Breaking News

News (खबरीलाल न्यूज़) : नवजात की मौत के बाद भी , चार दिन तक वेंटिलेटर पर रखकर परिजनों से रुपये एंठते रहे, अस्पताल प्रबंधन :

post

रांची .  अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का मामला रांची के अरगोड़ा स्थित लिटिल हार्ट हास्पिटल का है। जहां डाकरों ने एक नवजात की मौत के बाद भी उसे चार दिन तक वेंटिलेटर पर रखकर परिजनों से रुपये एंठते रहे। परिजनों की शिकायत पर पुलीस ने अस्पताल प्रबंधन और डाॅक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर नवजात का शव देख हैरान रह गए। डाक्टरों ने स्वजनों को बताया कि नवजात के शरीर को देखकर ही लग रहा है कि इसकी मृत्यु काफी पहले ही हो चुकी ह

पोस्टमार्टम के बाद शव को स्वजनों के हवाले कर दिया गया।  इसे लेकर बच्चे के स्वजन अरगोड़ा थाना पहुंचे और पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग की।पुलिस ने बताया कि रिपोर्ट आने में 10-15 दिन का समय लगेगा, उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस प्रशासन ने स्वजनों को आश्वस्त किया कि जो भी दोषी होंगे उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।नवजात का पोस्टमार्टम करने के बाद प्रबंधन ने पिता के हाथ में ही बच्चे को थमा दिया। हाथ में शव लेने के बाद पिता दहाड़ मार रोने लगे।

अरगोड़ा स्थित लिटिल हार्ट न्यूबर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर में नवजात शिशु की मौत के मामले में डा आशुतोष और डा सत्यजीत के खिलाफ अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी हुई है। मुकेश सिंह के बयान पर केस हुआ है।नमुकेश ने लिटिल हार्ट न्यूबर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर के प्रबंधन और डा आशुतोष और डा सत्यजीत पर नवजात शिशु की मौत को छिपाकर इलाज जारी रखने और परिजनों से  पैसे वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है।

मुकेश सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि उनका बेटा 4 जुलाई को रांची सदर अस्पताल में पैदा हुआ था। 8 जुलाई को उसे इंफेक्शन के कारण बेहतर इलाज के लिए लिटिल हार्ट सेंटर रेफर कर दिया गया। उसी दिन बच्चे को भर्ती कर लिया गया और इलाज शुरू हुआ। अस्पताल ने 15 दिनों तक बच्चे से मिलने नहीं दिया और ना ही भर्ती नवजात के बारे में जानकारी दी।इस दरम्यया  हर दिन डाक्टरों द्वारा दवा और खून की मांग की जाती रही। जब अभिभावकों ने बच्चे से मिलने की जिद की, तो अस्पताल के मालिक द्वारा उन्हें धमकाया गया। 30 जुलाई को जब अभिभावकों ने बच्चे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की, तो डाक्टरों ने कहा कि बच्चे को रेफर किया जा रहा है और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा।

परिछनों ने पहले बच्चे को देखने की बात कही तब उन्हें बच्चा सौंपा गया जो मृत था। स्वजनों अनुसार देखने से लग रहा था कि बच्चे की मृत्यु चार से पांच दिन पहले ही हो चुकी थी। लेकिन उसके बावजूद डाक्टर इलाज के नाम पर पैसे लेते रहे। जांच का जिम्मा पुलिस अधिकारी गौतम कुमार राय को सौंपा गया है। मुकेश सिंह ने मांग की है कि इस अमानवीय कृत्य में शामिल सभी दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और अस्पताल की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।


रांची .  अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का मामला रांची के अरगोड़ा स्थित लिटिल हार्ट हास्पिटल का है। जहां डाकरों ने एक नवजात की मौत के बाद भी उसे चार दिन तक वेंटिलेटर पर रखकर परिजनों से रुपये एंठते रहे। परिजनों की शिकायत पर पुलीस ने अस्पताल प्रबंधन और डाॅक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।

पोस्टमार्टम करने वाला डाक्टर नवजात का शव देख हैरान रह गए। डाक्टरों ने स्वजनों को बताया कि नवजात के शरीर को देखकर ही लग रहा है कि इसकी मृत्यु काफी पहले ही हो चुकी ह

पोस्टमार्टम के बाद शव को स्वजनों के हवाले कर दिया गया।  इसे लेकर बच्चे के स्वजन अरगोड़ा थाना पहुंचे और पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग की।पुलिस ने बताया कि रिपोर्ट आने में 10-15 दिन का समय लगेगा, उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस प्रशासन ने स्वजनों को आश्वस्त किया कि जो भी दोषी होंगे उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।नवजात का पोस्टमार्टम करने के बाद प्रबंधन ने पिता के हाथ में ही बच्चे को थमा दिया। हाथ में शव लेने के बाद पिता दहाड़ मार रोने लगे।

अरगोड़ा स्थित लिटिल हार्ट न्यूबर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर में नवजात शिशु की मौत के मामले में डा आशुतोष और डा सत्यजीत के खिलाफ अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी हुई है। मुकेश सिंह के बयान पर केस हुआ है।नमुकेश ने लिटिल हार्ट न्यूबर्न एंड चाइल्ड हार्ट सेंटर के प्रबंधन और डा आशुतोष और डा सत्यजीत पर नवजात शिशु की मौत को छिपाकर इलाज जारी रखने और परिजनों से  पैसे वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है।

मुकेश सिंह ने अपनी शिकायत में बताया कि उनका बेटा 4 जुलाई को रांची सदर अस्पताल में पैदा हुआ था। 8 जुलाई को उसे इंफेक्शन के कारण बेहतर इलाज के लिए लिटिल हार्ट सेंटर रेफर कर दिया गया। उसी दिन बच्चे को भर्ती कर लिया गया और इलाज शुरू हुआ। अस्पताल ने 15 दिनों तक बच्चे से मिलने नहीं दिया और ना ही भर्ती नवजात के बारे में जानकारी दी।इस दरम्यया  हर दिन डाक्टरों द्वारा दवा और खून की मांग की जाती रही। जब अभिभावकों ने बच्चे से मिलने की जिद की, तो अस्पताल के मालिक द्वारा उन्हें धमकाया गया। 30 जुलाई को जब अभिभावकों ने बच्चे की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की, तो डाक्टरों ने कहा कि बच्चे को रेफर किया जा रहा है और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा।

परिछनों ने पहले बच्चे को देखने की बात कही तब उन्हें बच्चा सौंपा गया जो मृत था। स्वजनों अनुसार देखने से लग रहा था कि बच्चे की मृत्यु चार से पांच दिन पहले ही हो चुकी थी। लेकिन उसके बावजूद डाक्टर इलाज के नाम पर पैसे लेते रहे। जांच का जिम्मा पुलिस अधिकारी गौतम कुमार राय को सौंपा गया है। मुकेश सिंह ने मांग की है कि इस अमानवीय कृत्य में शामिल सभी दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और अस्पताल की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।


...
...
...
...
...
...
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner