दशकों से अफ्रीकी लोगों को अपनी चपेट में
लेने वाली बीमारी मंकीपॉक्स के मरीज अब 75 से ज्यादा देशों में मिलने लगे
हैं। भारत में भी इसके मामले दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे
कि अचानक इसका संक्रमण इतनी तेजी से कैसे फैल रहा है। इन सबके बीच लंदन के
एक अध्ययन में दावा किया गया है कि वर्तमान में मंकीपॉक्स से संक्रमित
लोगों में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जो आम तौर पर विषाणु संक्रमण से जुड़े हुए
नहीं हैं।
क्या हैं ये नए लक्षण-
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसके
मुताबिक, वैज्ञानिकों ने मई और जुलाई 2022 के बीच लंदन स्थित एक संक्रामक
रोग केंद्र में मंकीपॉक्स के 197 पुष्ट मामलों का परीक्षण किया। शोधकर्ताओं
ने पाया कि रोगियों द्वारा बताए गए कुछ सामान्य लक्षणों में मलाशय में
दर्द और लिंग में सूजन शामिल हैं जो पिछले प्रकोपों के लक्षणों से
भिन्न हैं। उन्होंने ऐसे लक्षणों वाले रोगियों की जांच करने का सुझाव दिया
ताकि हकीकत सामने आ सके।
सबसे ज्यादा मरीज बुखार से पीड़ित-
अध्ययन में शामिल सभी 197 प्रतिभागी पुरुष थे जिनकी औसत आयु 38 वर्ष थी।
इनमें से 196 की पहचान समलैंगिक, उभयलैंगिकता रखने वाले या ऐसे अन्य
पुरुषों के रूप में हुई जो पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते हैं। अधिकतर (86
प्रतिशत) रोगियों ने संक्रमण से पूरे शरीर के प्रभावित होने की बात कही।
सबसे ज्यादा 62 प्रतिशत लोगों में बुखार था। इसके बाद 58 प्रतिशत लोगों के
लिम्फ नोड्स में सूजन पाया गया और 32 प्रतिशत लोगों की मांसपेशियों में
दर्द था।
पहले से अलग लक्षण-
अध्ययन में शामिल 71 रोगियों ने मलाशय में दर्द, 33 ने गले में खराश और 31
ने लिंग में सूजन की सूचना दी, जबकि 27 के मुंह में घाव थे, 22 को शरीर के
विभिन्न हिस्सों पर एकल घाव तथा नौ रोगियों के टॉन्सिल में सूजन थी।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि एक जगह घाव और टॉन्सिल में सूजन को पहले
मंकीपॉक्स संक्रमण के विशिष्ट लक्षणों के रूप में नहीं जाना जाता था।
एक तिहाई (36 प्रतिशत) प्रतिभागियों को एचआईवी संक्रमण भी था और
32 प्रतिशत लोगों में यौन संचारित संक्रमण था। कुल मिलाकर, 20 (10 प्रतिशत)
प्रतिभागियों को लक्षणों के प्रबंधन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया
जिनमें ज्यादातर को मलाशय में दर्द और लिंग में सूजन की समस्या थी।
हालांकि, किसी की मौत की सूचना नहीं मिली और किसी भी मरीज को गहन चिकित्सा
कक्ष में रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी।



Journalist खबरीलाल














