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खेल post authorJournalist खबरीलाल Friday ,November 07,2025

Raipur (खबरीलाल न्यूज़) : एकदम चुप, ये मुझे करने दो...जब रवि शास्त्री ने युवा सचिन तेंदुलकर को प्यार से लगाई थी डांट:

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नई दिल्ली. महान सचिन तेंदुलकर जब 1991-92 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए थे तब सिडनी टेस्ट के दौरान रवि शास्त्री ने उन्हें डांट लगाई थी। बल्लेबाजी के दौरान उन्होंने युवा सचिन से कहा था कि तुम चुप रहो। जो काम तुम करने के लिए कह रहे हो वो मुझे करने दो। पूर्व ऑलराउंडर और टीम इंडिया के पूर्व कोच शास्त्री ने इसका खुलासा किया है। संयोग से उस डांट के बाद मैच में सचिन तेंदुलकर ने नाबाद शतक ठोका था।





क्रिकेट ऐक्ट के कार्यक्रम 'समर ऑफ क्रिकेट लंच' में रवि शास्त्री ने उस वाकये को याद किया। उस टेस्ट में उन्होंने शानदार दोहरा शतक जड़ा था और युवा सचिन तेंदुलकर के साथ शानदार साझेदारी की थी। मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी लगातार स्लेजिंग कर रहे थे जिसके लिए वे कुख्यात रहे हैं।





शास्त्री ने याद किया, ‘मुझे सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेलना याद है। यह सचिन का पहला दौरा था। मैंने शतक पूरा ही किया था और सचिन बस बैटिंग के लिए आए ही थे। उन्हें वॉ ब्रदर- स्टीव और मार्क लगातार स्लेज कर रहे थे। ओए छोटू तू तो ऐसा है, ऐ छोटू तू तो वैसा है...।’





माहौल काफी गरम था। यहां तक के ऑस्ट्रेलिया के 12वें खिलाड़ी माइक विटनी भी स्लेजिंग में शामिल हो गए। शास्त्री ने याद किया, 'माइक विटनी फील्डिंग के लिए आया था। उसने गेंद ली और मुझे बोला- अपने क्रीज में जाओ, नहीं तो मैं तेरा सिर फोड़ दूंगा। तब मैं मुड़ा और चिल्लाकर कहा- ओए माइक, अगर तुम इतना ही अच्छा थ्रो कर सकते थे या गेंद फेंक सकते थे तो तुम ऑस्ट्रेलिया के 12वें खिलाड़ी नहीं होते।'





स्लेजिंग वाले गरम माहौल के बीच सचिन तेंदुलकर रवि शास्त्री के पास पहुंचे और बोले कि रुकिये, मेरा भी शतक हो जाने दीजिए। उसके बाद मैं भी इन्हें बढ़िया से जवाब देता हूं। इसी पर शास्त्री ने उन्हें डांट लगाई।





शास्त्री ने बताया, ‘सचिन मेरे पास आए और कहा- मेरा शतक हो जा रहा है, तब तक इंतजार कीजिए। मैं भी उन्हें इसी तरह जवाब दूंगा। इस पर मैंने उससे कहा- चुप, तुम चुप रहो। तुम्हारा अलग ही क्लास है। तुम्हारा बल्ला जवाब देगा। मुझे उन्हें जवाब देने दो।’





उसके बाद सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलियाई स्लेजिंग का जवाब ही नहीं दिया। उस मैच क्या, सचिन तेंदुलकर ने पूरे करियर में कभी किसी की स्लेजिंग का जवाब नहीं दिया और न ही किसी को स्लेज किया। वह क्रिकेट के असली ब्रैंड एम्बेसडर के तौर पर उभरे। ट्रू जेंटलमैन।





उस दौरे के सिडनी टेस्ट की बात करें तो वो मैच ड्रॉ हुआ था। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में डेविड बून के 129 रनों की बदौलत 313 रन बनाए थे। जवाब में भारत ने रवि शास्त्री के दोहरे शतक और सचिन तेंदुलकर के शतक की बदौलत पहली पारी में 483 रन बनाए। शास्त्री 206 रन बनाकर शेन वॉर्न का शिकार बने। दूसरी तरफ छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए सचिन तेंदुलकर अंत तक आउट नहीं हुए और 148 रन की शानदार पारी खेली थी।





ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट के आखिरी दिन अपनी दूसरी पारी में 8 विकेट पर 173 रन बनाए और इस तरह सिडनी टेस्ट ड्रॉ हो गया था।




नई दिल्ली. महान सचिन तेंदुलकर जब 1991-92 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए थे तब सिडनी टेस्ट के दौरान रवि शास्त्री ने उन्हें डांट लगाई थी। बल्लेबाजी के दौरान उन्होंने युवा सचिन से कहा था कि तुम चुप रहो। जो काम तुम करने के लिए कह रहे हो वो मुझे करने दो। पूर्व ऑलराउंडर और टीम इंडिया के पूर्व कोच शास्त्री ने इसका खुलासा किया है। संयोग से उस डांट के बाद मैच में सचिन तेंदुलकर ने नाबाद शतक ठोका था।





क्रिकेट ऐक्ट के कार्यक्रम 'समर ऑफ क्रिकेट लंच' में रवि शास्त्री ने उस वाकये को याद किया। उस टेस्ट में उन्होंने शानदार दोहरा शतक जड़ा था और युवा सचिन तेंदुलकर के साथ शानदार साझेदारी की थी। मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी लगातार स्लेजिंग कर रहे थे जिसके लिए वे कुख्यात रहे हैं।





शास्त्री ने याद किया, ‘मुझे सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेलना याद है। यह सचिन का पहला दौरा था। मैंने शतक पूरा ही किया था और सचिन बस बैटिंग के लिए आए ही थे। उन्हें वॉ ब्रदर- स्टीव और मार्क लगातार स्लेज कर रहे थे। ओए छोटू तू तो ऐसा है, ऐ छोटू तू तो वैसा है...।’





माहौल काफी गरम था। यहां तक के ऑस्ट्रेलिया के 12वें खिलाड़ी माइक विटनी भी स्लेजिंग में शामिल हो गए। शास्त्री ने याद किया, 'माइक विटनी फील्डिंग के लिए आया था। उसने गेंद ली और मुझे बोला- अपने क्रीज में जाओ, नहीं तो मैं तेरा सिर फोड़ दूंगा। तब मैं मुड़ा और चिल्लाकर कहा- ओए माइक, अगर तुम इतना ही अच्छा थ्रो कर सकते थे या गेंद फेंक सकते थे तो तुम ऑस्ट्रेलिया के 12वें खिलाड़ी नहीं होते।'





स्लेजिंग वाले गरम माहौल के बीच सचिन तेंदुलकर रवि शास्त्री के पास पहुंचे और बोले कि रुकिये, मेरा भी शतक हो जाने दीजिए। उसके बाद मैं भी इन्हें बढ़िया से जवाब देता हूं। इसी पर शास्त्री ने उन्हें डांट लगाई।





शास्त्री ने बताया, ‘सचिन मेरे पास आए और कहा- मेरा शतक हो जा रहा है, तब तक इंतजार कीजिए। मैं भी उन्हें इसी तरह जवाब दूंगा। इस पर मैंने उससे कहा- चुप, तुम चुप रहो। तुम्हारा अलग ही क्लास है। तुम्हारा बल्ला जवाब देगा। मुझे उन्हें जवाब देने दो।’





उसके बाद सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलियाई स्लेजिंग का जवाब ही नहीं दिया। उस मैच क्या, सचिन तेंदुलकर ने पूरे करियर में कभी किसी की स्लेजिंग का जवाब नहीं दिया और न ही किसी को स्लेज किया। वह क्रिकेट के असली ब्रैंड एम्बेसडर के तौर पर उभरे। ट्रू जेंटलमैन।





उस दौरे के सिडनी टेस्ट की बात करें तो वो मैच ड्रॉ हुआ था। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में डेविड बून के 129 रनों की बदौलत 313 रन बनाए थे। जवाब में भारत ने रवि शास्त्री के दोहरे शतक और सचिन तेंदुलकर के शतक की बदौलत पहली पारी में 483 रन बनाए। शास्त्री 206 रन बनाकर शेन वॉर्न का शिकार बने। दूसरी तरफ छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए सचिन तेंदुलकर अंत तक आउट नहीं हुए और 148 रन की शानदार पारी खेली थी।





ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट के आखिरी दिन अपनी दूसरी पारी में 8 विकेट पर 173 रन बनाए और इस तरह सिडनी टेस्ट ड्रॉ हो गया था।



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