Breaking News

News (खबरीलाल न्यूज़) : राघव चड्ढा ही नहीं एक और नेता भी हैं AAP की सबसे बड़ी टूट का मास्टरमाइंड, पंजाब जीत में निभाई थी अहम भूमिका:

post

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के लिए शुक्रवार का दिन राजनीतिक भूचाल लेकर आया जब पार्टी के प्रमुख चेहरे राघव चड्ढा सहित कुल 7 राज्यसभा सदस्यों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी। आप में यह अभी तक की सबसे बड़ी टूट है।

आप की उतार-चढ़ाव भरी राजनीतिक यात्रा की बात करें ताे आप के गठन से लेकर अब तक का सफर बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने और आंतरिक कलह के कारण भी चर्चा में रहा है।

यहां एक कमी शुरू से ही महसूस की गई है कि यह राजनीतिक दल असंतोष को संभाल पाने में हर समय असफल रहा है। शायद यही कारण है कि प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास सहित एक-एक कर पार्टी के अधिकांश संस्थापक सदस्यों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया।

कुछ दिनों पहले राघव चड्ढ़ा के खुलकर विरोध करने के बाद भी पार्टी नेतृत्व सचेत नहीं हुआ, नेता चड्ढा के साथ बयानबाजी में उलझे रहे। वहीं, चड्ढा के साथ ही 10 में से सात और राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़ गए। इससे पार्टी संकट में आ गई है।

इसमें पार्टी के संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संदीप पाठक के पार्टी छोड़ने के फैसले ने आप काे सबसे अधिक चौंकाया है। पाठक आप के बडे़ रणनीतिकार रहे हैं और संकट के समय केजरीवाल के लिए सबसे आगे रहने वाले लोगों में रहे हैं।

संगठन से जुड़े सूत्रे विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को आप के सात सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले पाठक ही माने जा रहे हैं। किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगी और पूरे मामले में पाठक ने माहौल को तैयार कर दिया।

जिसके पंजाब से आप के चार और राज्यसभा सदस्य भाजपा में जाने को तैयार हो गए। जबकि स्वाति मालीवाल मई 2024 में केजरीवाल के आवास पर मारपीट किए जाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बाद खुलकर आप के विराेध में आ चुकी थीं।

दिल्ली से राज्यसभा सदस्य मालीवाल इसी इंतजार में थीं कि आप काे कैसे और कब अलविदा कहा जाए। पिछले एक माह से चड्ढा भी राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने पर बयान दे देने के बाद से निशाने पर थे। हालांकि चड्ढा ने अपने बयान में किसी बूचाल आने के संकेत दे दिए थे, मगर आप इसे समझ नहीं पाई।

 
 

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के लिए शुक्रवार का दिन राजनीतिक भूचाल लेकर आया जब पार्टी के प्रमुख चेहरे राघव चड्ढा सहित कुल 7 राज्यसभा सदस्यों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी। आप में यह अभी तक की सबसे बड़ी टूट है।

आप की उतार-चढ़ाव भरी राजनीतिक यात्रा की बात करें ताे आप के गठन से लेकर अब तक का सफर बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने और आंतरिक कलह के कारण भी चर्चा में रहा है।

यहां एक कमी शुरू से ही महसूस की गई है कि यह राजनीतिक दल असंतोष को संभाल पाने में हर समय असफल रहा है। शायद यही कारण है कि प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास सहित एक-एक कर पार्टी के अधिकांश संस्थापक सदस्यों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया।

कुछ दिनों पहले राघव चड्ढ़ा के खुलकर विरोध करने के बाद भी पार्टी नेतृत्व सचेत नहीं हुआ, नेता चड्ढा के साथ बयानबाजी में उलझे रहे। वहीं, चड्ढा के साथ ही 10 में से सात और राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़ गए। इससे पार्टी संकट में आ गई है।

इसमें पार्टी के संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संदीप पाठक के पार्टी छोड़ने के फैसले ने आप काे सबसे अधिक चौंकाया है। पाठक आप के बडे़ रणनीतिकार रहे हैं और संकट के समय केजरीवाल के लिए सबसे आगे रहने वाले लोगों में रहे हैं।

संगठन से जुड़े सूत्रे विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को आप के सात सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले पाठक ही माने जा रहे हैं। किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगी और पूरे मामले में पाठक ने माहौल को तैयार कर दिया।

जिसके पंजाब से आप के चार और राज्यसभा सदस्य भाजपा में जाने को तैयार हो गए। जबकि स्वाति मालीवाल मई 2024 में केजरीवाल के आवास पर मारपीट किए जाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बाद खुलकर आप के विराेध में आ चुकी थीं।

दिल्ली से राज्यसभा सदस्य मालीवाल इसी इंतजार में थीं कि आप काे कैसे और कब अलविदा कहा जाए। पिछले एक माह से चड्ढा भी राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने पर बयान दे देने के बाद से निशाने पर थे। हालांकि चड्ढा ने अपने बयान में किसी बूचाल आने के संकेत दे दिए थे, मगर आप इसे समझ नहीं पाई।

 
 

...
...
...
...
...
...
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner