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Madhya Pradesh (खबरीलाल न्यूज़) :: को-ऑपरेटिव बैंक में 41.94 लाख के गबन का मामला, तीन के खिलाफ FIR :

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मध्य प्रदेश : भोपाल के ईटखेड़ी इलाके में स्थित एक को-ऑपरेटिव बैंक में कथित तौर पर 41.94 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि बैंक के रिकवरी एजेंट और एक सुरक्षा गार्ड ने मिलकर किसानों से लोन वसूलने के लिए ली गई रकम हड़प ली।

बैंक अधिकारी रामचरण सिलावट की शिकायत के अनुसार, यह बैंक प्राइमरी क्रेडिट सोसाइटियों के ज़रिए किसानों को बीज, खाद और अन्य खेती के इनपुट के लिए लोन देता है। शिकायत में बताया गया कि मनोज कुमार और नरेश को बकाया रकम वसूलने के लिए रिकवरी एजेंट नियुक्त किया गया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बैंक के नियमों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। बैंक के प्रोटोकॉल के तहत सार्वजनिक छुट्टियों पर कैश जमा करने पर रोक होती है, लेकिन आरोपियों ने इसे अनदेखा करते हुए कई गांवों का दौरा किया और किसानों से लगभग 42 लाख रुपये जमा किए।

आगामी ऑडिट के दौरान यह रकम बैंक के खजाने में नहीं मिली। पूछताछ के दौरान मनोज और नरेश ने दावा किया कि यह पैसा गांव की को-ऑपरेटिव सोसायटी के ऑफिस में रखा गया था, लेकिन रातों-रात चोरी हो गया। हालांकि, पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दोनों के अकाउंट और लेन-देन में गड़बड़ियां पाई गईं।

पुलिस के अनुसार, मनोज और नरेश ने मुकेश नामक सिक्योरिटी गार्ड के साथ मिलकर इस गबन को छिपाने और चोरी को अंजाम देने की साज़िश रची। पुलिस ने यह भी कहा कि शुरुआती जांच से यह मामला पहले से योजनाबद्ध और संगठित दिखाई देता है।

ईटखेड़ी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज आशीष सप्रे ने बताया, “शुरुआती जांच से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह गबन और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट का मामला है। आरोपियों को गिरफ्तार करने और गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए पैसे वापस लाने के लिए टीमें सक्रिय हैं।”

पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में अब तक की जांच से पता चलता है कि गबन में शामिल आरोपियों ने बैंक के नियमों और भरोसे को पूरी तरह से तोड़ा। बैंक और पुलिस अधिकारी मिलकर इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जल्दी और प्रभावी जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में किसानों और बैंक दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने ग्रामीण जनता से भी अपील की है कि यदि किसी ने लोन वसूलने के दौरान गड़बड़ी देखी या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी है तो तुरंत पुलिस या बैंक अधिकारियों को सूचित करें।

इस तरह का मामला राज्य में को-ऑपरेटिव बैंकिंग सिस्टम की साख और भरोसे पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस और बैंक अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई से उम्मीद है कि हड़पे गए पैसों की बरामदगी और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला गंभीर रूप से जांच के दायरे में है और आगामी दिनों में इससे जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।


मध्य प्रदेश : भोपाल के ईटखेड़ी इलाके में स्थित एक को-ऑपरेटिव बैंक में कथित तौर पर 41.94 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि बैंक के रिकवरी एजेंट और एक सुरक्षा गार्ड ने मिलकर किसानों से लोन वसूलने के लिए ली गई रकम हड़प ली।

बैंक अधिकारी रामचरण सिलावट की शिकायत के अनुसार, यह बैंक प्राइमरी क्रेडिट सोसाइटियों के ज़रिए किसानों को बीज, खाद और अन्य खेती के इनपुट के लिए लोन देता है। शिकायत में बताया गया कि मनोज कुमार और नरेश को बकाया रकम वसूलने के लिए रिकवरी एजेंट नियुक्त किया गया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बैंक के नियमों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। बैंक के प्रोटोकॉल के तहत सार्वजनिक छुट्टियों पर कैश जमा करने पर रोक होती है, लेकिन आरोपियों ने इसे अनदेखा करते हुए कई गांवों का दौरा किया और किसानों से लगभग 42 लाख रुपये जमा किए।

आगामी ऑडिट के दौरान यह रकम बैंक के खजाने में नहीं मिली। पूछताछ के दौरान मनोज और नरेश ने दावा किया कि यह पैसा गांव की को-ऑपरेटिव सोसायटी के ऑफिस में रखा गया था, लेकिन रातों-रात चोरी हो गया। हालांकि, पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दोनों के अकाउंट और लेन-देन में गड़बड़ियां पाई गईं।

पुलिस के अनुसार, मनोज और नरेश ने मुकेश नामक सिक्योरिटी गार्ड के साथ मिलकर इस गबन को छिपाने और चोरी को अंजाम देने की साज़िश रची। पुलिस ने यह भी कहा कि शुरुआती जांच से यह मामला पहले से योजनाबद्ध और संगठित दिखाई देता है।

ईटखेड़ी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज आशीष सप्रे ने बताया, “शुरुआती जांच से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह गबन और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट का मामला है। आरोपियों को गिरफ्तार करने और गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए पैसे वापस लाने के लिए टीमें सक्रिय हैं।”

पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में अब तक की जांच से पता चलता है कि गबन में शामिल आरोपियों ने बैंक के नियमों और भरोसे को पूरी तरह से तोड़ा। बैंक और पुलिस अधिकारी मिलकर इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जल्दी और प्रभावी जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में किसानों और बैंक दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने ग्रामीण जनता से भी अपील की है कि यदि किसी ने लोन वसूलने के दौरान गड़बड़ी देखी या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी है तो तुरंत पुलिस या बैंक अधिकारियों को सूचित करें।

इस तरह का मामला राज्य में को-ऑपरेटिव बैंकिंग सिस्टम की साख और भरोसे पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस और बैंक अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई से उम्मीद है कि हड़पे गए पैसों की बरामदगी और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला गंभीर रूप से जांच के दायरे में है और आगामी दिनों में इससे जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।


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