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News (खबरीलाल न्यूज़) : हरतालिका तीज व्रत में सुहागिन महिलाएं करें इन मंत्रों का जाप, मानसिक शांति और दांपत्य जीवन होगा सुखी:

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26 अगस्त को सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा हरतालिका तीज व्रत रखा जाने वाला है। यह व्रत सभी प्रकार के मंगलकारी व्रतों में से एक होता है इसमें मुख्य रूप से भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। कहते है पति की लंबी उम्र और अच्छे पति की चाह रखने वाली कन्याओं के लिए यह व्रत लाभकारी होता है। इस खास व्रत के दिन महिलाएं शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाती है और संध्या काल के समय पूजा-अर्चना करती है। व्रत रखने वाली व्रती को 24 घंटे का निर्जला व्रत रखना होता है तब ही पूजा सफल मानी जाती है।

इस व्रत को सफल बनाने के लिए पूजा के नियमों को करने के साथ ही मंत्रों का जाप करना भी जरूरी होता है। यहां पर मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक लाभ के साथ ही वैभव, धन, और शक्ति की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रत को करने से वैवाहिक जीवन आपका सुखमय होता है।

हरतालिका व्रत में इन मंत्रों का करें जाप

हरतालिका व्रत की पूजा में आप प्रभावशाली मंत्रों का जाप कर सकते है इसे करने से व्रत का सकारात्मक परिणाम मिलता है।

यह है शिव के प्रिय मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।

शिव जी का मूल मंत्र

ऊँ नम: शिवाय।।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप

ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

भगवान शिव का यह प्रभावशाली मंत्र

ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

माता पार्वती का मंत्र

ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ उमाये नमः

मनचाहे वर प्राप्ति के लिए मंत्र

हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा माम कुरु कल्याणी कांतकांता सुदुर्लाभाम्।।

पति की लंबी आयु के लिए मंत्र

नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।

सौभाग्य प्राप्ति मंत्र का जाप करें

देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
पुत्र-पौत्रादि समृद्धि देहि में परमेश्वरी।।

देवी मां का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

सिंदूर अर्पित करते समय इस मंत्र का करें जाप

सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।


26 अगस्त को सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा हरतालिका तीज व्रत रखा जाने वाला है। यह व्रत सभी प्रकार के मंगलकारी व्रतों में से एक होता है इसमें मुख्य रूप से भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। कहते है पति की लंबी उम्र और अच्छे पति की चाह रखने वाली कन्याओं के लिए यह व्रत लाभकारी होता है। इस खास व्रत के दिन महिलाएं शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाती है और संध्या काल के समय पूजा-अर्चना करती है। व्रत रखने वाली व्रती को 24 घंटे का निर्जला व्रत रखना होता है तब ही पूजा सफल मानी जाती है।

इस व्रत को सफल बनाने के लिए पूजा के नियमों को करने के साथ ही मंत्रों का जाप करना भी जरूरी होता है। यहां पर मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक लाभ के साथ ही वैभव, धन, और शक्ति की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रत को करने से वैवाहिक जीवन आपका सुखमय होता है।

हरतालिका व्रत में इन मंत्रों का करें जाप

हरतालिका व्रत की पूजा में आप प्रभावशाली मंत्रों का जाप कर सकते है इसे करने से व्रत का सकारात्मक परिणाम मिलता है।

यह है शिव के प्रिय मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।

शिव जी का मूल मंत्र

ऊँ नम: शिवाय।।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप

ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

भगवान शिव का यह प्रभावशाली मंत्र

ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

माता पार्वती का मंत्र

ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ उमाये नमः

मनचाहे वर प्राप्ति के लिए मंत्र

हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा माम कुरु कल्याणी कांतकांता सुदुर्लाभाम्।।

पति की लंबी आयु के लिए मंत्र

नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।

सौभाग्य प्राप्ति मंत्र का जाप करें

देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
पुत्र-पौत्रादि समृद्धि देहि में परमेश्वरी।।

देवी मां का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

सिंदूर अर्पित करते समय इस मंत्र का करें जाप

सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।


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