
उड़ीसा। जगन्नाथ रथयात्रा के पावन अवसर पर वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भगवान जगन्नाथ के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की दिव्य कथा के माध्यम से आस्था, सेवा, विनम्रता और मानवता के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
अपने संदेश में श्री अग्रवाल ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की दिव्य प्रतिमाओं के निर्माण से जुड़ी प्राचीन कथा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार देवशिल्पी विश्वकर्मा ने एक वृद्ध मूर्तिकार का रूप धारण कर इन प्रतिमाओं का निर्माण प्रारंभ किया था और शर्त रखी थी कि 21 दिनों तक कोई भी कक्ष का द्वार नहीं खोलेगा। किंतु चिंता और उत्सुकता के कारण राजा ने निर्धारित समय से पहले ही द्वार खोल दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिमाएं अधूरी अवस्था में ही रह गईं। यही स्वरूप आज भगवान जगन्नाथ के रूप में पूजनीय है।

उड़ीसा। जगन्नाथ रथयात्रा के पावन अवसर पर वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भगवान जगन्नाथ के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की दिव्य कथा के माध्यम से आस्था, सेवा, विनम्रता और मानवता के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
अपने संदेश में श्री अग्रवाल ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की दिव्य प्रतिमाओं के निर्माण से जुड़ी प्राचीन कथा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार देवशिल्पी विश्वकर्मा ने एक वृद्ध मूर्तिकार का रूप धारण कर इन प्रतिमाओं का निर्माण प्रारंभ किया था और शर्त रखी थी कि 21 दिनों तक कोई भी कक्ष का द्वार नहीं खोलेगा। किंतु चिंता और उत्सुकता के कारण राजा ने निर्धारित समय से पहले ही द्वार खोल दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिमाएं अधूरी अवस्था में ही रह गईं। यही स्वरूप आज भगवान जगन्नाथ के रूप में पूजनीय है।


Journalist खबरीलाल















