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विधानसभा में वोरा को दी गई श्रद्धांजलि :

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रायपुर। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश के राज्यपाल व
कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री दिवंगत मोतीलाल वोरा के निधन पर विधानसभा
में मंगलवार को सभी सदस्यों ने अपनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री
भूपेश बघेल भावुक भी हो गए। सभी वक्ताओं ने श्री वोरा को मेहनती, ईमानदार
और विनम्र राजनेता के रूप में याद किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने
उद्बोधन में कहा कि सुबह से लेकर देर रात तक काम करना श्री वोरा की आदत थी।
इस दौरान कभी मिलना होता था, तो उसी समय वे पूरी आत्मीयता से मिलते थे।
थकान उनके शब्दकोश में नहीं था। उनमें लगन, परिश्रम और निष्ठा अद्वितीय था।
उनका राजनीतिक परिवार बहुत बड़ा था। उनके जाने से देश और प्रदेश को क्षति
पहुंची है। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री वोरा को याद करते हुए भावुक भी हो
गए।


गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि उनका पूरा जीवन पाठशाला था, और 
उनसे बहुत कुछ सिखने को मिला। श्री साहू ने उनसे जुड़े कुछ संस्मरण सुनाए,
और बताया कि राजनीति के शुरूआत में उनके पास काम से जाना होता था। एक बार
उन्होंने वोराजी से चि_ी लिखवाई, फोन भी कराया, लेकिन काम नहीं हुआ।
आखिरकार एक बार बोल दिया कि आपको काम नहीं करना है, तो बोल दिया करें। उस
समय तो उन्होंने कुछ नहीं कहा। बाद में एक दिन उन्होंने समझाईश दी कि दुख
के समय मिलकर काटना चाहिए, और सुख के समय को मिल बांटकर काटना चाहिए। जब
श्री वोरा मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अपने से जुड़े सभी लोगों को कुछ न
कुछ पद दिया। इसी तरह एक बार लोकसभा टिकट उनकी तय हो गई थी, प्रचार भी शुरू
हो गया था। बाद में उनकी जगह चंदूलाल चंद्राकरजी को टिकट मिल गई। कुछ लोग
दिल्ली जाकर राजीव गांधीजी से मिले। बाद में उन्होंने मुझसे कहा कि मैं
जाकर राजीवजी से अनुरोध करता तो टिकट मिल जाती। मगर यह नेता की बेज्जती
होती। यहां उनके नेता के प्रति आस्था को दिखाता है।


संसदीय कार्यमंत्री
रविंद्र चौबे ने कहा कि वे बेहद विनम्र व्यक्ति थे।  बड़े से बड़ा व्यक्ति
उनके पास जाता था, तो उनसे भी उसी तरह आत्मीयता से पेश आते थे, जिस तरह
स्वेच्छानुदान के लिए मिलने आए लोगों से पेश आते थे। श्री चौबे ने बताया कि
उनके उच्च शिक्षा मंत्री रहते जो भी महाविद्यालय के लिए मांग करता था, सभी
विधायकों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दिया था। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक,
प्रेमसाय सिंह सहित अन्य नेताओं ने उनके योगदान को याद किया।
पूर्व
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में वे मोती की तरह
चमकते रहे। वे गंभीर राजनीतिज्ञ थे। उनके खिलाफ चुनाव लडऩे का मौका मिला।
इस दौरान उन्हें जाना कि उनका व्यक्तित्व कितना बड़ा था। चुनाव प्रचार के
दौरान एक बार मेरी गाड़ी खराब हो गई। वे वहांं से गुजर रहे थे, तो उन्होंने
कार्यकर्ताओं से गाड़ी ठीक कराने कहा। मैं मजाक से उनसे कहा लोकसभा के लिए
भी इसी तरह धक्का दे देते। पूर्व मुख्यमंत्री ने याद करते हुए कहा कि
जन्मदिन के मौके पर हमेशा उनकी बधाई का इंतजार रहता था। वे हम सब के
अभिभावक थे।


जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नेता धर्मजीत सिंह ने कहा कि
श्री वोरा के जाने से हम सब व्यथित हैं। वे न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे
देश के लाल थे। वे बेहद मिलनसार, ईमानदार थे। वे अजातशत्रु थे। छत्तीसगढ़
के लिए हमेशा सोचते थे। वे जिस कुर्सी पर भी बैठे हमेशा ईमानदारी और
निष्पक्षता से ही काम करते थे। उन्होंने याद किया कि एक बार श्री वोरा के
मुख्यमंत्रित्व काल में पांडातराई गोलीकांड हुआ था। जिसमें चार लोगों की
मौत हो गई थी। इस घटना से श्री वोरा काफी दुखी थे। श्री वोरा ने बाद में
वहां पहुंचकर सभी प्रमुख लोगों को बुलाया, विकास को लेकर चर्चा की।
उन्होंने गोबरा डायर्वसन का काम स्वीकृत किया। श्री सिंह ने कहा कि श्री
वोरा दुर्घटना को विकास से जोडकऱ नॉर्मल करने की कोशिश की थी। धर्मजीत सिंह
ने कहा कि श्री वोरा राजनीति के विश्वविद्यालय थे। नई पीढ़ी के लोगों को
उनसे सिखना चाहिए। वे हमेशा याद आते रहेंगे। 



