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News (खबरीलाल न्यूज़) : चीन के कारण पाकिस्तान को गले लगा रहे ट्रंप, क्या है शहबाज शरीफ से मीटिंग का गणित:

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के साथ नजदीकियां बढ़ाते नजर आ रहे हैं। जानकार इसके तार चीन और ईरान से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान तक पहुंच अमेरिका को उसके विरोधियों के करीब खुद को स्थापित करने में मदद करेगी। खास बात है कि भारत और पाकिस्तान ऐसे समय में करीब आ रहे हैं, जब दोनों ही देशों के संबंध भारत से तल्ख बने हुए हैं। हालांकि, ट्रंप लगातार भारत से अच्छे रिश्तों की बात कह रहे हैं, लेकिन टैरिफ के मुद्दे पर तकरार जारी है।





समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिकागो यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर पॉल पोस्ट ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते अच्छे करने की सबसे बड़ी वजह सैन्य पहुंच हासिल करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मदद से अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी चीन और ईरान जैसे विरोधियों के पास दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा, 'वह एक सहयोगी हैं, जो अमेरिका को पहुंच प्रदान करते हैं। अगर हमारी मौजूदगी वहां होगी, तो हम चीन के पास पहुंच जाएंगे और हमारे एसेट्स को चीन और ईरान के पास लगा सकेंगे।'





पोस्ट अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती करीबी को ट्रंप के सैन्य नजरिए से जोड़ते हैं। हाल ही में एक आदेश जारी हुआ था, जिसमें रक्षा विभाग को युद्ध विभाग कहे जाने की बात शामिल थी। पोस्ट ने कहा कि यही सैन्य नजरिया पाकिस्तान को एक कूटनीतिक के बजाए एक सैन्य समर्थक के रूप में दिखाता है, जिसकी मदद से अमेरिका को अपनी क्षमता दिखाने के लिए विरोधियों के पास जाने की जगह मिलती है।





उन्होंने कहा, '...अगर आप बगराम के बारे में देखेंगे तो पाएंगे कि ट्रंप प्रशासन इसकी मांग इसलिए कर रहा है, क्योंकि वह अफगानिस्तान में एयरबेस दोबारा चाहते हैं। क्योंकि वह चीन के सामने अपनी सैन्य मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। मैं पूरी तरह से समझ सकता हूं कि क्यों ट्रंप प्रशासन इस नजरिए से पाकिस्तान के महत्व को देख रहा है।'





उन्होंने इस दौरान 22 जून को अमेरिका की तरफ से किए गए ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का जिक्र किया, जिसके तहत ईरान के परमाणु स्थानों पर हमले किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन इसलिए हो सका, क्योंकि उन क्षेत्रों में अमेरिकी बेस और अमेरिकी जवानों की मौजूदगी थी।





ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से व्हाइट हाउस में बातचीत की। यह मुलाकात अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में आ रही गर्माहट का ताजा संकेत मानी जा रही है। शरीफ इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ट्रंप से मिलने वाले आठ अरब या मुस्लिम देशों के शीर्ष नेताओं में शामिल रहे। इन बैठकों में गाजा में इजराइल-हमास युद्ध को समाप्त करने की रणनीति पर चर्चा की गई।




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के साथ नजदीकियां बढ़ाते नजर आ रहे हैं। जानकार इसके तार चीन और ईरान से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान तक पहुंच अमेरिका को उसके विरोधियों के करीब खुद को स्थापित करने में मदद करेगी। खास बात है कि भारत और पाकिस्तान ऐसे समय में करीब आ रहे हैं, जब दोनों ही देशों के संबंध भारत से तल्ख बने हुए हैं। हालांकि, ट्रंप लगातार भारत से अच्छे रिश्तों की बात कह रहे हैं, लेकिन टैरिफ के मुद्दे पर तकरार जारी है।





समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिकागो यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर पॉल पोस्ट ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते अच्छे करने की सबसे बड़ी वजह सैन्य पहुंच हासिल करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मदद से अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी चीन और ईरान जैसे विरोधियों के पास दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा, 'वह एक सहयोगी हैं, जो अमेरिका को पहुंच प्रदान करते हैं। अगर हमारी मौजूदगी वहां होगी, तो हम चीन के पास पहुंच जाएंगे और हमारे एसेट्स को चीन और ईरान के पास लगा सकेंगे।'





पोस्ट अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती करीबी को ट्रंप के सैन्य नजरिए से जोड़ते हैं। हाल ही में एक आदेश जारी हुआ था, जिसमें रक्षा विभाग को युद्ध विभाग कहे जाने की बात शामिल थी। पोस्ट ने कहा कि यही सैन्य नजरिया पाकिस्तान को एक कूटनीतिक के बजाए एक सैन्य समर्थक के रूप में दिखाता है, जिसकी मदद से अमेरिका को अपनी क्षमता दिखाने के लिए विरोधियों के पास जाने की जगह मिलती है।





उन्होंने कहा, '...अगर आप बगराम के बारे में देखेंगे तो पाएंगे कि ट्रंप प्रशासन इसकी मांग इसलिए कर रहा है, क्योंकि वह अफगानिस्तान में एयरबेस दोबारा चाहते हैं। क्योंकि वह चीन के सामने अपनी सैन्य मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। मैं पूरी तरह से समझ सकता हूं कि क्यों ट्रंप प्रशासन इस नजरिए से पाकिस्तान के महत्व को देख रहा है।'





उन्होंने इस दौरान 22 जून को अमेरिका की तरफ से किए गए ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का जिक्र किया, जिसके तहत ईरान के परमाणु स्थानों पर हमले किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन इसलिए हो सका, क्योंकि उन क्षेत्रों में अमेरिकी बेस और अमेरिकी जवानों की मौजूदगी थी।





ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से व्हाइट हाउस में बातचीत की। यह मुलाकात अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में आ रही गर्माहट का ताजा संकेत मानी जा रही है। शरीफ इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ट्रंप से मिलने वाले आठ अरब या मुस्लिम देशों के शीर्ष नेताओं में शामिल रहे। इन बैठकों में गाजा में इजराइल-हमास युद्ध को समाप्त करने की रणनीति पर चर्चा की गई।



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