रायपुर, 19 अप्रैल 2026/ राजधानी से लगे ग्राम काठाडीह के किसान श्री सुरेश सोनकर ने परंपरागत खेती से हटकर नवाचार की मिसाल पेश की है। शासकीय योजना से मिली सहायता से धान, सब्जी की खेती छोड़ उन्होंने गेंदा की खेती अपनाई और आज सालाना करीब 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
करीब ढाई साल पहले तक सुरेश पारंपरिक धान और सब्जी की खेती करते थे, जहां लागत अधिक और मुनाफा सीमित था। लेकिन उन्होंने जोखिम उठाते हुए गेंदा फूल की खेती अपनाने का निर्णय लिया। इस बदलाव में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और जिला उद्यानिकी विभाग का सहयोग उनके लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। आर्थिक सहायता और उद्यानिकी विभाग से मिले गेंदे के छोटे पौधों ने उनकी इस नई शुरुआत को मजबूत आधार दिया।आज सुरेश करीब 3.5 एकड़ भूमि पर गेंदा उगा रहे हैं। उनकी फसल की खासियत यह है कि यह सालभर मांग में रहती है, चाहे शादी-विवाह हो या धार्मिक आयोजन। भांठागांव और डूमरतराई जैसे स्थानीय बाजारों में उनके फूल हाथों-हाथ बिक जाते हैं। फूल की लगातार मांग उन्हें सालभर स्थायी आय प्रदान कर रही है। सुरेश रोजाना लगभग 400 किलोग्राम फूलों की तुड़ाई करते हैं। इस खेती से उनकी कुल सालाना आय करीब 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिसमें से लगभग 2 लाख रुपये शुद्ध लाभ है।
सुरेश कहते हैं, “पहले खेती में मेहनत ज्यादा और फायदा कम था। अब फूलों की खेती से न केवल अच्छी कमाई हो रही है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पहले सब्जी की फसल में नुकसान था लेकिन अब गेंदे की खेती से अच्छी कमाई हो रही है। अब मैं इस आय को अपने व्यवसाय को बढ़ाने और बच्चों के बेहतर भविष्य में उपयोग कर रहा हूं। सरकार की ये योजना वाकई में किसानों के लिए फायदेमंद है।"
सुरेश की सफलता अब उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में बदलाव की लहर पैदा कर रही है। वे अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिला उद्यानिकी अधिकारी श्री कैलाश पैकरा के अनुसार, “राष्ट्रीय बागवानी मिशन किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। इससे किसान फसल चक्रण अपनाकर कम लागत में अधिक आय अर्जित कर रहे हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं।”
रायपुर, 19 अप्रैल 2026/ राजधानी से लगे ग्राम काठाडीह के किसान श्री सुरेश सोनकर ने परंपरागत खेती से हटकर नवाचार की मिसाल पेश की है। शासकीय योजना से मिली सहायता से धान, सब्जी की खेती छोड़ उन्होंने गेंदा की खेती अपनाई और आज सालाना करीब 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
करीब ढाई साल पहले तक सुरेश पारंपरिक धान और सब्जी की खेती करते थे, जहां लागत अधिक और मुनाफा सीमित था। लेकिन उन्होंने जोखिम उठाते हुए गेंदा फूल की खेती अपनाने का निर्णय लिया। इस बदलाव में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और जिला उद्यानिकी विभाग का सहयोग उनके लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। आर्थिक सहायता और उद्यानिकी विभाग से मिले गेंदे के छोटे पौधों ने उनकी इस नई शुरुआत को मजबूत आधार दिया।आज सुरेश करीब 3.5 एकड़ भूमि पर गेंदा उगा रहे हैं। उनकी फसल की खासियत यह है कि यह सालभर मांग में रहती है, चाहे शादी-विवाह हो या धार्मिक आयोजन। भांठागांव और डूमरतराई जैसे स्थानीय बाजारों में उनके फूल हाथों-हाथ बिक जाते हैं। फूल की लगातार मांग उन्हें सालभर स्थायी आय प्रदान कर रही है। सुरेश रोजाना लगभग 400 किलोग्राम फूलों की तुड़ाई करते हैं। इस खेती से उनकी कुल सालाना आय करीब 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिसमें से लगभग 2 लाख रुपये शुद्ध लाभ है।
सुरेश कहते हैं, “पहले खेती में मेहनत ज्यादा और फायदा कम था। अब फूलों की खेती से न केवल अच्छी कमाई हो रही है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पहले सब्जी की फसल में नुकसान था लेकिन अब गेंदे की खेती से अच्छी कमाई हो रही है। अब मैं इस आय को अपने व्यवसाय को बढ़ाने और बच्चों के बेहतर भविष्य में उपयोग कर रहा हूं। सरकार की ये योजना वाकई में किसानों के लिए फायदेमंद है।"
सुरेश की सफलता अब उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में बदलाव की लहर पैदा कर रही है। वे अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिला उद्यानिकी अधिकारी श्री कैलाश पैकरा के अनुसार, “राष्ट्रीय बागवानी मिशन किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। इससे किसान फसल चक्रण अपनाकर कम लागत में अधिक आय अर्जित कर रहे हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं।”



Journalist खबरीलाल













