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वोरा जी से जुड़ी कुछ यादें ,जिन्हे शायद आप भी नहीं जानते हों..:

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रायपुर। कांग्रेस के कद्दावर नेता मोतीलाल वोरा,जो नहीं रहे उनकी
सहजता व सरलता के बीच उनके साथ बिताये दिन कोई याद कर रहा है तो कोई उनके
द्वारा किए कार्यों को। लेकिन सभी लोगों को इसकी जानकारी हो यह भी संभव
नहीं आप भी जान लें उन्ही में से कुछ बातें..।
आपकी सरकार-आपके द्वार योजना को मिली देश में पहचान--
मोतीलाल
वोरा के दूसरे कार्यकाल (1989) की एक योजना 'आपकी सरकार-आपके द्वारÓ को
देश भर में पहचान मिली। देश में पहले मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा
थे,जिन्होंने ऐसे लोगों के लिए के शुरु की, जिनकी पहुंच सरकार तक नहीं थी।
उन्होंने सरकार को ही आम आदमी के घर तक पहुंचा दिया था। वे खुद भी लोगों के
घर जाते थे और समस्याएं सुनते थे। आम आदमी के लिए सीएम हाउस के दरवाजे 24
घंटे खुले रहते थे। उनसे मिलने कोई बिना अप्वाइमेंट के भी पहुंचता था तो
उनसे भी वे मिलते थे। उनके कार्यकाल में शायद ही कोई व्यक्ति था, जो उनके
मिले बिना सीएम हाउस से लौटा हो। रात में जब वे सोने जाते थे, उससे पहले
स्टाफ से पूछते थे- कोई मिलने वाला तो नहीं है। आपकी सरकार-आपके द्वार
योजना को आगे चल कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने
निरंतर रखा।


हर रोज 4 घंटे गैस पीडि़तों के बीच रहते थे--
उनके
एक सहयोगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशन पंत बताते हैं कि मोतीलाल वोरा
जनहित में लिए जाने वाले निर्णयों के लिए जाने जाते थे। भोपाल में गैस
पीडितों के लिए मुख्यमंत्री रहते मोतीलाल वोरा ने बहुत काम किया। उन्होंने
गैस पीडि़तों के लिए अस्पताल बनवाए। वे हर रोज कम से कम 4 घंटे गैस
पीडि़तों के बीच में रहते थे।
वे गलियों में पैदल घूमते थे और स्वास्थ्य
और पानी की व्यवस्थाओं को देखते थे। जब वे वर्ष 1971 में राज्य परिवहन
निगम के उपाध्यक्ष थे। उस दौरान निगम में बड़ी हड़ताल हुई थी। सीताराम जाजू
निगम के अध्यक्ष थे। जितने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया था, उन्हें
मोतीलाल वोरा ने वापस रखवाया। नई भर्तियां भी की। निगम को खड़ा करने में
उनका का अहम रोल था।
पूरे प्रदेश में खोले सरकारी कॉलेज--
मोतीलाल
वोरा 1980 में पहली बार अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री बने। उन्हें उच्च
शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई। साथ में नगरीय
प्रशासन विभाग भी था। अर्जुन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे महेश जोशी
के मुताबिक मोतीलाल वोरा जब उच्च शिक्षा मंत्री बने, तब सरकारी कॉलेज कम
प्राइवेट कॉलेज ज्यादा थे। उनके ही कार्यकाल में प्रदेश के अधिकांश
प्राइवेट कॉलेजों का अधिग्रहण सरकार ने किया। इतना ही नहीं, उन्होंने नए
कॉलेज शुरु भी कराए और उच्च शिक्षा को एक नई दिशा दी।


