू निगम के अधिकारियों ने इसका इस्तेमाल क्या होगा और
आगे निर्माण कार्य कब से शुरू होगा इस पर इसी महीने के भीतर फैसला लिए जाने
के संकेत दिए है।
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने स्काई वाक निर्माण के लिए
2016-17 के बजट में करीब 42.9 करोड़ रुपये खर्च कर मेसर्स जीएस एक्सप्रेस
लखनऊ समेत तीन कंपनियों को सौंपा था। कंपनी को आठ माह में निर्माण कार्य
पूरा करना था, लेकिन निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने की वजह से इसकी
लागत बढ़कर 77.10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यही नहीं स्काई वाक के
निर्माण पर 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यानि पौने दो साल से
स्काई वाक का काम रुकने के कारण इसकी लागत भी धीरे- धीरे बढऩे लगी है। वहीं
स्काई वाक में इस्तेमाल लोहे के पिलर जंग भी खाने लगे हैं।
गौरतलब है
कि दो साल पहले राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद स्काई वाक के कार्य
पर रोक लगाकर उसके संबंध में निर्णय लेने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक
सत्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में सामान्य सुझाव समिति गठित की गई थी। इस
समिति को फैसला लेने में करीब डेढ़ साल का समय लग गया। अगस्त, 2020 में
समिति ने आखिरकार स्काई वाक को तोडऩे के बजाय 31 करोड़ रुपये और खर्च कर
निर्माण कार्य पूरा करने का सुझाव दिया है। अब इस पर फैसला सरकार को लेना
है। स्काई वाक को तोडऩे के बजाय जनहित में इसे पूरा करने का सुझाव दिया गया
है। इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में
तकनीकी कमेटी की बैठक में अंतिम फैसला जल्द ही लेने की संभावना हैं।
रायपुर। भाजपा शासन काल में करोड़ों की लागत से बन रहे स्काई वाक का
निर्माण कांग्रेस की सरकार आने के बाद से इस पर रोक लगा दी थी और राज्य
सरकार ने समिति का गठन कर फैसला लिया कि इसे तोड़ा नहीं जाएगा पर इसका
इस्तेमाल कैसा किया जाए इस पर फैसला लिया जाना है। लोक निर्माण विभाग
(पीडब्ल्यूडी) के सेतू निगम के अधिकारियों ने इसका इस्तेमाल क्या होगा और
आगे निर्माण कार्य कब से शुरू होगा इस पर इसी महीने के भीतर फैसला लिए जाने
के संकेत दिए है।
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने स्काई वाक निर्माण के लिए
2016-17 के बजट में करीब 42.9 करोड़ रुपये खर्च कर मेसर्स जीएस एक्सप्रेस
लखनऊ समेत तीन कंपनियों को सौंपा था। कंपनी को आठ माह में निर्माण कार्य
पूरा करना था, लेकिन निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने की वजह से इसकी
लागत बढ़कर 77.10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यही नहीं स्काई वाक के
निर्माण पर 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यानि पौने दो साल से
स्काई वाक का काम रुकने के कारण इसकी लागत भी धीरे- धीरे बढऩे लगी है। वहीं
स्काई वाक में इस्तेमाल लोहे के पिलर जंग भी खाने लगे हैं।
गौरतलब है
कि दो साल पहले राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद स्काई वाक के कार्य
पर रोक लगाकर उसके संबंध में निर्णय लेने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक
सत्यनारायण शर्मा की अध्यक्षता में सामान्य सुझाव समिति गठित की गई थी। इस
समिति को फैसला लेने में करीब डेढ़ साल का समय लग गया। अगस्त, 2020 में
समिति ने आखिरकार स्काई वाक को तोडऩे के बजाय 31 करोड़ रुपये और खर्च कर
निर्माण कार्य पूरा करने का सुझाव दिया है। अब इस पर फैसला सरकार को लेना
है। स्काई वाक को तोडऩे के बजाय जनहित में इसे पूरा करने का सुझाव दिया गया
है। इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में
तकनीकी कमेटी की बैठक में अंतिम फैसला जल्द ही लेने की संभावना हैं।


Journalist खबरीलाल












