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News (खबरीलाल न्यूज़) : अष्टमी व नवमी को कन्या पूजन का क्या है शुभ मुहूर्त? जानें पूजन की सरल विधि:

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हिंदू धर्म में नवरात्रि में कन्या पूजन का खास महत्व है। यूं तो नवरात्रि के किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है, लेकिन अष्टमी व नवमी तिथि पर कन्या पूजन अत्यंत शुभ व लाभकारी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि नवरात्रि में कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओं का पूजन किया जाता है, यह मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। कहते हैं कि हर उम्र की कन्या का अलग महत्व होता है और उनका पूजन करने से अलग-अलग पुण्य फल मिलते हैं, जैसे 2 साल की कन्या का पूजन करने से दरिद्रता दूर होती है और 9 साल की कन्या की पूजा से शत्रुओं पर जीत हासिल होती है। जानें इस बार नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथि में कन्या पूजन के क्या हैं शुभ मुहूर्त।

अष्टमी को कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: इस बार नवरात्रि की अष्टमी 30 सितंबर, मंगलवार को है। अष्टमी पर कन्या पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 37 मिनट से सुबह 05 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से दोपहर 02 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

नवमी को कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: इस बार शारदीय नवरात्रि की महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवमी को कन्या पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 37 मिनट से सुबह 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 09 मिनट से दोपहर 02 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 08 बजकर 06 मिनट से पूरे दिन रहेगा।

कन्या पूजन विधि: कन्या पूजन के लिए कन्याओं को सबसे पहले आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है और उसके बाद उनका विधि-विधान से स्वागत किया जाता है। कन्याओं को आसन पर बिठाकर उनके पैरों को धोएं और माथे पर रोली या कुमकुम लगाएं और चुनरी पहनाएं। इसके बाद मां भगवती का ध्यान लगाते हुए कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा व उपहार दें। अंत में कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और सम्मानपूर्वक विदा करें।


हिंदू धर्म में नवरात्रि में कन्या पूजन का खास महत्व है। यूं तो नवरात्रि के किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है, लेकिन अष्टमी व नवमी तिथि पर कन्या पूजन अत्यंत शुभ व लाभकारी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि नवरात्रि में कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओं का पूजन किया जाता है, यह मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं। कहते हैं कि हर उम्र की कन्या का अलग महत्व होता है और उनका पूजन करने से अलग-अलग पुण्य फल मिलते हैं, जैसे 2 साल की कन्या का पूजन करने से दरिद्रता दूर होती है और 9 साल की कन्या की पूजा से शत्रुओं पर जीत हासिल होती है। जानें इस बार नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथि में कन्या पूजन के क्या हैं शुभ मुहूर्त।

अष्टमी को कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: इस बार नवरात्रि की अष्टमी 30 सितंबर, मंगलवार को है। अष्टमी पर कन्या पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 37 मिनट से सुबह 05 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से दोपहर 02 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

नवमी को कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त: इस बार शारदीय नवरात्रि की महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवमी को कन्या पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 37 मिनट से सुबह 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 09 मिनट से दोपहर 02 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 08 बजकर 06 मिनट से पूरे दिन रहेगा।

कन्या पूजन विधि: कन्या पूजन के लिए कन्याओं को सबसे पहले आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है और उसके बाद उनका विधि-विधान से स्वागत किया जाता है। कन्याओं को आसन पर बिठाकर उनके पैरों को धोएं और माथे पर रोली या कुमकुम लगाएं और चुनरी पहनाएं। इसके बाद मां भगवती का ध्यान लगाते हुए कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा व उपहार दें। अंत में कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और सम्मानपूर्वक विदा करें।


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