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Mp News (खबरीलाल न्यूज़) : भेल की 2200 एकड़ जमीन लेने की तैयारी में एमपी सरकार, गुस्साए कर्मचारियों का प्रदर्शन:

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भोपाल: राज्य सरकार भोपाल में खाली पड़ी भेल की करीब 2200 एकड़ जमीन वापस लेने की तैयारी कर रही है. जिससे यहां गुजरात की गिफ्ट और मुंबई की बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स की तरह हाइटेक सिटी बनाई जा सके. हालांकि इससे पहले ही जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया. भेल कर्मचारी यह जमीन राज्य सरकार को देने का विरोध कर रहे हैं. भेल के कर्मचारी संगठनों ने सोमवार को फाउंड्री गेट के सामने प्रदर्शन कर इसका विरोध भी जताया.

सोमवार को सीटू यूनियन (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) के पदाधिकारियों और भेल कर्मचारियों ने फाउंड्री गेट पर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. भेल की 2200 एकड़ जमीन को राज्य सरकार द्वारा वापस लिए जाने के निर्णय के खिलाफ भेल कर्मचारियों, श्रमिक संगठनों, सेवानिवृत्त कर्मियों और भोपाल के नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया है. इस प्रदर्शन में कर्मचारी नेता दीपक गुप्ता के साथ अध्यक्ष लोकेंद्र शेखावत, शाहिद अली, नरेश जादौन, विनय सिंह, कुलदीप मौर्य, ध्रुव सिंह मरावी, सहित सैकड़ों भेल कर्मचारी उपस्थित हुए.

श्रमिक नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि, ''ये 2200 एकड़ जमीन जिसका बाजार मूल्य 30 हजार करोड़ से अधिक है और जो 60 वषों से भेल की संपत्ति रही है. इसका उपयोग कर्मचारियों की सुविधाओं, कल्याणकारी योजनाओं व औद्योगिक गतिविधियों के लिए होता रहा है. एक इंच जमीन भी राज्य सरकार को नहीं दी जाएगी. इस निर्णय से न केवल भेल की कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी संकट उत्पन्न होगा.'' दीपक गुप्ता ने कहा कि, ''राज्य सरकार द्वारा भेल की जमीन वापस लेने का निर्णय तत्काल रद्द किया जाए.'' गुप्ता ने कहा कि ''विकास की नींव जनता के हित और औद्योगिक स्थिरता पर होनी चाहिए. इसकी पहचान देश प्रदेश के अलावा पूरे विश्व में है.''

दीपक गुप्ता ने बताया कि, "इससे पहले ही भेल की जमीन अमराई में झुग्गी विस्थापन के लिए 200 एकड़ हाउसिंग बोर्ड को आवंटित की जा चुकी है. फिर भेल ने आईएसबीटी के लिए 150 करीब जमीन दी, जिस पर कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा है.'' दरअसल, मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनाने की योजना पर राज्य सरकार काम कर रही है. यह सिटी गुजरात की गिफ्ट सिटी, दिल्ली की एयरोसिटी और मुंबई की बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की तर्ज पर विकसित की जाएगी. इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में राजेगार पैदा करने के साथ एक ही स्थान पर रहवासियों और निवेशकों को सभी सुविधाएं देना है. इस हाईटेक सिटी में फाइनेंस, आईटी सेक्टर, डेटा सेंटर, मार्केट, हाउसिंग प्रोजेक्ट, हास्पिटिलिटी व अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

बता दें कि, देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी भोपाल स्थित भेल की खाली जमीन पर विकसित की जाएगी. इसमें जो भी राजस्व मिलेगा उसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. बीएचईएल की भोपाल में साल 1964 में स्थापना हुई थी. इससे पहले केंद्र सरकार ने 1959 से 1962 के बीच भेल को करीब 6 हजार एकड़ जमीन दी थी. लेकिन बीते 61 सालों में भेल केवल 3 हजार एकड़ जमीन का ही इस्तेमाल कर पाया. ऐसे में सरकार बची हुई जमीन को वापस लेने की तैयारी में है. इस संबंध में केंद्र व राज्य सरकार के बीच सहमति भी बन गई है.


भोपाल: राज्य सरकार भोपाल में खाली पड़ी भेल की करीब 2200 एकड़ जमीन वापस लेने की तैयारी कर रही है. जिससे यहां गुजरात की गिफ्ट और मुंबई की बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स की तरह हाइटेक सिटी बनाई जा सके. हालांकि इससे पहले ही जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया. भेल कर्मचारी यह जमीन राज्य सरकार को देने का विरोध कर रहे हैं. भेल के कर्मचारी संगठनों ने सोमवार को फाउंड्री गेट के सामने प्रदर्शन कर इसका विरोध भी जताया.

सोमवार को सीटू यूनियन (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) के पदाधिकारियों और भेल कर्मचारियों ने फाउंड्री गेट पर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. भेल की 2200 एकड़ जमीन को राज्य सरकार द्वारा वापस लिए जाने के निर्णय के खिलाफ भेल कर्मचारियों, श्रमिक संगठनों, सेवानिवृत्त कर्मियों और भोपाल के नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया है. इस प्रदर्शन में कर्मचारी नेता दीपक गुप्ता के साथ अध्यक्ष लोकेंद्र शेखावत, शाहिद अली, नरेश जादौन, विनय सिंह, कुलदीप मौर्य, ध्रुव सिंह मरावी, सहित सैकड़ों भेल कर्मचारी उपस्थित हुए.

श्रमिक नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि, ''ये 2200 एकड़ जमीन जिसका बाजार मूल्य 30 हजार करोड़ से अधिक है और जो 60 वषों से भेल की संपत्ति रही है. इसका उपयोग कर्मचारियों की सुविधाओं, कल्याणकारी योजनाओं व औद्योगिक गतिविधियों के लिए होता रहा है. एक इंच जमीन भी राज्य सरकार को नहीं दी जाएगी. इस निर्णय से न केवल भेल की कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी संकट उत्पन्न होगा.'' दीपक गुप्ता ने कहा कि, ''राज्य सरकार द्वारा भेल की जमीन वापस लेने का निर्णय तत्काल रद्द किया जाए.'' गुप्ता ने कहा कि ''विकास की नींव जनता के हित और औद्योगिक स्थिरता पर होनी चाहिए. इसकी पहचान देश प्रदेश के अलावा पूरे विश्व में है.''

दीपक गुप्ता ने बताया कि, "इससे पहले ही भेल की जमीन अमराई में झुग्गी विस्थापन के लिए 200 एकड़ हाउसिंग बोर्ड को आवंटित की जा चुकी है. फिर भेल ने आईएसबीटी के लिए 150 करीब जमीन दी, जिस पर कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा है.'' दरअसल, मध्य प्रदेश में देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनाने की योजना पर राज्य सरकार काम कर रही है. यह सिटी गुजरात की गिफ्ट सिटी, दिल्ली की एयरोसिटी और मुंबई की बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की तर्ज पर विकसित की जाएगी. इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में राजेगार पैदा करने के साथ एक ही स्थान पर रहवासियों और निवेशकों को सभी सुविधाएं देना है. इस हाईटेक सिटी में फाइनेंस, आईटी सेक्टर, डेटा सेंटर, मार्केट, हाउसिंग प्रोजेक्ट, हास्पिटिलिटी व अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

बता दें कि, देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी भोपाल स्थित भेल की खाली जमीन पर विकसित की जाएगी. इसमें जो भी राजस्व मिलेगा उसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. बीएचईएल की भोपाल में साल 1964 में स्थापना हुई थी. इससे पहले केंद्र सरकार ने 1959 से 1962 के बीच भेल को करीब 6 हजार एकड़ जमीन दी थी. लेकिन बीते 61 सालों में भेल केवल 3 हजार एकड़ जमीन का ही इस्तेमाल कर पाया. ऐसे में सरकार बची हुई जमीन को वापस लेने की तैयारी में है. इस संबंध में केंद्र व राज्य सरकार के बीच सहमति भी बन गई है.


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