Breaking News

News (खबरीलाल न्यूज़) : टीआरएफ पाकिस्तानी आतंकी संगठन का मुखौटा है, ये हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध किया : एस जयशंकरफीट तक…छत्तीसगढ़ के अर्धनारीश्वर शिवलिंग का ऐसे बढ़ रहा आकार:

post

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
सिद्ध किया है कि ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) पाकिस्तान स्थित आतंकी
संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का मुखौटा है। उन्होंने बताया कि संयुक्त
राष्ट्र ने भारत के इस पक्ष को मान्यता दी है, और अमेरिका ने टीआरएफ को
आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
विदेश मंत्री डॉ. एस.
जयशंकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में टीआरएफ द्वारा 26 निर्दोष
पर्यटकों की हत्या के बाद शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की आतंकवाद
के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया,
“भारत किसी भी मध्यस्थता या परमाणु धमकी को स्वीकार नहीं करेगा। हमने
दुनिया को बता दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”
विदेश
मंत्री ने सिंधु जल संधि को लेकर कहा कि यह समझौता तुष्टीकरण के उद्देश्य
से किया गया था, न कि शांति के लिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने धारा
370 हटाकर और अब सिंधु जल संधि को स्थगित करके यह साबित किया है कि
ऐतिहासिक गलतियों को सुधारा जा सकता है। डॉ. जयशंकर ने कहा, “जब तक
पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, यह संधि स्थगित रहेगी।”
डॉ.
एस. जयशंकर ने बताया कि मोदी सरकार ने आतंकवाद को वैश्विक एजेंडा बनाया
है। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनाया गया
है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2006-08 के
आतंकी हमलों, जैसे मुंबई ट्रेन बम विस्फोट, हैदराबाद और जयपुर हमलों के बाद
भारत की प्रतिक्रिया कमजोर थी। उन्होंने उदाहरण दिया कि 2006 के मुंबई
हमले के तीन महीने बाद ही भारत हवाना में पाकिस्तान के साथ संवाद में था,
जो आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की कमी को दर्शाता है।
विदेश मंत्री
ने सिंधु जल संधि को एक अनूठा समझौता बताया, जिसमें भारत ने अपनी प्रमुख
नदियों को बिना अधिकार के पाकिस्तान में बहने दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा
समझौता दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। अब इसे स्थगित करना
ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने की दिशा में एक कदम है।” उन्होंने आगे कहा
”कुछ लोग इतिहास से असहज हैं। वे लोग चाहते हैं कि ऐतिहासिक चीजों को भुला
दिया जाए। शायद यह उन्हें शोभा नहीं देता; वे केवल कुछ चीजों को याद रखना
पसंद करते हैं।”


नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
सिद्ध किया है कि ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) पाकिस्तान स्थित आतंकी
संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का मुखौटा है। उन्होंने बताया कि संयुक्त
राष्ट्र ने भारत के इस पक्ष को मान्यता दी है, और अमेरिका ने टीआरएफ को
आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
विदेश मंत्री डॉ. एस.
जयशंकर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में टीआरएफ द्वारा 26 निर्दोष
पर्यटकों की हत्या के बाद शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की आतंकवाद
के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया,
“भारत किसी भी मध्यस्थता या परमाणु धमकी को स्वीकार नहीं करेगा। हमने
दुनिया को बता दिया है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”
विदेश
मंत्री ने सिंधु जल संधि को लेकर कहा कि यह समझौता तुष्टीकरण के उद्देश्य
से किया गया था, न कि शांति के लिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने धारा
370 हटाकर और अब सिंधु जल संधि को स्थगित करके यह साबित किया है कि
ऐतिहासिक गलतियों को सुधारा जा सकता है। डॉ. जयशंकर ने कहा, “जब तक
पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, यह संधि स्थगित रहेगी।”
डॉ.
एस. जयशंकर ने बताया कि मोदी सरकार ने आतंकवाद को वैश्विक एजेंडा बनाया
है। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनाया गया
है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2006-08 के
आतंकी हमलों, जैसे मुंबई ट्रेन बम विस्फोट, हैदराबाद और जयपुर हमलों के बाद
भारत की प्रतिक्रिया कमजोर थी। उन्होंने उदाहरण दिया कि 2006 के मुंबई
हमले के तीन महीने बाद ही भारत हवाना में पाकिस्तान के साथ संवाद में था,
जो आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की कमी को दर्शाता है।
विदेश मंत्री
ने सिंधु जल संधि को एक अनूठा समझौता बताया, जिसमें भारत ने अपनी प्रमुख
नदियों को बिना अधिकार के पाकिस्तान में बहने दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा
समझौता दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। अब इसे स्थगित करना
ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने की दिशा में एक कदम है।” उन्होंने आगे कहा
”कुछ लोग इतिहास से असहज हैं। वे लोग चाहते हैं कि ऐतिहासिक चीजों को भुला
दिया जाए। शायद यह उन्हें शोभा नहीं देता; वे केवल कुछ चीजों को याद रखना
पसंद करते हैं।”


...
...
...
...
...
...
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner