रायपुर। पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कृषि कानूनों के विरोध में
आंदोलनरत किसानों को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। जिन्हें खेती - किसानी से
मतलब नहीं वहीं किसान आंदोलन से जुड़े है। आंदोलन में न केवल अर्बन नक्सली
बल्कि कई सारे गैंग जुड़े हुए है और ऐसे ही लोग आंदोलन को बढ़ावा दे रहे
है।
भाजपा कार्यालय में पत्रकारवार्ता लेते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा
कि केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून पूरी तरह किसानों की संपन्नता के
लिए है। एमएसपी को समाप्त करने की बात केंद्र सरकार ने कभी भी नहीं की है,
सरकार से लगातार हो रही बातचीत के बीच भी किसानों का आंदोलन जारी रखना समझ
से परे है। आंदोलन की आड़ में अराजगता का माहौल पैदा कर रहे है। हकीकत यह
है कि कृषि के तीनों कानूनों के माध्यम से न केवल एमएसपी में वृद्धि होगी
बल्कि मंडी राज पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। कानून का असर क्या हो सकता है यह
किसानों ने देखा भी नहीं और विरोध करना शुरु कर दिए। आंदोलन का रास्ता
हमेशा खुला रहता है लेकिन सरकार पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन
को राजनीतिक मंच देने वालों को आड़ें हाथों लेते हुए कहा कि किसानों के
आंदोलन से उन्हें कोई वास्ता नहीं, वे केवल अपना राजनीतिक लाभ देख रहे है
इसलिए बेहतर यही होगा कि किसान अपना आंदोलन खत्म कर सरकार से बातचीत करें।
रायपुर। पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कृषि कानूनों के विरोध में
आंदोलनरत किसानों को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। जिन्हें खेती - किसानी से
मतलब नहीं वहीं किसान आंदोलन से जुड़े है। आंदोलन में न केवल अर्बन नक्सली
बल्कि कई सारे गैंग जुड़े हुए है और ऐसे ही लोग आंदोलन को बढ़ावा दे रहे
है।
भाजपा कार्यालय में पत्रकारवार्ता लेते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा
कि केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून पूरी तरह किसानों की संपन्नता के
लिए है। एमएसपी को समाप्त करने की बात केंद्र सरकार ने कभी भी नहीं की है,
सरकार से लगातार हो रही बातचीत के बीच भी किसानों का आंदोलन जारी रखना समझ
से परे है। आंदोलन की आड़ में अराजगता का माहौल पैदा कर रहे है। हकीकत यह
है कि कृषि के तीनों कानूनों के माध्यम से न केवल एमएसपी में वृद्धि होगी
बल्कि मंडी राज पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। कानून का असर क्या हो सकता है यह
किसानों ने देखा भी नहीं और विरोध करना शुरु कर दिए। आंदोलन का रास्ता
हमेशा खुला रहता है लेकिन सरकार पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन
को राजनीतिक मंच देने वालों को आड़ें हाथों लेते हुए कहा कि किसानों के
आंदोलन से उन्हें कोई वास्ता नहीं, वे केवल अपना राजनीतिक लाभ देख रहे है
इसलिए बेहतर यही होगा कि किसान अपना आंदोलन खत्म कर सरकार से बातचीत करें।


Journalist खबरीलाल












