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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: अधिकतर प्राइवेट बिल्डरों से परेशान हैं वे लोग जिन्होंने खरीदा फ्लैट या मकान, बड़ा सवाल ?:

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रायपुर/25-4-2026 :: किसी भी शहर को विकसित करने में सरकार के साथ साथ प्राइवेट कंपनियों का भी रोल होता है जो रोटी, कपड़ा, मकान और जीवन दायनी पानी की उपलब्धता करवाता है। इनके प्रयासों से ही कोई भी शहर के विभिन क्षेत्रों में विकास के कार्य होते हैं साथ ही विकसित हो रहे शहरों में विभिन्न कपनियाँ अपनी कार्यलय खोलती है और अन्य राज्यों से लोग उक्त शहर में आते हैं और रहने के लिए प्राइवेट बिल्डरों के पास से मकान / फ्लैट / जमीन उच्च कीमतों में खरीदते हैं। वे इसलिए खरीदते हैं क्यों कि बिल्डरों द्वारा 24 घण्टे पानी की सुविधा, सिक्योरिटी, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, गार्डन, मंदिर, कम्युनिटी हॉल, वॉली बॉल कोर्ट, बास्केट बॉल कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट आदि एमेनिटीज का वादा करते हैं और व्यक्ति विश्वास कर मकान या फ्लैट बुक करते हैं और सम्पूर्ण पोजेशन मिलने के कुछ दिन पश्चात सब हवा हवाई हो जाता है।

एक समय बाद बिल्डर के 80 से 90% प्रोडक्ट बिक जाने के बाद एक तय समय तक बिल्डरों द्वारा सुविधाएं प्रदान की जाती है। इसके पश्चात बिना सोसाइटी का सहकारिता चुनाव आयुक्त के द्वारा इलेक्शन करवाकर उक्त सोसाइटी को कुछ बिल्डरों द्वारा एडहॉक कमेटी बनाकर उन्हें सोसाइटी देखने के लिए प्रभार सौंप दिया जाता है। मिली जानकारी अनुसार किसी भी एडहॉक कमेटी का समय काल मात्र 3-महीने का होता है जिसके बाद चुनाव करवाना अनिवार्य होता है और स्थायी सोसाइटी बनने के बाद बिल्डर के द्वारा सोसाइटी को नव नियुक्त सोसाइटी के पदाधिकारियों को हैंड ओवर किया जाता है और ये हैंड ओवर तब पूर्ण माना जाता है जब बिल्डर के द्वारा सम्पूर्ण वादों को पूर्ण कर हैंडओवर करते हैं।

जिस सोसाइटी में सहकारिता विभाग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी सोसाइटी में बैठाया गया है उन सोसाइटीयों का क्या ? क्या प्राधिकृत अधिकारी के रहते हुए बिना वैधानिक चुनाव करवाकर कोई भी बिल्डर क्या सोसाइटी हैंड ओवर कर सकता है ?

बहुत से ऐसे प्राइवेट सोसाइटीयाँ हैं जहां एडहॉक कमेटी के 90 दिन के कार्यकाल खत्म होने के पश्चात सहकारिता चुनाव आयुक्त द्वारा वैधानिक चुनाव करवाना अनिवार्य होता है और मिली जानकारी अनुसार वैधानिक सोसाइटी को ही बिल्डर पूर्ण रूप से सोसाइटी का हैंडओवर करते हैं वो भी अपने वादे के अनुसार पूरा कार्य सम्पन्न करने के बाद।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग पर भी उठ रहे हैं सवाल !

जब कोई बिल्डर किसी भी शहर के किसी भी क्षेत्र में जमीन खरीदकर फ्लैट या मकान बनाते हैं तो सम्पूर्ण लेआउट प्लान का अनुमोदन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग करता है ! उसी अनुमोदित प्लान के अनुसार फ्लैट या मकान बनते हैं या जमीन बेचे जाते हैं जिसमे पानी, बिजली, वाटर टैंक आदि का भी ड्राइंग एंड डिज़ाइन में उल्लेख रहता है और बिल्डर को अनुमोदित प्लान के हिसाब से ही कार्य करना होता है। लेकिन मुश्किलें तब सामने आती है जब बिल्डर अपना प्रोडक्ट बेचकर निकल जाता है वो भी वैधानिक सोसाइटी को हैंडओवर देकर।

सवाल यहां यह उठ रहा है कि जो बिल्डर कॉलोनी या फ्लैट या मकान बनाकर बेच रहे हैं, क्या उक्त जगह पर पानी की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है कि नहीं  या उक्त क्षेत्र ड्राई जोन के अंदर तो नहीं आता है ? जो क्षेत्र ड्राई जोन के अंदर आते हैं वहां बिल्डर कैसे उक्त जगह पर फ्लैट, मकान या जमीन बेच सकते हैं ?

किसी भी राज्य के रेरा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में बैठे अधिकारी क्या कभी निरीक्षण करने पहुंचते हैं या ठंडे कमरे में ही बैठकर फाइलों को निपटा देते हैं !? सूत्र बताते हैं कि ये बिल्डर लोग बड़े रसूखदार होते हैं जिसके कारण कठोर कार्यवाही नहीं हो पाती हैं क्यों कि कहीं न कहीं से फ़ोन आ जाता है !

क्या फ्लैट/मकान/जमीन बेच देने के बाद बिल्डर का क्या सब फ़र्ज़ समाप्त हो जाता है ? क्या उनकी सोसाइटी के प्रति सब जबाबदेही खत्म हो जाती है ? क्या मानवीय संवेदनाएं समाप्त हो जाती है ? क्या पैसा कमाना ही एक मात्र लक्ष्य है ?


