जबलपुर: मध्य प्रदेश के
मुख्यमंत्री मोहन यादव मंगलवार को जबलपुर पहुंचे. जहां रानी दुर्गावती के
462वें बलिदान दिवस के मौके पर बलिदानस्थल नरई नाला पहुंचकर उन्होंने रानी
दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की. उनके नाम पर जबलपुर में एक चिड़ियाघर
और रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की. यह चिड़ियाघर रेस्क्यू सेंटर जबलपुर
के ठाकुर ताल के पास बनाया जाएगा.
रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस
गोंडवाना राज्य की रानी दुर्गावती को आज के
ही दिन 462 साल पहले वीरगति प्राप्त हुई थी. रानी दुर्गावती के गोंडवाना
साम्राज्य पर मुगलों की टेढ़ी नजर थी. मुगलों ने रानी के सामने प्रस्ताव
रखा था कि वे मुगल साम्राज्य के अधीन हो जाएं और गुलामी स्वीकार कर लें,
लेकिन रानी को यह मंजूर नहीं था.
रानी दुर्गावती से 51 बार हारे थे मुगल
मुगल लगातार गोंडवाना राज्य पर हमला करते
रहे. 51 बार हारने के बाद भी मुगलों ने अपनी कोशिश जारी राखी. रानी
दुर्गावती के कुछ खास लोगों ने रानी के साथ गद्दार की. इस युद्ध में रानी
चारों तरफ से घिर गईं, लेकिन रानी ने यह तय कर लिया था कि वह मर जाना पसंद
करेंगी, लेकिन मुगलों की गुलामी पसंद नहीं करेगी. रानी ने अपने ही खंजर से
अपनी जान ले ली थी.
चंद्रेशखर आजाद ने रानी दुर्गावती से ली होगी प्रेरणा
जबलपुर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि
उन्होंने यह कहानी चंद्रशेखर आजाद की सुनी थी. जिन्होंने यह कहा था कि
आजाद जिए हैं और आजाद ही मरेंगे. जब अंग्रेजों ने पकड़ने के लिए पहुंचे, तो
उन्होंने खुद को गोली मार कर वीरगति प्राप्त की थी. मोहन यादव का कहना है
कि मुझे ऐसा लगता है कि उनकी प्रेरणा वीरांगना रानी दुर्गावती ही रही
होंगी."
वीरांगनाओं के बार जरूर पढ़ें बच्चे
मोहन यादव का कहना है कि
"रानी दुर्गावती के पास लंबा चौड़ा राज्य था. उनके गांव में लोग संपन्नता
से रहते थे उनके पास 23000 गांव का साम्राज्य था. वे युद्ध कौशल में माहिर
थीं. ढाई सौ साल पहले रानी अवंतीबाई और 200 साल पहले रानी लक्ष्मीबाई यह
सभी महिलाएं यह साबित करती हैं कि हमारे समाज में महिलाएं सशक्त थीं.
इसीलिए हमने यह तय किया है कि इन वीरांगनाओं के इतिहास को हम स्कूली बच्चों
तक को पढ़ा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी उन्हें याद रख सके.
सीएम ने कहा कि हम आदिवासियों का सम्मान
करना जानते हैं. भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर
विराजमान हैं. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है. आदिवासियों को
आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए हमने उनके अनाज को मिलेट्स की संज्ञा दी
है और हम उन्हें₹ 4000 प्रति क्विंटल का बोनस भी दे रहे हैं.
अगले साल 21 किलोमीटर रेस का आयोजन
रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जबलपुर
में हर साल एक रेस का आयोजन किया जाता है. मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि
अगले साल से रानी दुर्गावती के नाम पर होने वाली दौड को 21 किलोमीटर किया
जाए. इसे अंतरराष्ट्रीय मैराथन के स्टैंडर्ड पर लाया जाए. इसमें जो पैसा
खर्च होगा, उसके लिए मुख्यमंत्री की ओर से ₹500000 की राशि दी जाएगी.
सीएम का कांग्रेस पर निशाना
इस दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम
ने कहा कि कांग्रेस में चुनाव चल रहे हैं, चुनाव के नाम पर दंगल हो रहा
है. कई जगह विवाद की स्थितियां बन रही है. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस
अपना घर संभाल ले, हम प्रदेश संभाल रहे हैं. कांग्रेस के समय में मध्य
प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक नहीं थी. आज जब सब कुछ ठीक चल रहा है तो
कांग्रेस को इस पर आपत्ति है.
जबलपुर: मध्य प्रदेश के
मुख्यमंत्री मोहन यादव मंगलवार को जबलपुर पहुंचे. जहां रानी दुर्गावती के
462वें बलिदान दिवस के मौके पर बलिदानस्थल नरई नाला पहुंचकर उन्होंने रानी
दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की. उनके नाम पर जबलपुर में एक चिड़ियाघर
और रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की. यह चिड़ियाघर रेस्क्यू सेंटर जबलपुर
के ठाकुर ताल के पास बनाया जाएगा.
रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस
गोंडवाना राज्य की रानी दुर्गावती को आज के
ही दिन 462 साल पहले वीरगति प्राप्त हुई थी. रानी दुर्गावती के गोंडवाना
साम्राज्य पर मुगलों की टेढ़ी नजर थी. मुगलों ने रानी के सामने प्रस्ताव
रखा था कि वे मुगल साम्राज्य के अधीन हो जाएं और गुलामी स्वीकार कर लें,
लेकिन रानी को यह मंजूर नहीं था.
रानी दुर्गावती से 51 बार हारे थे मुगल
मुगल लगातार गोंडवाना राज्य पर हमला करते
रहे. 51 बार हारने के बाद भी मुगलों ने अपनी कोशिश जारी राखी. रानी
दुर्गावती के कुछ खास लोगों ने रानी के साथ गद्दार की. इस युद्ध में रानी
चारों तरफ से घिर गईं, लेकिन रानी ने यह तय कर लिया था कि वह मर जाना पसंद
करेंगी, लेकिन मुगलों की गुलामी पसंद नहीं करेगी. रानी ने अपने ही खंजर से
अपनी जान ले ली थी.
चंद्रेशखर आजाद ने रानी दुर्गावती से ली होगी प्रेरणा
जबलपुर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि
उन्होंने यह कहानी चंद्रशेखर आजाद की सुनी थी. जिन्होंने यह कहा था कि
आजाद जिए हैं और आजाद ही मरेंगे. जब अंग्रेजों ने पकड़ने के लिए पहुंचे, तो
उन्होंने खुद को गोली मार कर वीरगति प्राप्त की थी. मोहन यादव का कहना है
कि मुझे ऐसा लगता है कि उनकी प्रेरणा वीरांगना रानी दुर्गावती ही रही
होंगी."
वीरांगनाओं के बार जरूर पढ़ें बच्चे
मोहन यादव का कहना है कि
"रानी दुर्गावती के पास लंबा चौड़ा राज्य था. उनके गांव में लोग संपन्नता
से रहते थे उनके पास 23000 गांव का साम्राज्य था. वे युद्ध कौशल में माहिर
थीं. ढाई सौ साल पहले रानी अवंतीबाई और 200 साल पहले रानी लक्ष्मीबाई यह
सभी महिलाएं यह साबित करती हैं कि हमारे समाज में महिलाएं सशक्त थीं.
इसीलिए हमने यह तय किया है कि इन वीरांगनाओं के इतिहास को हम स्कूली बच्चों
तक को पढ़ा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी उन्हें याद रख सके.
सीएम ने कहा कि हम आदिवासियों का सम्मान
करना जानते हैं. भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च पद पर
विराजमान हैं. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है. आदिवासियों को
आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए हमने उनके अनाज को मिलेट्स की संज्ञा दी
है और हम उन्हें₹ 4000 प्रति क्विंटल का बोनस भी दे रहे हैं.
अगले साल 21 किलोमीटर रेस का आयोजन
रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जबलपुर
में हर साल एक रेस का आयोजन किया जाता है. मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि
अगले साल से रानी दुर्गावती के नाम पर होने वाली दौड को 21 किलोमीटर किया
जाए. इसे अंतरराष्ट्रीय मैराथन के स्टैंडर्ड पर लाया जाए. इसमें जो पैसा
खर्च होगा, उसके लिए मुख्यमंत्री की ओर से ₹500000 की राशि दी जाएगी.
सीएम का कांग्रेस पर निशाना
इस दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम
ने कहा कि कांग्रेस में चुनाव चल रहे हैं, चुनाव के नाम पर दंगल हो रहा
है. कई जगह विवाद की स्थितियां बन रही है. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस
अपना घर संभाल ले, हम प्रदेश संभाल रहे हैं. कांग्रेस के समय में मध्य
प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक नहीं थी. आज जब सब कुछ ठीक चल रहा है तो
कांग्रेस को इस पर आपत्ति है.



Journalist खबरीलाल