रायपुर। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश के राज्यपाल व
कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री दिवंगत मोतीलाल वोरा के निधन पर विधानसभा
में मंगलवार को सभी सदस्यों ने अपनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री
भूपेश बघेल भावुक भी हो गए। सभी वक्ताओं ने श्री वोरा को मेहनती, ईमानदार
और विनम्र राजनेता के रूप में याद किया।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने
उद्बोधन में कहा कि सुबह से लेकर देर रात तक काम करना श्री वोरा की आदत थी।
इस दौरान कभी मिलना होता था, तो उसी समय वे पूरी आत्मीयता से मिलते थे।
थकान उनके शब्दकोश में नहीं था। उनमें लगन, परिश्रम और निष्ठा अद्वितीय था।
उनका राजनीतिक परिवार बहुत बड़ा था। उनके जाने से देश और प्रदेश को क्षति
पहुंची है। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री वोरा को याद करते हुए भावुक भी हो
गए।


गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि उनका पूरा जीवन पाठशाला था, और 
उनसे बहुत कुछ सिखने को मिला। श्री साहू ने उनसे जुड़े कुछ संस्मरण सुनाए,
और बताया कि राजनीति के शुरूआत में उनके पास काम से जाना होता था। एक बार
उन्होंने वोराजी से चि_ी लिखवाई, फोन भी कराया, लेकिन काम नहीं हुआ।
आखिरकार एक बार बोल दिया कि आपको काम नहीं करना है, तो बोल दिया करें। उस
समय तो उन्होंने कुछ नहीं कहा। बाद में एक दिन उन्होंने समझाईश दी कि दुख
के समय मिलकर काटना चाहिए, और सुख के समय को मिल बांटकर काटना चाहिए। जब
श्री वोरा मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अपने से जुड़े सभी लोगों को कुछ न
कुछ पद दिया। इसी तरह एक बार लोकसभा टिकट उनकी तय हो गई थी, प्रचार भी शुरू
हो गया था। बाद में उनकी जगह चंदूलाल चंद्राकरजी को टिकट मिल गई। कुछ लोग
दिल्ली जाकर राजीव गांधीजी से मिले। बाद में उन्होंने मुझसे कहा कि मैं
जाकर राजीवजी से अनुरोध करता तो टिकट मिल जाती। मगर यह नेता की बेज्जती
होती। यहां उनके नेता के प्रति आस्था को दिखाता है।


संसदीय कार्यमंत्री
रविंद्र चौबे ने कहा कि वे बेहद विनम्र व्यक्ति थे।  बड़े से बड़ा व्यक्ति
उनके पास जाता था, तो उनसे भी उसी तरह आत्मीयता से पेश आते थे, जिस तरह
स्वेच्छानुदान के लिए मिलने आए लोगों से पेश आते थे। श्री चौबे ने बताया कि
उनके उच्च शिक्षा मंत्री रहते जो भी महाविद्यालय के लिए मांग करता था, सभी
विधायकों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दिया था। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक,
प्रेमसाय सिंह सहित अन्य नेताओं ने उनके योगदान को याद किया।
पूर्व
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में वे मोती की तरह
चमकते रहे। वे गंभीर राजनीतिज्ञ थे। उनके खिलाफ चुनाव लडऩे का मौका मिला।
इस दौरान उन्हें जाना कि उनका व्यक्तित्व कितना बड़ा था। चुनाव प्रचार के
दौरान एक बार मेरी गाड़ी खराब हो गई। वे वहांं से गुजर रहे थे, तो उन्होंने
कार्यकर्ताओं से गाड़ी ठीक कराने कहा। मैं मजाक से उनसे कहा लोकसभा के लिए
भी इसी तरह धक्का दे देते। पूर्व मुख्यमंत्री ने याद करते हुए कहा कि
जन्मदिन के मौके पर हमेशा उनकी बधाई का इंतजार रहता था। वे हम सब के
अभिभावक थे।


जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नेता धर्मजीत सिंह ने कहा कि
श्री वोरा के जाने से हम सब व्यथित हैं। वे न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे
देश के लाल थे। वे बेहद मिलनसार, ईमानदार थे। वे अजातशत्रु थे। छत्तीसगढ़
के लिए हमेशा सोचते थे। वे जिस कुर्सी पर भी बैठे हमेशा ईमानदारी और
निष्पक्षता से ही काम करते थे। उन्होंने याद किया कि एक बार श्री वोरा के
मुख्यमंत्रित्व काल में पांडातराई गोलीकांड हुआ था। जिसमें चार लोगों की
मौत हो गई थी। इस घटना से श्री वोरा काफी दुखी थे। श्री वोरा ने बाद में
वहां पहुंचकर सभी प्रमुख लोगों को बुलाया, विकास को लेकर चर्चा की।
उन्होंने गोबरा डायर्वसन का काम स्वीकृत किया। श्री सिंह ने कहा कि श्री
वोरा दुर्घटना को विकास से जोडकऱ नॉर्मल करने की कोशिश की थी। धर्मजीत सिंह
ने कहा कि श्री वोरा राजनीति के विश्वविद्यालय थे। नई पीढ़ी के लोगों को
उनसे सिखना चाहिए। वे हमेशा याद आते रहेंगे। 



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