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तेज गर्मी व घटता जल भंडारण:

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गोंदिया: जून के पहले पखवाड़े में ही तहसील व ग्रामीण क्षेत्र का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। पूरे तहसील में गर्मी बढ़ने से नागरिकों का हाल-बेहाल होना स्वाभाविक है। तापमान में वृद्धि के साथ ही तहसील में पेयजल संकट के लक्षण दिखने लगे हैं। एक ओर तापमान बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तहसील में उपलब्ध जलाशयों में पानी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

जून के पहले पखवाड़े में ही जनजीवन बेहाल होने लगा है। जून के अंत तक गर्मी की दुश्वारियां इसी तरह झेलनी पड़ेगी। पिछले कुछ वर्षों का अनुभव है कि मानसून जून के शुरू में नहीं बल्कि जून के अंत में शुरू होता है। जून के अंतिम सप्ताह में बारिश शुरू होने तक देवरी तहसील को बढ़ते तापमान व घटते जल संकट की समस्या से जूझना पड़ेगा।

जून की शुरुआत में ही प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया और तहसील के कई हिस्से ओलावृष्टि की चपेट में आ गए। नागरिक एक ही समय में तेज गर्मी और ओलावृष्टि के विपरीत मौसम का सामना कर रहे हैं। 2 साल पहले, तहसील के कई हिस्सों में सूखा पड़ा था। जिले के देवरी तहसील को छोड़कर सभी जगहों पर भारी बारिश हुई थी। समय पर बारिश होने से किसान बहुत खुश हुए।

तहसील में तस्वीर यह है कि किसानों के पास प्रकृति की मार झेलने के अलावा कुछ नहीं है। हर साल जलसंकट कार्य योजना के तहत उपाय के तौर पर जलापूर्ति योजना पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में जब गर्मी शुरू होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों से टैंकर से पानी की आपूर्ति की मांग शुरू हो जाती है। तहसील में टैंकरों से की जाने वाली जलापूर्ति केवल कागजों पर ही होती है।

तापमान बढ़ने लगा है। बांधों में जल भंडारण तेजी से घटने वाला है। तापमान बढ़ने पर बांधों में पानी तेजी से वाष्पित होने लगता है। तहसील में छोटे-बड़े बोर, कुएं, नदी, नाले और बांधों में जल भंडारण जून के अंतिम सप्ताह तक रखना पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से मानसून जून के अंत में आ रहा है। बारिश शुरू होने के बाद बांध में पानी जमा होने में समय लगता है।

इसलिए देवरी नगर परिषद को पानी का समझदारी से उपयोग करने की चुनौती देने का समय आ गया है। गर्मियों में पानी की कमी के दौरान पेयजल उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाती है। हर साल पानी की कमी का सामना करने के बावजूद नपं के अधिकारी और प्रशासन इसका समाधान नहीं निकाल पाए हैं। पानी की कमी को दूर करने के नाम पर पानी का सही उपयोग करने की अपील की जा रही है।


गोंदिया: जून के पहले पखवाड़े में ही तहसील व ग्रामीण क्षेत्र का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। पूरे तहसील में गर्मी बढ़ने से नागरिकों का हाल-बेहाल होना स्वाभाविक है। तापमान में वृद्धि के साथ ही तहसील में पेयजल संकट के लक्षण दिखने लगे हैं। एक ओर तापमान बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तहसील में उपलब्ध जलाशयों में पानी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

जून के पहले पखवाड़े में ही जनजीवन बेहाल होने लगा है। जून के अंत तक गर्मी की दुश्वारियां इसी तरह झेलनी पड़ेगी। पिछले कुछ वर्षों का अनुभव है कि मानसून जून के शुरू में नहीं बल्कि जून के अंत में शुरू होता है। जून के अंतिम सप्ताह में बारिश शुरू होने तक देवरी तहसील को बढ़ते तापमान व घटते जल संकट की समस्या से जूझना पड़ेगा।

जून की शुरुआत में ही प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया और तहसील के कई हिस्से ओलावृष्टि की चपेट में आ गए। नागरिक एक ही समय में तेज गर्मी और ओलावृष्टि के विपरीत मौसम का सामना कर रहे हैं। 2 साल पहले, तहसील के कई हिस्सों में सूखा पड़ा था। जिले के देवरी तहसील को छोड़कर सभी जगहों पर भारी बारिश हुई थी। समय पर बारिश होने से किसान बहुत खुश हुए।

तहसील में तस्वीर यह है कि किसानों के पास प्रकृति की मार झेलने के अलावा कुछ नहीं है। हर साल जलसंकट कार्य योजना के तहत उपाय के तौर पर जलापूर्ति योजना पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में जब गर्मी शुरू होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों से टैंकर से पानी की आपूर्ति की मांग शुरू हो जाती है। तहसील में टैंकरों से की जाने वाली जलापूर्ति केवल कागजों पर ही होती है।

तापमान बढ़ने लगा है। बांधों में जल भंडारण तेजी से घटने वाला है। तापमान बढ़ने पर बांधों में पानी तेजी से वाष्पित होने लगता है। तहसील में छोटे-बड़े बोर, कुएं, नदी, नाले और बांधों में जल भंडारण जून के अंतिम सप्ताह तक रखना पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से मानसून जून के अंत में आ रहा है। बारिश शुरू होने के बाद बांध में पानी जमा होने में समय लगता है।

इसलिए देवरी नगर परिषद को पानी का समझदारी से उपयोग करने की चुनौती देने का समय आ गया है। गर्मियों में पानी की कमी के दौरान पेयजल उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाती है। हर साल पानी की कमी का सामना करने के बावजूद नपं के अधिकारी और प्रशासन इसका समाधान नहीं निकाल पाए हैं। पानी की कमी को दूर करने के नाम पर पानी का सही उपयोग करने की अपील की जा रही है।


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