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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: सांसद बृजमोहन अग्रवाल का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रति पश्चिम बंगाल के व्यवहार पर कड़ा बयान:

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए असम्मानजनक व्यवहार पर कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अस्वीकार्य करार दिया। सांसद ने कहा कि यह केवल राष्ट्रपति के प्रति अपमान नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की गरिमा, मातृशक्ति के सम्मान और जनजातीय समाज की अस्मिता को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है और इस पद के प्रति किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता या अमर्यादित व्यवहार देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि लोकतंत्र में किसी भी नागरिक, विशेषकर संवैधानिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों के प्रति सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है।

सांसद ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में हुई इस घटना से न केवल राष्ट्रपति का सम्मान ठेस पहुँचा है, बल्कि इससे देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना भी होती है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इस अमर्यादित और असंवैधानिक व्यवहार के लिए तत्काल सार्वजनिक क्षमा याचना की जाए। बृजमोहन अग्रवाल ने अपने बयान में कहा कि देश के नागरिकों को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रपति का पद केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह पूरी जनता और गणतंत्र की गरिमा का प्रतीक है। किसी भी प्रकार के अपमानजनक व्यवहार को सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

सांसद ने यह भी कहा कि महिलाओं और मातृशक्ति के प्रति सम्मान की संस्कृति को मजबूत करना आवश्यक है। देश के राष्ट्रपति एक महिला हैं और उनके प्रति इस तरह का असम्मान केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि महिलाओं के प्रति समाज में बने सम्मान और समानता के मूल्यों पर भी चोट करता है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में संविधान द्वारा स्थापित नियम और मर्यादाओं का पालन करना हर राज्य और संस्थान की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले को लेकर तत्काल कदम उठाएगी और राष्ट्रपति के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करेगी। सांसद ने अंत में सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की कि वे संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सम्मान तभी सशक्त रहेगा जब इसके सर्वोच्च पदों और संस्थाओं का सम्मान हर नागरिक सुनिश्चित करेगा।


रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए असम्मानजनक व्यवहार पर कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अस्वीकार्य करार दिया। सांसद ने कहा कि यह केवल राष्ट्रपति के प्रति अपमान नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की गरिमा, मातृशक्ति के सम्मान और जनजातीय समाज की अस्मिता को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है और इस पद के प्रति किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता या अमर्यादित व्यवहार देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि लोकतंत्र में किसी भी नागरिक, विशेषकर संवैधानिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों के प्रति सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है।

सांसद ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में हुई इस घटना से न केवल राष्ट्रपति का सम्मान ठेस पहुँचा है, बल्कि इससे देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना भी होती है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इस अमर्यादित और असंवैधानिक व्यवहार के लिए तत्काल सार्वजनिक क्षमा याचना की जाए। बृजमोहन अग्रवाल ने अपने बयान में कहा कि देश के नागरिकों को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रपति का पद केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह पूरी जनता और गणतंत्र की गरिमा का प्रतीक है। किसी भी प्रकार के अपमानजनक व्यवहार को सामान्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

सांसद ने यह भी कहा कि महिलाओं और मातृशक्ति के प्रति सम्मान की संस्कृति को मजबूत करना आवश्यक है। देश के राष्ट्रपति एक महिला हैं और उनके प्रति इस तरह का असम्मान केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि महिलाओं के प्रति समाज में बने सम्मान और समानता के मूल्यों पर भी चोट करता है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में संविधान द्वारा स्थापित नियम और मर्यादाओं का पालन करना हर राज्य और संस्थान की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले को लेकर तत्काल कदम उठाएगी और राष्ट्रपति के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करेगी। सांसद ने अंत में सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की कि वे संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सम्मान तभी सशक्त रहेगा जब इसके सर्वोच्च पदों और संस्थाओं का सम्मान हर नागरिक सुनिश्चित करेगा।


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