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Raipur :: छग लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने दिया बयान...:

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रायपुर। विधानसभा चुनाव 2023 के दर्द थोड़ा कम हुआ ही था कि लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को एक ओर बड़ा झटका लग गया। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की 11 में से 10 सीटों में हार का सामन करना पड़ा। इस हार के बाद एक फिर कांग्रेस में बवाल मचा हुआ है और पार्टी के ही नेता एक दूसरे पर किचड़ उछालते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू का बड़ा बयान सामने आया है।

पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लड़ाने पर सहमति थी, लेकिन इस बात की सहमति नहीं थी कि कोई बाहर जाकर चुनाव लड़े। इस चुनाव में बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा हावी रहा। दुर्ग के 4 कांग्रेस नेता लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। हम उम्मीद करते हैं जल्द ही समीक्षा होगी।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू जैसे दिग्गजों को मैदान में उतारा था, लेकिन आखिरकार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हैरानी की बात तो ये है कि ताम्रध्वज साहू जैसे कई नेता ऐसे हैं जो मतगणना के दौरान शुरू से आखिरी तक पीछे ही चलते रहे। आखिरकार नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस को प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।


रायपुर। विधानसभा चुनाव 2023 के दर्द थोड़ा कम हुआ ही था कि लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को एक ओर बड़ा झटका लग गया। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को छत्तीसगढ़ की 11 में से 10 सीटों में हार का सामन करना पड़ा। इस हार के बाद एक फिर कांग्रेस में बवाल मचा हुआ है और पार्टी के ही नेता एक दूसरे पर किचड़ उछालते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू का बड़ा बयान सामने आया है।

पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लड़ाने पर सहमति थी, लेकिन इस बात की सहमति नहीं थी कि कोई बाहर जाकर चुनाव लड़े। इस चुनाव में बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा हावी रहा। दुर्ग के 4 कांग्रेस नेता लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। हम उम्मीद करते हैं जल्द ही समीक्षा होगी।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू जैसे दिग्गजों को मैदान में उतारा था, लेकिन आखिरकार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हैरानी की बात तो ये है कि ताम्रध्वज साहू जैसे कई नेता ऐसे हैं जो मतगणना के दौरान शुरू से आखिरी तक पीछे ही चलते रहे। आखिरकार नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस को प्रदेश की 11 में से 10 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।


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