अब इस कदम के तार राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से
जोड़कर देखे जा रहे हैं। शुक्रवार से ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में
कांग्रेस का 85वां महाधिवेशन शुरू हो रहा है। इस दौरान पार्टी आगामी
विधानसभा और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार कर सकती
है।
क्या है खड़गे कनेक्शन?
एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि गांधी परिवार
ने इस फैसले के जरिए बड़े संकेत देने की कोशिश की है। उन्होंने दिखाना चाहा
है कि कांग्रेस की कमान खड़गे के ही हाथों में है और उन्हें पार्टी ने
फैसले लेने की खुली छूट दी है। एक चैनल से बातचीत में पार्टी के वरिष्ठ
नेता ने कहा, 'गांधी परिवार संचालन समिति की बैठक में शामिल नहीं होकर
संकेत देंगे कि अब संगठन खड़गे जी चलाते हैं।'
उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी का वह पूरा प्रोपेगैंडा झूठा
साबित हो जाएगा, जहां कहा जाता है कि खड़गे जी केवल रबर स्टांप हैं। संदेश
साफ और स्पष्ट है कि खड़गे जी को पार्टी चलाने की खुली छूट दी हुई है।'
रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा, 'यह
अभूतपूर्व है कि गांधी परिवार बैठक में नहीं होगा। यह बीते 25 सालों में
पहली बार हो रहा है कि कोई भी गांधी अहम बैठक का हिस्सा नहीं बनेगा। संदेश
दिया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व का कोई भी दबाव खड़गे जी पर नहीं है और
यह उनपर छोड़ दिया गया है कि संगठन कैसे चलाना है।'
आगे सूत्रों के हवाले से बताया गया कि राहुल गांधी पार्टी का
'एक्सटर्नल' फेस होंगे। जबकि, खड़गे आंतरिक चेहरे की भूमिका निभाएंगे। ऑल
इंडिया कांग्रेस कमेटी के एक पदाधिकारी ने बताया, 'यह एक सोची समझी रणनीति
है, जहां कांग्रेस अध्यक्ष संगठन के आंतरिक मामलों पर ध्यान देंगे और राहुल
गांधीजी जनता के साथ पार्टी के संबंधों को मजबूत करेंगे।'
गांधी परिवार की जगह हो सकती है स्थायी
अटकलें हैं कि CWC में पूर्व अध्यक्षों और पार्टी से जुड़े प्रधानमंत्रियों
को स्थायी सदस्यता देने पर विचार जारी है। अगर ऐसा होता है, तो राहुल
गांधी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की जगह पक्की हो जाएगी। हालांकि, इन
पदों पर नहीं रहने के चलते प्रियंका गांधी की स्थायी सदस्यता पर सवाल है।
संभावनाएं हैं कि CWC में जगह पाने के लिए उन्हें चुनाव लड़ना पड़ सकता है।



Journalist खबरीलाल














