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कांग्रेस की सावित्री जीत गईं भानुप्रतापपुर उपचुनाव:

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  कांकेर .छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस का कब्जा हो गया है। सावित्री मंडावी ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम को 21,171 वोटों से हराया है। इस बड़ी जीत के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है। कांग्रेस दफ्तर के बाहर जमकर आतिशबाजी हो रही है।

मिठाइयां बांटी जा रही हैं

भानुप्रतापुर उपुचनाव नतीजों पर सीएम भूपेश बघेल ने बयान दिया था कि नतीजा बता रहा है कि सरकार पर लोगों का भरोसा कायम है। वहां पर मनोज मंडावी के किए हुए काम पर मुहर लगी है। भाजपा को वहां दूसरे-तीसरे स्थान पर रहने के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ा।

कांग्रेस में जश्न का माहौल

कांग्रेस के पक्ष मे शुरुआती रुझान आने के बाद से ही कांग्रेस खेमे में जश्न का महौल शुरू हो गया था। कोंडागांव कांग्रेस दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की। रायपुर के राजीव भवन में मिठाइयां बांटी गई।

विधानसभा उपचुनाव के लिए 256 पोलिंग बूथ में 5 दिसंबर को वोटिंग हुई थी।चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा आदिवासी आरक्षण था। भाजपा प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम पर कांग्रेस ने बलात्कार का आरोप लगाया गया।

भाजपा प्रत्याशी को चुनावी मैदान में हराने कांग्रेस ने बड़ा ट्रंप कार्ड खेला था। तो वहीं भाजपा ने आरक्षण को बड़ा मुद्दा बनाकर इस चुनावी मैदान में अपने लिए जीत का रास्ता क्लियर करने की कोशिश की। तो वहीं इन दोनों ही पार्टियों से खफा सर्व आदिवासी समाज ने अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में खड़ा किया था।

पूर्व IPS अकबर राम कोर्राम। बस्तर पुलिस के DIG पद से रिटायर हुए अकबर राम कोर्राम को आदिवासी पसंद कर रहे थे। आलम ये है कि इन्हें जिताने के लिए गांव-गांव कसमें खाई जा रही थी कि लोग भाजपा और कांग्रेस का साथ न देकर इन्हें ही समर्थन देंगे। दैनिक भास्कर से बात-चीत में अकबर राम कोर्राम ने अपने अनोखे नाम की कहानी भी बताई और DIG से नेता बनने की वजह भी।

अकबर राम कोर्राम को सर्व आदिवासी समाज ने अपना प्रत्याशी बनाया था। इनसे पहले और भी लोगों को अलग-अलग गांवों में समाज ने भानुप्रतापपुर के चुनाव में उतारा, मगर बाकियों ने नाम वापस लिए थे। अकबर ने बताया था कि प्रदेश में आदिवासी आरक्षण की कटौती की गई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों दल इसके जिम्मेदार हैं। इसलिए अब समाज ने मुझे मैदान में उतारा है और संकल्प ले रहे हैं कि उन दलों का साथ न देकर अपने बीच के व्यक्ति काे विधानसभा पहुंचाना है।


  कांकेर .छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस का कब्जा हो गया है। सावित्री मंडावी ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम को 21,171 वोटों से हराया है। इस बड़ी जीत के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है। कांग्रेस दफ्तर के बाहर जमकर आतिशबाजी हो रही है।

मिठाइयां बांटी जा रही हैं

भानुप्रतापुर उपुचनाव नतीजों पर सीएम भूपेश बघेल ने बयान दिया था कि नतीजा बता रहा है कि सरकार पर लोगों का भरोसा कायम है। वहां पर मनोज मंडावी के किए हुए काम पर मुहर लगी है। भाजपा को वहां दूसरे-तीसरे स्थान पर रहने के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ा।

कांग्रेस में जश्न का माहौल

कांग्रेस के पक्ष मे शुरुआती रुझान आने के बाद से ही कांग्रेस खेमे में जश्न का महौल शुरू हो गया था। कोंडागांव कांग्रेस दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की। रायपुर के राजीव भवन में मिठाइयां बांटी गई।

विधानसभा उपचुनाव के लिए 256 पोलिंग बूथ में 5 दिसंबर को वोटिंग हुई थी।चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा आदिवासी आरक्षण था। भाजपा प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम पर कांग्रेस ने बलात्कार का आरोप लगाया गया।

भाजपा प्रत्याशी को चुनावी मैदान में हराने कांग्रेस ने बड़ा ट्रंप कार्ड खेला था। तो वहीं भाजपा ने आरक्षण को बड़ा मुद्दा बनाकर इस चुनावी मैदान में अपने लिए जीत का रास्ता क्लियर करने की कोशिश की। तो वहीं इन दोनों ही पार्टियों से खफा सर्व आदिवासी समाज ने अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में खड़ा किया था।

पूर्व IPS अकबर राम कोर्राम। बस्तर पुलिस के DIG पद से रिटायर हुए अकबर राम कोर्राम को आदिवासी पसंद कर रहे थे। आलम ये है कि इन्हें जिताने के लिए गांव-गांव कसमें खाई जा रही थी कि लोग भाजपा और कांग्रेस का साथ न देकर इन्हें ही समर्थन देंगे। दैनिक भास्कर से बात-चीत में अकबर राम कोर्राम ने अपने अनोखे नाम की कहानी भी बताई और DIG से नेता बनने की वजह भी।

अकबर राम कोर्राम को सर्व आदिवासी समाज ने अपना प्रत्याशी बनाया था। इनसे पहले और भी लोगों को अलग-अलग गांवों में समाज ने भानुप्रतापपुर के चुनाव में उतारा, मगर बाकियों ने नाम वापस लिए थे। अकबर ने बताया था कि प्रदेश में आदिवासी आरक्षण की कटौती की गई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों दल इसके जिम्मेदार हैं। इसलिए अब समाज ने मुझे मैदान में उतारा है और संकल्प ले रहे हैं कि उन दलों का साथ न देकर अपने बीच के व्यक्ति काे विधानसभा पहुंचाना है।


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