रायपुर/25-4-2026 :: किसी भी शहर को विकसित करने में सरकार के साथ साथ प्राइवेट कंपनियों का भी रोल होता है जो रोटी, कपड़ा, मकान और जीवन दायनी पानी की उपलब्धता करवाता है। इनके प्रयासों से ही कोई भी शहर के विभिन क्षेत्रों में विकास के कार्य होते हैं साथ ही विकसित हो रहे शहरों में विभिन्न कपनियाँ अपनी कार्यलय खोलती है और अन्य राज्यों से लोग उक्त शहर में आते हैं और रहने के लिए प्राइवेट बिल्डरों के पास से मकान / फ्लैट / जमीन उच्च कीमतों में खरीदते हैं। वे इसलिए खरीदते हैं क्यों कि बिल्डरों द्वारा 24 घण्टे पानी की सुविधा, सिक्योरिटी, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, गार्डन, मंदिर, कम्युनिटी हॉल, वॉली बॉल कोर्ट, बास्केट बॉल कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट आदि एमेनिटीज का वादा करते हैं और व्यक्ति विश्वास कर मकान या फ्लैट बुक करते हैं और सम्पूर्ण पोजेशन मिलने के कुछ दिन पश्चात सब हवा हवाई हो जाता है।

एक समय बाद बिल्डर के 80 से 90% प्रोडक्ट बिक जाने के बाद एक तय समय तक बिल्डरों द्वारा सुविधाएं प्रदान की जाती है। इसके पश्चात बिना सोसाइटी का सहकारिता चुनाव आयुक्त के द्वारा इलेक्शन करवाकर उक्त सोसाइटी को कुछ बिल्डरों द्वारा एडहॉक कमेटी बनाकर उन्हें सोसाइटी देखने के लिए प्रभार सौंप दिया जाता है। मिली जानकारी अनुसार किसी भी एडहॉक कमेटी का समय काल मात्र 3-महीने का होता है जिसके बाद चुनाव करवाना अनिवार्य होता है और स्थायी सोसाइटी बनने के बाद बिल्डर के द्वारा सोसाइटी को नव नियुक्त सोसाइटी के पदाधिकारियों को हैंड ओवर किया जाता है और ये हैंड ओवर तब पूर्ण माना जाता है जब बिल्डर के द्वारा सम्पूर्ण वादों को पूर्ण कर हैंडओवर करते हैं।

जिस सोसाइटी में सहकारिता विभाग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी सोसाइटी में बैठाया गया है उन सोसाइटीयों का क्या ? क्या प्राधिकृत अधिकारी के रहते हुए बिना वैधानिक चुनाव करवाकर कोई भी बिल्डर क्या सोसाइटी हैंड ओवर कर सकता है ?

बहुत से ऐसे प्राइवेट सोसाइटीयाँ हैं जहां एडहॉक कमेटी के 90 दिन के कार्यकाल खत्म होने के पश्चात सहकारिता चुनाव आयुक्त द्वारा वैधानिक चुनाव करवाना अनिवार्य होता है और मिली जानकारी अनुसार वैधानिक सोसाइटी को ही बिल्डर पूर्ण रूप से सोसाइटी का हैंडओवर करते हैं वो भी अपने वादे के अनुसार पूरा कार्य सम्पन्न करने के बाद।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग पर भी उठ रहे हैं सवाल !

जब कोई बिल्डर किसी भी शहर के किसी भी क्षेत्र में जमीन खरीदकर फ्लैट या मकान बनाते हैं तो सम्पूर्ण लेआउट प्लान का अनुमोदन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग करता है ! उसी अनुमोदित प्लान के अनुसार फ्लैट या मकान बनते हैं या जमीन बेचे जाते हैं जिसमे पानी, बिजली, वाटर टैंक आदि का भी ड्राइंग एंड डिज़ाइन में उल्लेख रहता है और बिल्डर को अनुमोदित प्लान के हिसाब से ही कार्य करना होता है। लेकिन मुश्किलें तब सामने आती है जब बिल्डर अपना प्रोडक्ट बेचकर निकल जाता है वो भी वैधानिक सोसाइटी को हैंडओवर देकर।

सवाल यहां यह उठ रहा है कि जो बिल्डर कॉलोनी या फ्लैट या मकान बनाकर बेच रहे हैं, क्या उक्त जगह पर पानी की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है कि नहीं  या उक्त क्षेत्र ड्राई जोन के अंदर तो नहीं आता है ? जो क्षेत्र ड्राई जोन के अंदर आते हैं वहां बिल्डर कैसे उक्त जगह पर फ्लैट, मकान या जमीन बेच सकते हैं ?

किसी भी राज्य के रेरा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में बैठे अधिकारी क्या कभी निरीक्षण करने पहुंचते हैं या ठंडे कमरे में ही बैठकर फाइलों को निपटा देते हैं !? सूत्र बताते हैं कि ये बिल्डर लोग बड़े रसूखदार होते हैं जिसके कारण कठोर कार्यवाही नहीं हो पाती हैं क्यों कि कहीं न कहीं से फ़ोन आ जाता है !

क्या फ्लैट/मकान/जमीन बेच देने के बाद बिल्डर का क्या सब फ़र्ज़ समाप्त हो जाता है ? क्या उनकी सोसाइटी के प्रति सब जबाबदेही खत्म हो जाती है ? क्या मानवीय संवेदनाएं समाप्त हो जाती है ? क्या पैसा कमाना ही एक मात्र लक्ष्य है ?


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