सुकमा। नए साल की शुरुआत होते ही नक्सल मोर्चे पर ऐसा धमाका हुआ है, जिसने लाल आतंक की नींव हिला दी है। शीर्ष नक्सली हिड़मा का सबसे भरोसेमंद और खतरनाक साथी, पीएलजीए कमांडर बारसे देवा ने आखिरकार हथियार डाल दिए हैं। शनिवार 3 दिसंबर 2026 को उसने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
सरेंडर के बाद की पहली तस्वीर सामने आते ही नक्सली खेमे में हड़कंप मच गया है .
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को ही बारसे देवा के सरेंडर की खबर अंदरखाने फैल गई थी। बताया गया था कि वह हैदराबाद में तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करेगा। शनिवार सुबह जैसे ही उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं।
अब तेलंगाना पुलिस जल्द ही आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा करेगी।
बारसे देवा कोई साधारण नक्सली नहीं था।
उस पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था
वह माओवादी संगठन का सबसे प्रभावशाली सैन्य चेहरा माना जाता था
हिड़मा के एनकाउंटर के बाद उसे PLGA का कमांडर बनाया गया था
इसके बाद से वह संगठन की सैन्य रणनीति, हमले और हथियारों की सप्लाई का पूरा जिम्मा संभाल रहा था।
नक्सली संगठन की बटालियन नंबर-1 को सबसे खतरनाक टीम माना जाता है और
इस बटालियन का कमांडर बारसे देवा ही था।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा—इन तीन जिलों में
उसकी बटालियन का सबसे ज्यादा आतंक रहा
सुरक्षाबलों पर कई बड़े हमलों की रणनीति उसी ने बनाई
बारसे देवा के सरेंडर के बाद माओवादी संगठन के भीतर
डर, अविश्वास और भगदड़ का माहौल बन गया है।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि
यह आत्मसमर्पण आने वाले समय में
और बड़े नक्सलियों के टूटने की शुरुआत साबित हो सकता है।
सुकमा। नए साल की शुरुआत होते ही नक्सल मोर्चे पर ऐसा धमाका हुआ है, जिसने लाल आतंक की नींव हिला दी है। शीर्ष नक्सली हिड़मा का सबसे भरोसेमंद और खतरनाक साथी, पीएलजीए कमांडर बारसे देवा ने आखिरकार हथियार डाल दिए हैं। शनिवार 3 दिसंबर 2026 को उसने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
सरेंडर के बाद की पहली तस्वीर सामने आते ही नक्सली खेमे में हड़कंप मच गया है .
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को ही बारसे देवा के सरेंडर की खबर अंदरखाने फैल गई थी। बताया गया था कि वह हैदराबाद में तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करेगा। शनिवार सुबह जैसे ही उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं।
अब तेलंगाना पुलिस जल्द ही आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा करेगी।
बारसे देवा कोई साधारण नक्सली नहीं था।
उस पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था
वह माओवादी संगठन का सबसे प्रभावशाली सैन्य चेहरा माना जाता था
हिड़मा के एनकाउंटर के बाद उसे PLGA का कमांडर बनाया गया था
इसके बाद से वह संगठन की सैन्य रणनीति, हमले और हथियारों की सप्लाई का पूरा जिम्मा संभाल रहा था।
नक्सली संगठन की बटालियन नंबर-1 को सबसे खतरनाक टीम माना जाता है और
इस बटालियन का कमांडर बारसे देवा ही था।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा—इन तीन जिलों में
उसकी बटालियन का सबसे ज्यादा आतंक रहा
सुरक्षाबलों पर कई बड़े हमलों की रणनीति उसी ने बनाई
बारसे देवा के सरेंडर के बाद माओवादी संगठन के भीतर
डर, अविश्वास और भगदड़ का माहौल बन गया है।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि
यह आत्मसमर्पण आने वाले समय में
और बड़े नक्सलियों के टूटने की शुरुआत साबित हो सकता है।



Journalist खबरीलाल














