नईदिल्ली । वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को ऐतिहासिक उथल-पुथल देखने को मिली, जब कच्चे तेल की कीमत लगभग चार साल बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने से बाजार में भारी दबाव बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें अभी और बढ़ सकती हैं। सोमवार सुबह तेल वायदा (फ्यूचर्स) में करीब 11त्न की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 8 डॉलर बढक़र 99 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 9 डॉलर उछलकर 101 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह एक दिन में कीमतों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है।
इससे पहले कच्चा तेल आखिरी बार मार्च 2022 में 100 डॉलर के पार गया था, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। विशेषज्ञों के अनुसार तेल कीमतों में उछाल के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और दूसरा मध्य-पूर्व में तेल उत्पादन में गिरावट। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के लगभग 20त्न तेल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले की धमकी दी है, जिसके बाद कई शिपिंग कंपनियों ने वहां से तेल उठाना और भेजना रोक दिया है।
इतिहासकारों के अनुसार सप्लाई में यह बाधा 1956-57 के स्वेज संकट से भी लगभग दोगुनी बड़ी मानी जा रही है।युद्ध के कारण सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादकों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है। ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बाजार में वह सुरक्षा कुशन खत्म हो गया है, जो आम तौर पर कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। रैपिडन एनर्जी ग्रुप के प्रमुख बॉब मैकनैली के अनुसार, बाजार में अब कोई मजबूत बैकअप नहीं बचा है, जिससे अचानक सप्लाई बढ़ाई जा सके। तेल की कीमतों में तेजी का असर ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें एक हफ्ते में करीब 50 सेंट बढक़र 3.48 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दुनिया में तेल की कुल उपलब्धता पर्याप्त है, क्योंकि युद्ध से पहले बाजार में सप्लाई ज्यादा थी और कीमतें लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही थीं।
हालांकि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही जल्दी सामान्य नहीं हुई, तो कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। केप्लर के विश्लेषक होमायून फलाकशाही का कहना है, अगर मार्च के अंत तक जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। तेल बाजार पर दबाव कम करने के लिए प्रतिशत 7 देशों के वित्त मंत्री आपात बैठक कर रहे हैं। इसमें वैश्विक तेल भंडार (ऑयल रिजर्व) जारी करने जैसे कदमों पर चर्चा हो सकती है।इसके साथ ही अमेरिका तेल टैंकरों को बीमा और नौसैनिक सुरक्षा देने की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित तरीके से दोबारा नहीं खोला जाता, तब तक तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है।
नईदिल्ली । वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को ऐतिहासिक उथल-पुथल देखने को मिली, जब कच्चे तेल की कीमत लगभग चार साल बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने से बाजार में भारी दबाव बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें अभी और बढ़ सकती हैं। सोमवार सुबह तेल वायदा (फ्यूचर्स) में करीब 11त्न की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 8 डॉलर बढक़र 99 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 9 डॉलर उछलकर 101 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह एक दिन में कीमतों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है।
इससे पहले कच्चा तेल आखिरी बार मार्च 2022 में 100 डॉलर के पार गया था, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। विशेषज्ञों के अनुसार तेल कीमतों में उछाल के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और दूसरा मध्य-पूर्व में तेल उत्पादन में गिरावट। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के लगभग 20त्न तेल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले की धमकी दी है, जिसके बाद कई शिपिंग कंपनियों ने वहां से तेल उठाना और भेजना रोक दिया है।
इतिहासकारों के अनुसार सप्लाई में यह बाधा 1956-57 के स्वेज संकट से भी लगभग दोगुनी बड़ी मानी जा रही है।युद्ध के कारण सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादकों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है। ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बाजार में वह सुरक्षा कुशन खत्म हो गया है, जो आम तौर पर कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। रैपिडन एनर्जी ग्रुप के प्रमुख बॉब मैकनैली के अनुसार, बाजार में अब कोई मजबूत बैकअप नहीं बचा है, जिससे अचानक सप्लाई बढ़ाई जा सके। तेल की कीमतों में तेजी का असर ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें एक हफ्ते में करीब 50 सेंट बढक़र 3.48 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दुनिया में तेल की कुल उपलब्धता पर्याप्त है, क्योंकि युद्ध से पहले बाजार में सप्लाई ज्यादा थी और कीमतें लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही थीं।
हालांकि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही जल्दी सामान्य नहीं हुई, तो कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। केप्लर के विश्लेषक होमायून फलाकशाही का कहना है, अगर मार्च के अंत तक जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। तेल बाजार पर दबाव कम करने के लिए प्रतिशत 7 देशों के वित्त मंत्री आपात बैठक कर रहे हैं। इसमें वैश्विक तेल भंडार (ऑयल रिजर्व) जारी करने जैसे कदमों पर चर्चा हो सकती है।इसके साथ ही अमेरिका तेल टैंकरों को बीमा और नौसैनिक सुरक्षा देने की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित तरीके से दोबारा नहीं खोला जाता, तब तक तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है।



Journalist खबरीलाल