मुफ्त में प्याज लेने से कर दिया था इंकार--
मोतीलाल
वोरा की कार्य पद्वति और प्रशासनिक कुशलता के कई किस्से हैं। उनके ओएसडी
रहे केडी कुकरैती एक किस्सा याद कर बताते हैं - वर्ष 1987 में पुणे में
मुख्यमंत्रियों की इंटर स्टेट कमेटी की बैठक थी। जिसमें मोतीलाल वोरा भी
शामिल हुए थे। उस दौरान महाराष्ट्र में प्याज की बंपर पैदावार हो गई थी।
बैठक में महाराष्ट्र के सीएम ने वोराजी को ऑफर दिया कि मप्र को जितनी भी
प्याज चाहिए, हम मुफ्त में दे देंगे। उन्होंने बैठक में इसका कोई जवाब नहीं
दिया।
जबकि उन्हें बार-बार कहा जा रहा था कि मुफ्त में दे रहे हैं। आप
इतना क्यों सोच रहे हैं? बैठक खत्म होते ही उन्होंने मंत्रालय में अफसरों
को फोन पर कहा कि मेरे लौटने तक यह जानकारी एकत्र कर ली जाए कि मप्र में
प्याज का भाव क्या है। यदि नासिक से प्याज बुलाया जाए तो भाड़ा कितना
लगेगा। भोपाल पहुंचते ही अफसरों ने उन्हें प्याज का गणित समझाया कि एमपी
में प्याज को जो भाव है। उस हिसाब से देखें तो मुफ्त की प्याज महंगी
पड़ेगी। क्योंकि जितना भाड़ा लगेगा, उससे सस्ती प्याज मप्र में बिक रही है।
उन्होंने एयरपोर्ट से ही महाराष्ट्र के सीएम को फोन पर कह दिया- मुफ्त में
प्याज लेकर जनता और सराकर पर बोझ नहीं डाल सकते।


गवर्नर रहते सीएम जैसा काम किया--
मोतीलाल
वोरा 26 मई 1993 से 3 मई 1996 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे। इस इस
दौरान बावरी मस्जिद कांड के चलते उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था। वे
राज्यपाल की कम, सीएम की भूमिका में ज्यादा रहते थे। वे हर दिन एनेक्सी
बिल्डिंग में जाकर अफसरों की बैठकें करते थे। वरिष्ठ पत्रकार अरुण पटेल
बताते हैं कि वे भले ही यूपी के गवर्नर रहे, लेकिन कार्यशैली के कारण लोगों
से उनका सीधा जुड़ाव था।(साभार-भास्कर)



रायपुर। कांग्रेस के कद्दावर नेता मोतीलाल वोरा,जो नहीं रहे उनकी
सहजता व सरलता के बीच उनके साथ बिताये दिन कोई याद कर रहा है तो कोई उनके
द्वारा किए कार्यों को। लेकिन सभी लोगों को इसकी जानकारी हो यह भी संभव
नहीं आप भी जान लें उन्ही में से कुछ बातें..।
आपकी सरकार-आपके द्वार योजना को मिली देश में पहचान--
मोतीलाल
वोरा के दूसरे कार्यकाल (1989) की एक योजना 'आपकी सरकार-आपके द्वारÓ को
देश भर में पहचान मिली। देश में पहले मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा
थे,जिन्होंने ऐसे लोगों के लिए के शुरु की, जिनकी पहुंच सरकार तक नहीं थी।
उन्होंने सरकार को ही आम आदमी के घर तक पहुंचा दिया था। वे खुद भी लोगों के
घर जाते थे और समस्याएं सुनते थे। आम आदमी के लिए सीएम हाउस के दरवाजे 24
घंटे खुले रहते थे। उनसे मिलने कोई बिना अप्वाइमेंट के भी पहुंचता था तो
उनसे भी वे मिलते थे। उनके कार्यकाल में शायद ही कोई व्यक्ति था, जो उनके
मिले बिना सीएम हाउस से लौटा हो। रात में जब वे सोने जाते थे, उससे पहले
स्टाफ से पूछते थे- कोई मिलने वाला तो नहीं है। आपकी सरकार-आपके द्वार
योजना को आगे चल कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने
निरंतर रखा।


