चुनावी राजनीति में जहां इन दिनों कांग्रेस पार्टी लगातार हार का सामना कर रही है, वहीं पार्टी की आतंरिक राजनीति की अब सामने आने लगे है। लेकिन पार्टी नेतृत्व पर अब दिवंगत प्रणब मुखर्जी की किताब में भी कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संस्मरणों पर आधारित किताब में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी हार से लिए सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है। अपनी किताब में प्रणब दा यह भी लिखते हैं कि "कांग्रेस के कुछ सदस्य" मानते थे अगर वह प्रधानमंत्री होते, तो पार्टी सत्ता नहीं गंवाती। गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अगस्त में निधन हो गया था।
अपने गांव में बिताए पलों को भी किया याद
पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की एक नई पुस्तक जल्द ही आने वाली है। राजनीतिक संस्मरणों के अलावा प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में पश्चिम बंगाल में अपने एक गांव में बिताए बचपन के किस्सों पर भी रोशनी डाली है। साथ ही राष्ट्रपति बनने तक को सफर के बारे में विस्तार से बताया है।
मनमोहन और मोदी के बारे में लिखा
पुस्तक में मुखर्जी ने राष्ट्रपति रहते हुए राजनीतिक रूप से दो विरोधी प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह के साथ अपने अनुभव को बताया है। मुखर्जी के इस चौथे संस्करण में पूर्व राष्ट्रपति ने शीर्ष संवैधानिक पद पर रहते हुए कई चुनौतियों तथा कुछ मुश्किल भरे फैसलों के बारे में बात की है।
प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ में लिखा है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस ने दिशाहीन हो गई। सोनिया गांधी पार्टी के मामले नहीं संभाल पा रहीं थीं। उन्होंने अपनी किताब में लिखा कि “कांग्रेस के कुछ नेताओं ने मुझसे कहा था कि अगर साल 2004 में मैं प्रधानमंत्री बन गया होता तो 2014 में कांग्रेस को ऐसी करारी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता।”
लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि “कांग्रेस नेताओं के इस दृष्टिकोण से वास्ता नहीं रखता, लेकिन मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति के रूप में मेरे चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व दिशाहीन हो गया। सोनिया गांधी पार्टी के मामलों को संभालने में असमर्थ हो गई थीं, वहीं डॉ. मनमोहन सिंह की लंबे समय तक अनुपस्थिति के कारण सदन ने अन्य सांसदों के साथ किसी भी व्यक्तिगत संपर्क को खो दिया था।”
गौरतलब है कि ‘रूपा बुक्स’ प्रकाशन ने शुक्रवार को बताया कि प्रणब मुखर्जी के संस्मरण ‘द प्रेसिडेंसियल ईयर्स’ को जनवरी, 2021 में वैश्विक स्तर पर जारी किया जाएगा। 11 दिसंबर को प्रणब मुखर्जी के जन्मदिन पर प्रकाशन के प्रबंध निदेशक कपिश जी. मेहरा ने कहा कि प्रणब दा ने इस बात को महत्व दिया कि अपने पीछे कोई लकीर छोड़े बिना वह लोगों की भीड़ में खो जाएंगे। आज वह अपने पीछे एक बेमिसाल विरासत छोड़ गए हैं। इनमें से कुछ बातों का उल्लेख उन्होंने अपने संस्मरणों में किया है।
चुनावी राजनीति में जहां इन दिनों कांग्रेस पार्टी लगातार हार का सामना कर रही है, वहीं पार्टी की आतंरिक राजनीति की अब सामने आने लगे है। लेकिन पार्टी नेतृत्व पर अब दिवंगत प्रणब मुखर्जी की किताब में भी कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संस्मरणों पर आधारित किताब में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी हार से लिए सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है। अपनी किताब में प्रणब दा यह भी लिखते हैं कि "कांग्रेस के कुछ सदस्य" मानते थे अगर वह प्रधानमंत्री होते, तो पार्टी सत्ता नहीं गंवाती। गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अगस्त में निधन हो गया था।
अपने गांव में बिताए पलों को भी किया याद
पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की एक नई पुस्तक जल्द ही आने वाली है। राजनीतिक संस्मरणों के अलावा प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में पश्चिम बंगाल में अपने एक गांव में बिताए बचपन के किस्सों पर भी रोशनी डाली है। साथ ही राष्ट्रपति बनने तक को सफर के बारे में विस्तार से बताया है।
मनमोहन और मोदी के बारे में लिखा
पुस्तक में मुखर्जी ने राष्ट्रपति रहते हुए राजनीतिक रूप से दो विरोधी प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह के साथ अपने अनुभव को बताया है। मुखर्जी के इस चौथे संस्करण में पूर्व राष्ट्रपति ने शीर्ष संवैधानिक पद पर रहते हुए कई चुनौतियों तथा कुछ मुश्किल भरे फैसलों के बारे में बात की है।
प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ में लिखा है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद कांग्रेस ने दिशाहीन हो गई। सोनिया गांधी पार्टी के मामले नहीं संभाल पा रहीं थीं। उन्होंने अपनी किताब में लिखा कि “कांग्रेस के कुछ नेताओं ने मुझसे कहा था कि अगर साल 2004 में मैं प्रधानमंत्री बन गया होता तो 2014 में कांग्रेस को ऐसी करारी हार का मुंह नहीं देखना पड़ता।”
लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि “कांग्रेस नेताओं के इस दृष्टिकोण से वास्ता नहीं रखता, लेकिन मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति के रूप में मेरे चुनाव के बाद कांग्रेस नेतृत्व दिशाहीन हो गया। सोनिया गांधी पार्टी के मामलों को संभालने में असमर्थ हो गई थीं, वहीं डॉ. मनमोहन सिंह की लंबे समय तक अनुपस्थिति के कारण सदन ने अन्य सांसदों के साथ किसी भी व्यक्तिगत संपर्क को खो दिया था।”
गौरतलब है कि ‘रूपा बुक्स’ प्रकाशन ने शुक्रवार को बताया कि प्रणब मुखर्जी के संस्मरण ‘द प्रेसिडेंसियल ईयर्स’ को जनवरी, 2021 में वैश्विक स्तर पर जारी किया जाएगा। 11 दिसंबर को प्रणब मुखर्जी के जन्मदिन पर प्रकाशन के प्रबंध निदेशक कपिश जी. मेहरा ने कहा कि प्रणब दा ने इस बात को महत्व दिया कि अपने पीछे कोई लकीर छोड़े बिना वह लोगों की भीड़ में खो जाएंगे। आज वह अपने पीछे एक बेमिसाल विरासत छोड़ गए हैं। इनमें से कुछ बातों का उल्लेख उन्होंने अपने संस्मरणों में किया है।


Journalist खबरीलाल












