हर सुबह जब हम जागते हैं, अपने प्रियजनों को पहचानते हैं, निर्णय लेते हैं, बोलते हैं, चलते हैं, याद रखते हैं और सपने देखते हैं, तो हम अक्सर इन क्षमताओं को सामान्य मान लेते हैं। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि यह सब हमारे शरीर के एक अद्भुत अंग—मस्तिष्क—की बदौलत संभव है।
विडंबना यह है कि अधिकांश लोग अपने हृदय, किडनी या लीवर के स्वास्थ्य को लेकर तो चिंतित रहते हैं, लेकिन मस्तिष्क की सुरक्षा के बारे में तब तक नहीं सोचते, जब तक कोई न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) बीमारी सामने न आ जाए। जबकि मस्तिष्क हमारे शरीर का कमांड सेंटर है, जो हमारी हर गतिविधि, विचार, भावना, स्मृति और निर्णय को नियंत्रित करता है। शरीर के कुल वजन का केवल लगभग 2 प्रतिशत होने के बावजूद यह शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऑक्सीजन और ऊर्जा का उपयोग करता है। स्वस्थ मस्तिष्क का कोई विकल्प नहीं है।
हर वर्ष 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस (World Brain Day) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी (World Federation of Neurology) ने लोगों में मस्तिष्क संबंधी रोगों और मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की थी।
विश्व मस्तिष्क दिवस 2026 की थीम है—"Brain Health: Access for All" (सभी के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य की उपलब्धता)। इसका संदेश स्पष्ट और प्रेरणादायक है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह कहीं भी रहता हो या उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, उसे न्यूरोलॉजिकल शिक्षा, समय पर जांच, प्रभावी उपचार और पुनर्वास की समान सुविधा मिलनी चाहिए।
आज तंत्रिका संबंधी रोग दुनिया भर में विकलांगता और मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। स्ट्रोक, डिमेंशिया, पार्किंसंस रोग, मिर्गी, माइग्रेन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी अनेक बीमारियां हर वर्ष लाखों परिवारों को प्रभावित करती हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई बीमारियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और समय पर चिकित्सा प्राप्त करके रोका जा सकता है या इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यदि मुझे मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए केवल एक ही सलाह देनी हो, तो वह होगी— "अपने रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की नियमित जांच कराएं और उसे नियंत्रित रखें।" उच्च रक्तचाप को "साइलेंट किलर" कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता रहता है। यह स्ट्रोक, वैस्कुलर डिमेंशिया और याददाश्त में कमी का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। अच्छी बात यह है कि नियमित रक्तचाप जांच, स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित सेवन इन जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है।
वैज्ञानिक शोध लगातार यह साबित करते रहे हैं कि जो आदतें हृदय के लिए अच्छी हैं, वही मस्तिष्क के लिए भी लाभकारी हैं। हृदय को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली ही मस्तिष्क की कार्यक्षमता की भी रक्षा करती है।
जीवनभर मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के पाँच सरल उपाय -
• अपने रक्तचाप, रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कर उन्हें नियंत्रित रखें।
• सप्ताह में अधिकांश दिनों कम से कम 30 मिनट तक मध्यम स्तर का व्यायाम करें।
• फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार लें तथा अधिक नमक, चीनी और अत्यधिक प्रसंस्कृत (Ultra-processed) खाद्य पदार्थों से बचें।
• किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन न करें और शराब का सेवन सीमित रखें।
• पर्याप्त नींद लें, पढ़ने या नई चीजें सीखने के माध्यम से अपने मस्तिष्क को सक्रिय रखें तथा परिवार और समाज से जुड़े रहें।
इसके साथ ही स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी बेहद जरूरी है। यदि अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाए, हाथ या पैर में कमजोरी महसूस हो, बोलने में कठिनाई हो, संतुलन बिगड़ जाए या अचानक दृष्टि चली जाए, तो इसे कभी भी नजरअंदाज न करें। स्ट्रोक में हर मिनट कीमती होता है। समय पर उपचार लाखों मस्तिष्क कोशिकाओं को बचा सकता है, विकलांगता को कम कर सकता है और जीवन बचा सकता है।
मस्तिष्क को स्वस्थ रखना केवल न्यूरोलॉजिस्ट या अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं है। इसकी शुरुआत हमारे घर से होती है—स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव का सही प्रबंधन, नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता से। परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल, समाज और नीति-निर्माताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे ऐसा वातावरण बनाएं जहां हर व्यक्ति को मस्तिष्क स्वास्थ्य की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण न्यूरोलॉजिकल सेवाएं उपलब्ध हों।
इस विश्व मस्तिष्क दिवस पर आइए हम एक सरल संकल्प लें—अपने मस्तिष्क की हर दिन देखभाल करेंगे। आज लिए गए हमारे छोटे-छोटे स्वस्थ निर्णय ही यह तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में हम कितना बेहतर सोचेंगे, याद रखेंगे, चलेंगे और जीवन का आनंद ले पाएंगे।
आखिरकार, स्वस्थ मस्तिष्क केवल बीमारी का अभाव नहीं है, बल्कि सीखने, कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता, गरिमा और बेहतर जीवन गुणवत्ता की मजबूत नींव है। अपने मस्तिष्क की रक्षा कीजिए। यही आपकी सबसे अनमोल संपत्ति है।
