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भिलाई इस्पात कर्मियों का 39 माह का एरियर अधर में, NJCS बैठक बेनतीजा:

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भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के कर्मचारियों सहित सेल की सभी यूनिटों में काम करने वाले कर्मचारियों के 39 माह के एरियर को लेकर उम्मीदें मंगलवार को पूरी तरह टूट गईं। दिल्ली में आयोजित नेशनल ज्वॉइंट कमिटी फॉर स्टील (एनजेसीएस) सब-कमेटी की बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि 1 जनवरी 2017 से 30 मार्च 2020 तक का एरियर कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। यदि एरियर दिया जाता तो हर कर्मचारी को लगभग 2 लाख से 6 लाख रुपये मिलते।


बैठक सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चली, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। यूनियनों ने कहा कि नया वेतन समझौता लागू होने के बाद प्रबंधन ने स्वयं आश्वस्त किया था कि सभी कर्मचारियों को बढ़े वेतन का एरियर मिलेगा और इसके लिए मिनिट्स भी तैयार किए गए थे। हालांकि, प्रबंधन ने अचानक एरियर देने से इनकार कर दिया और मिनिट्स की प्रति गोपनीय बताते हुए यूनियनों को चीफ लेबर कमिश्नर से प्राप्त करने की सलाह दी।


बैठक सीएलसी की पहल पर संभव हुई थी। प्रबंधन की ओर से बीएसपी के ईडी (एचआर) पवन कुमार, ईडी (फाइनेंस) प्रवीण निगम और कार्पोरेट ऑफिस से ईडी (एचआर) राजीव पांडे मौजूद थे। वहीं, यूनियनों की ओर से इंटक से हरदीप सिंह, एटक से विद्यासागर गिरी, एचएमएस से राजेंद्र सिंह, सीटू से विश्वरूप बेनर्जी और बीएमएस से डीके पांडे शामिल हुए।


बैठक के बावजूद कर्मचारियों को 39 माह का एरियर नहीं मिलने का निर्णय अपरिवर्तनीय रहा। यूनियनों का कहना है कि प्रबंधन की यह रवैये कर्मचारियों के बीच निराशा और असंतोष पैदा कर रही है। कर्मचारियों की उम्मीदें अब भविष्य की किसी नई पहल या कानूनी कदम पर टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बैठक से सकारात्मक परिणाम आएंगे, लेकिन बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही।


इस निर्णय के बाद कर्मचारियों के वित्तीय हितों और मनोबल पर असर पड़ने की संभावना है, खासकर उन कर्मचारियों पर जिन्होंने लंबे समय से एरियर की प्रतीक्षा की थी।


भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के कर्मचारियों सहित सेल की सभी यूनिटों में काम करने वाले कर्मचारियों के 39 माह के एरियर को लेकर उम्मीदें मंगलवार को पूरी तरह टूट गईं। दिल्ली में आयोजित नेशनल ज्वॉइंट कमिटी फॉर स्टील (एनजेसीएस) सब-कमेटी की बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि 1 जनवरी 2017 से 30 मार्च 2020 तक का एरियर कर्मचारियों को नहीं मिलेगा। यदि एरियर दिया जाता तो हर कर्मचारी को लगभग 2 लाख से 6 लाख रुपये मिलते।


बैठक सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चली, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। यूनियनों ने कहा कि नया वेतन समझौता लागू होने के बाद प्रबंधन ने स्वयं आश्वस्त किया था कि सभी कर्मचारियों को बढ़े वेतन का एरियर मिलेगा और इसके लिए मिनिट्स भी तैयार किए गए थे। हालांकि, प्रबंधन ने अचानक एरियर देने से इनकार कर दिया और मिनिट्स की प्रति गोपनीय बताते हुए यूनियनों को चीफ लेबर कमिश्नर से प्राप्त करने की सलाह दी।


बैठक सीएलसी की पहल पर संभव हुई थी। प्रबंधन की ओर से बीएसपी के ईडी (एचआर) पवन कुमार, ईडी (फाइनेंस) प्रवीण निगम और कार्पोरेट ऑफिस से ईडी (एचआर) राजीव पांडे मौजूद थे। वहीं, यूनियनों की ओर से इंटक से हरदीप सिंह, एटक से विद्यासागर गिरी, एचएमएस से राजेंद्र सिंह, सीटू से विश्वरूप बेनर्जी और बीएमएस से डीके पांडे शामिल हुए।


बैठक के बावजूद कर्मचारियों को 39 माह का एरियर नहीं मिलने का निर्णय अपरिवर्तनीय रहा। यूनियनों का कहना है कि प्रबंधन की यह रवैये कर्मचारियों के बीच निराशा और असंतोष पैदा कर रही है। कर्मचारियों की उम्मीदें अब भविष्य की किसी नई पहल या कानूनी कदम पर टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बैठक से सकारात्मक परिणाम आएंगे, लेकिन बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही।


इस निर्णय के बाद कर्मचारियों के वित्तीय हितों और मनोबल पर असर पड़ने की संभावना है, खासकर उन कर्मचारियों पर जिन्होंने लंबे समय से एरियर की प्रतीक्षा की थी।


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