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Chhattisgarh (खबरीलाल न्यूज़) :: वन अग्नि सुरक्षा के लिए अर्जुनी परिक्षेत्र में कार्यशाला का आयोजन:

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बलौदाबाजार। अर्जुनी वन परिक्षेत्र अंतर्गत वनाग्नि से सुरक्षा हेतु एक व्यापक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आगामी अग्नि सीज़न 2026 के दौरान वनों को आग से सुरक्षित रखने हेतु ग्रामीणों, वन प्रबंधन समितियों एवं वन अमले की सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने ग्रामीणों एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि वनाग्नि की किसी भी घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग तक पहुंचाएं तथा आग की रोकथाम में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सामूहिक प्रयास किए जाएं तो “शून्य वनाग्नि घटना” का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर वनों में आग लगने के प्रमुख कारणों एवं उनसे होने वाले पर्यावरणीय, वन्यजीव एवं मानवीय दुष्प्रभावों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

 जनजागरूकता को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गिरौदपुरी विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा वनाग्नि विषय पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने कविता पाठ एवं चित्रकला के माध्यम से वनाग्नि से होने वाले नुकसान को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को जागरूक किया। छात्रों की इस सहभागिता को सभी ने सराहा। कार्यशाला में उपस्थित वन प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा भी वनाग्नि के कारणों, अनुभवों एवं स्थानीय स्तर पर अपनाए गए उपायों को साझा किया गया। पिछले पाँच वर्षों के आँकड़ों के आधार पर अर्जुनी, थरगाँव, महराजी एवं खोसड़ा वन प्रबंधन समितियों को उनके उत्कृष्ट कार्य, सतर्कता एवं सक्रिय सहभागिता के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। इन समितियों के प्रयासों को अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया।


बलौदाबाजार। अर्जुनी वन परिक्षेत्र अंतर्गत वनाग्नि से सुरक्षा हेतु एक व्यापक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आगामी अग्नि सीज़न 2026 के दौरान वनों को आग से सुरक्षित रखने हेतु ग्रामीणों, वन प्रबंधन समितियों एवं वन अमले की सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने ग्रामीणों एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि वनाग्नि की किसी भी घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग तक पहुंचाएं तथा आग की रोकथाम में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सामूहिक प्रयास किए जाएं तो “शून्य वनाग्नि घटना” का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर वनों में आग लगने के प्रमुख कारणों एवं उनसे होने वाले पर्यावरणीय, वन्यजीव एवं मानवीय दुष्प्रभावों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

 जनजागरूकता को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गिरौदपुरी विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा वनाग्नि विषय पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने कविता पाठ एवं चित्रकला के माध्यम से वनाग्नि से होने वाले नुकसान को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को जागरूक किया। छात्रों की इस सहभागिता को सभी ने सराहा। कार्यशाला में उपस्थित वन प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा भी वनाग्नि के कारणों, अनुभवों एवं स्थानीय स्तर पर अपनाए गए उपायों को साझा किया गया। पिछले पाँच वर्षों के आँकड़ों के आधार पर अर्जुनी, थरगाँव, महराजी एवं खोसड़ा वन प्रबंधन समितियों को उनके उत्कृष्ट कार्य, सतर्कता एवं सक्रिय सहभागिता के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। इन समितियों के प्रयासों को अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया।


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