रायपुर। रायपुर की अदालत ने अमन कुमार सिंह को नकली शादी और दुष्कर्म के मामले में सख्त सजा सुनाई है। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और नकली विवाह रचकर उसे अपने साथ रखा। पीड़िता के गर्भवती होने पर आरोपी ने जबरन गर्भपात कराया और बाद में जातिगत टिप्पणी करते हुए पीड़िता को छोड़ दिया। अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा सुनाई, जबकि SC/ST एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा भी दी गई। इसके अतिरिक्त, जबरन गर्भपात कराने के आरोप में उसे 5 साल की अतिरिक्त सजा भी दी गई।
फैसला सुनाते हुए जज पंकज कुमार सिन्हा ने कहा कि आरोपी की कृत्य न केवल कानून के खिलाफ हैं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी गंभीर हैं। उन्होंने अदालत की ओर से साफ कहा कि ऐसे मामलों में कठोर सजा का प्रावधान है ताकि समाज में अन्य अपराधियों के लिए संदेश जाए कि महिलाओं के साथ अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने पहले उसे शादी का झांसा देकर विश्वास में लिया। इसके बाद वह उसे अपने साथ रखता रहा और जब उसने गर्भधारण किया, तो उसने जबरन गर्भपात कराया। पीड़िता ने बताया कि आरोपी के जातिगत टिप्पणियों ने मानसिक और भावनात्मक चोट को और गहरा किया।
अदालत ने आरोपी के अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे SC/ST एक्ट के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने के साथ दंडित किया। अदालत का यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से यह मामला नकली शादी और जबरन गर्भपात जैसे अपराधों के प्रति समाज को जागरूक करने का संदेश भी देता है। पीड़िता ने फैसले को सही और न्यायसंगत बताया और कहा कि अदालत ने उनके साथ न्याय किया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अपराधों में कठोर सजा की घोषणा समाज में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक उदाहरण पेश करती है। इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे मामलों में आरोपी को सख्त सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी और महिलाओं के खिलाफ अपराध कम होंगे।
रायपुर। रायपुर की अदालत ने अमन कुमार सिंह को नकली शादी और दुष्कर्म के मामले में सख्त सजा सुनाई है। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और नकली विवाह रचकर उसे अपने साथ रखा। पीड़िता के गर्भवती होने पर आरोपी ने जबरन गर्भपात कराया और बाद में जातिगत टिप्पणी करते हुए पीड़िता को छोड़ दिया। अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा सुनाई, जबकि SC/ST एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा भी दी गई। इसके अतिरिक्त, जबरन गर्भपात कराने के आरोप में उसे 5 साल की अतिरिक्त सजा भी दी गई।
फैसला सुनाते हुए जज पंकज कुमार सिन्हा ने कहा कि आरोपी की कृत्य न केवल कानून के खिलाफ हैं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी गंभीर हैं। उन्होंने अदालत की ओर से साफ कहा कि ऐसे मामलों में कठोर सजा का प्रावधान है ताकि समाज में अन्य अपराधियों के लिए संदेश जाए कि महिलाओं के साथ अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने पहले उसे शादी का झांसा देकर विश्वास में लिया। इसके बाद वह उसे अपने साथ रखता रहा और जब उसने गर्भधारण किया, तो उसने जबरन गर्भपात कराया। पीड़िता ने बताया कि आरोपी के जातिगत टिप्पणियों ने मानसिक और भावनात्मक चोट को और गहरा किया।
अदालत ने आरोपी के अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे SC/ST एक्ट के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने के साथ दंडित किया। अदालत का यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से यह मामला नकली शादी और जबरन गर्भपात जैसे अपराधों के प्रति समाज को जागरूक करने का संदेश भी देता है। पीड़िता ने फैसले को सही और न्यायसंगत बताया और कहा कि अदालत ने उनके साथ न्याय किया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अपराधों में कठोर सजा की घोषणा समाज में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक उदाहरण पेश करती है। इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे मामलों में आरोपी को सख्त सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी और महिलाओं के खिलाफ अपराध कम होंगे।



Journalist खबरीलाल