हर रोज 4 घंटे गैस पीडि़तों के बीच रहते थे--
उनके
एक सहयोगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशन पंत बताते हैं कि मोतीलाल वोरा
जनहित में लिए जाने वाले निर्णयों के लिए जाने जाते थे। भोपाल में गैस
पीडितों के लिए मुख्यमंत्री रहते मोतीलाल वोरा ने बहुत काम किया। उन्होंने
गैस पीडि़तों के लिए अस्पताल बनवाए। वे हर रोज कम से कम 4 घंटे गैस
पीडि़तों के बीच में रहते थे।
वे गलियों में पैदल घूमते थे और स्वास्थ्य
और पानी की व्यवस्थाओं को देखते थे। जब वे वर्ष 1971 में राज्य परिवहन
निगम के उपाध्यक्ष थे। उस दौरान निगम में बड़ी हड़ताल हुई थी। सीताराम जाजू
निगम के अध्यक्ष थे। जितने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया था, उन्हें
मोतीलाल वोरा ने वापस रखवाया। नई भर्तियां भी की। निगम को खड़ा करने में
उनका का अहम रोल था।
पूरे प्रदेश में खोले सरकारी कॉलेज--
मोतीलाल
वोरा 1980 में पहली बार अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री बने। उन्हें उच्च
शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई। साथ में नगरीय
प्रशासन विभाग भी था। अर्जुन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे महेश जोशी
के मुताबिक मोतीलाल वोरा जब उच्च शिक्षा मंत्री बने, तब सरकारी कॉलेज कम
प्राइवेट कॉलेज ज्यादा थे। उनके ही कार्यकाल में प्रदेश के अधिकांश
प्राइवेट कॉलेजों का अधिग्रहण सरकार ने किया। इतना ही नहीं, उन्होंने नए
कॉलेज शुरु भी कराए और उच्च शिक्षा को एक नई दिशा दी।


मुफ्त में प्याज लेने से कर दिया था इंकार--
मोतीलाल
वोरा की कार्य पद्वति और प्रशासनिक कुशलता के कई किस्से हैं। उनके ओएसडी
रहे केडी कुकरैती एक किस्सा याद कर बताते हैं - वर्ष 1987 में पुणे में
मुख्यमंत्रियों की इंटर स्टेट कमेटी की बैठक थी। जिसमें मोतीलाल वोरा भी
शामिल हुए थे। उस दौरान महाराष्ट्र में प्याज की बंपर पैदावार हो गई थी।
बैठक में महाराष्ट्र के सीएम ने वोराजी को ऑफर दिया कि मप्र को जितनी भी
प्याज चाहिए, हम मुफ्त में दे देंगे। उन्होंने बैठक में इसका कोई जवाब नहीं
दिया।
जबकि उन्हें बार-बार कहा जा रहा था कि मुफ्त में दे रहे हैं। आप
इतना क्यों सोच रहे हैं? बैठक खत्म होते ही उन्होंने मंत्रालय में अफसरों
को फोन पर कहा कि मेरे लौटने तक यह जानकारी एकत्र कर ली जाए कि मप्र में
प्याज का भाव क्या है। यदि नासिक से प्याज बुलाया जाए तो भाड़ा कितना
लगेगा। भोपाल पहुंचते ही अफसरों ने उन्हें प्याज का गणित समझाया कि एमपी
में प्याज को जो भाव है। उस हिसाब से देखें तो मुफ्त की प्याज महंगी
पड़ेगी। क्योंकि जितना भाड़ा लगेगा, उससे सस्ती प्याज मप्र में बिक रही है।
उन्होंने एयरपोर्ट से ही महाराष्ट्र के सीएम को फोन पर कह दिया- मुफ्त में
प्याज लेकर जनता और सराकर पर बोझ नहीं डाल सकते।


गवर्नर रहते सीएम जैसा काम किया--
मोतीलाल
वोरा 26 मई 1993 से 3 मई 1996 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे। इस इस
दौरान बावरी मस्जिद कांड के चलते उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था। वे
राज्यपाल की कम, सीएम की भूमिका में ज्यादा रहते थे। वे हर दिन एनेक्सी
बिल्डिंग में जाकर अफसरों की बैठकें करते थे। वरिष्ठ पत्रकार अरुण पटेल
बताते हैं कि वे भले ही यूपी के गवर्नर रहे, लेकिन कार्यशैली के कारण लोगों
से उनका सीधा जुड़ाव था।(साभार-भास्कर)



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