महिला आरक्षण संसोधन बिल को लेकर पीएम मोदी ने गुरुवार को लोकसभा को संबोधित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की जरूरत है. अब समय आ गया है कि हम राजनीति से ऊपर उठकर देश और महिलाओं की प्रगति के लिए इस बिल का समर्थन करें और उनको बराबरी का हक दें. बगैर ये किए हम एक प्रगतिशील समाज की कल्पना नहीं कर सकते हैं.
'हमें राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन करना चाहिए' - पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के प्रयासों और उनके परिणामों को बीते तीस साल में देख सकते हैं. उनको लगेगा कि इस बिल के साथ जाने में ही उनका भी फायदा है. मुझे लगता है इसे राजनीतिक रूप देने की जरूरत नहीं है. जब मैं संगठन के कार्यकर्ता के रूप में काम करता था उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है तो बड़े आराम से दे देते हैं, क्योंकि उसमें उनको खुदका पद जाने का डर नहीं लगता है. ये उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी. इसलिए पंचायत में 50 फीसदी तक आरक्षण पहुंच गया. लेकिन संसद में अपने पद जाने के डर से ये महिलाओं को वहां आरक्षण देने के पक्ष में नहीं दिखते हैं.
'संसद में आरक्षण देने का समय आ गया है' - आज से तीस साल पहले जिसने भी विरोध किया वो विरोध राजनीति सतह से नीचे नहीं गया था. पिछले 25 से 30 साल में जितनी महिलाएं पंचायती चुनाव से जीतकर निकली हैं वो आज वोकल हैं. अब जो भी पक्ष विपक्ष होगा वो लाखों बहने जो कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, जिन्होंने जनता की समस्याओं को देखा है वो आंदोलित है. वो कहती हैं कि झाड़ू पोछा वाले काम में तो हमे जोड़ देते हो अब हम निर्णायक प्रक्रिया में जोड़ों. और ये प्रक्रिया पंचायत में नहीं बल्कि संसद में होती है. समय आ गया है कि उन्हें संसद में भी आरक्षण दिया जाए.
'किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा' - पीएम मोदी ने कहा कि मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी, ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी. ये समय की मांग है. और भविष्य के फायदे के लिए इसको यहां करने आए हैं. ये देश के विकास और उन्नति के लिए आज की सबसे बड़ी जरूरत है.
महिला आरक्षण संसोधन बिल को लेकर पीएम मोदी ने गुरुवार को लोकसभा को संबोधित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की जरूरत है. अब समय आ गया है कि हम राजनीति से ऊपर उठकर देश और महिलाओं की प्रगति के लिए इस बिल का समर्थन करें और उनको बराबरी का हक दें. बगैर ये किए हम एक प्रगतिशील समाज की कल्पना नहीं कर सकते हैं.
'हमें राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन करना चाहिए' - पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के प्रयासों और उनके परिणामों को बीते तीस साल में देख सकते हैं. उनको लगेगा कि इस बिल के साथ जाने में ही उनका भी फायदा है. मुझे लगता है इसे राजनीतिक रूप देने की जरूरत नहीं है. जब मैं संगठन के कार्यकर्ता के रूप में काम करता था उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है तो बड़े आराम से दे देते हैं, क्योंकि उसमें उनको खुदका पद जाने का डर नहीं लगता है. ये उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी. इसलिए पंचायत में 50 फीसदी तक आरक्षण पहुंच गया. लेकिन संसद में अपने पद जाने के डर से ये महिलाओं को वहां आरक्षण देने के पक्ष में नहीं दिखते हैं.
'संसद में आरक्षण देने का समय आ गया है' - आज से तीस साल पहले जिसने भी विरोध किया वो विरोध राजनीति सतह से नीचे नहीं गया था. पिछले 25 से 30 साल में जितनी महिलाएं पंचायती चुनाव से जीतकर निकली हैं वो आज वोकल हैं. अब जो भी पक्ष विपक्ष होगा वो लाखों बहने जो कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, जिन्होंने जनता की समस्याओं को देखा है वो आंदोलित है. वो कहती हैं कि झाड़ू पोछा वाले काम में तो हमे जोड़ देते हो अब हम निर्णायक प्रक्रिया में जोड़ों. और ये प्रक्रिया पंचायत में नहीं बल्कि संसद में होती है. समय आ गया है कि उन्हें संसद में भी आरक्षण दिया जाए.
'किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा' - पीएम मोदी ने कहा कि मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी, ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी. ये समय की मांग है. और भविष्य के फायदे के लिए इसको यहां करने आए हैं. ये देश के विकास और उन्नति के लिए आज की सबसे बड़ी जरूरत है.



Journalist खबरीलाल