हर सुबह जब हम जागते हैं, अपने प्रियजनों को पहचानते हैं, निर्णय लेते हैं, बोलते हैं, चलते हैं, याद रखते हैं और सपने देखते हैं, तो हम अक्सर इन क्षमताओं को सामान्य मान लेते हैं। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि यह सब हमारे शरीर के एक अद्भुत अंग—मस्तिष्क—की बदौलत संभव है।
विडंबना यह है कि अधिकांश लोग अपने हृदय, किडनी या लीवर के स्वास्थ्य को लेकर तो चिंतित रहते हैं, लेकिन मस्तिष्क की सुरक्षा के बारे में तब तक नहीं सोचते, जब तक कोई न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) बीमारी सामने न आ जाए। जबकि मस्तिष्क हमारे शरीर का कमांड सेंटर है, जो हमारी हर गतिविधि, विचार, भावना, स्मृति और निर्णय को नियंत्रित करता है। शरीर के कुल वजन का केवल लगभग 2 प्रतिशत होने के बावजूद यह शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऑक्सीजन और ऊर्जा का उपयोग करता है। स्वस्थ मस्तिष्क का कोई विकल्प नहीं है।
हर वर्ष 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस (World Brain Day) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी (World Federation of Neurology) ने लोगों में मस्तिष्क संबंधी रोगों और मस्तिष्क स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की थी।
विश्व मस्तिष्क दिवस 2026 की थीम है—"Brain Health: Access for All" (सभी के लिए मस्तिष्क स्वास्थ्य की उपलब्धता)। इसका संदेश स्पष्ट और प्रेरणादायक है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह कहीं भी रहता हो या उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, उसे न्यूरोलॉजिकल शिक्षा, समय पर जांच, प्रभावी उपचार और पुनर्वास की समान सुविधा मिलनी चाहिए।
आज तंत्रिका संबंधी रोग दुनिया भर में विकलांगता और मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। स्ट्रोक, डिमेंशिया, पार्किंसंस रोग, मिर्गी, माइग्रेन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी अनेक बीमारियां हर वर्ष लाखों परिवारों को प्रभावित करती हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई बीमारियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और समय पर चिकित्सा प्राप्त करके रोका जा सकता है या इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यदि मुझे मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए केवल एक ही सलाह देनी हो, तो वह होगी— "अपने रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की नियमित जांच कराएं और उसे नियंत्रित रखें।" उच्च रक्तचाप को "साइलेंट किलर" कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता रहता है। यह स्ट्रोक, वैस्कुलर डिमेंशिया और याददाश्त में कमी का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। अच्छी बात यह है कि नियमित रक्तचाप जांच, स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित सेवन इन जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है।
वैज्ञानिक शोध लगातार यह साबित करते रहे हैं कि जो आदतें हृदय के लिए अच्छी हैं, वही मस्तिष्क के लिए भी लाभकारी हैं। हृदय को स्वस्थ रखने वाली जीवनशैली ही मस्तिष्क की कार्यक्षमता की भी रक्षा करती है।
जीवनभर मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के पाँच सरल उपाय -
• अपने रक्तचाप, रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कर उन्हें नियंत्रित रखें।
• सप्ताह में अधिकांश दिनों कम से कम 30 मिनट तक मध्यम स्तर का व्यायाम करें।
• फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार लें तथा अधिक नमक, चीनी और अत्यधिक प्रसंस्कृत (Ultra-processed) खाद्य पदार्थों से बचें।
• किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन न करें और शराब का सेवन सीमित रखें।
• पर्याप्त नींद लें, पढ़ने या नई चीजें सीखने के माध्यम से अपने मस्तिष्क को सक्रिय रखें तथा परिवार और समाज से जुड़े रहें।
इसके साथ ही स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी बेहद जरूरी है। यदि अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाए, हाथ या पैर में कमजोरी महसूस हो, बोलने में कठिनाई हो, संतुलन बिगड़ जाए या अचानक दृष्टि चली जाए, तो इसे कभी भी नजरअंदाज न करें। स्ट्रोक में हर मिनट कीमती होता है। समय पर उपचार लाखों मस्तिष्क कोशिकाओं को बचा सकता है, विकलांगता को कम कर सकता है और जीवन बचा सकता है।
मस्तिष्क को स्वस्थ रखना केवल न्यूरोलॉजिस्ट या अस्पतालों की जिम्मेदारी नहीं है। इसकी शुरुआत हमारे घर से होती है—स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव का सही प्रबंधन, नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता से। परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल, समाज और नीति-निर्माताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे ऐसा वातावरण बनाएं जहां हर व्यक्ति को मस्तिष्क स्वास्थ्य की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण न्यूरोलॉजिकल सेवाएं उपलब्ध हों।
इस विश्व मस्तिष्क दिवस पर आइए हम एक सरल संकल्प लें—अपने मस्तिष्क की हर दिन देखभाल करेंगे। आज लिए गए हमारे छोटे-छोटे स्वस्थ निर्णय ही यह तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में हम कितना बेहतर सोचेंगे, याद रखेंगे, चलेंगे और जीवन का आनंद ले पाएंगे।
आखिरकार, स्वस्थ मस्तिष्क केवल बीमारी का अभाव नहीं है, बल्कि सीखने, कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता, गरिमा और बेहतर जीवन गुणवत्ता की मजबूत नींव है। अपने मस्तिष्क की रक्षा कीजिए। यही आपकी सबसे अनमोल संपत्ति है।


Journalist खबरीलाल















