
बिलासपुर। कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और उनके बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस ने बुधवार को पुलिस ग्राउंड स्थित विकासगुड़ी हॉल में जिला स्तरीय बाल संरक्षण हितधारकों की तीसरी अभिसरण बैठक आयोजित की। बैठक में विभिन्न विभागों, न्यायिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए साझा कार्ययोजना पर चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार चोहान तथा काउंसिल टू सिक्योर जस्टिस की वरिष्ठ निदेशक डॉ. उर्वशी तिलक विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
बैठक में कानून से संघर्ष की स्थिति में आए बच्चों के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं को मजबूत करने, पुनर्वास व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा स्कूल से बाहर बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रात्रिकालीन विद्यालय जैसी पहलों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी संबंधित विभागों ने इन विषयों पर समन्वित प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी विभागों और संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने संवेदनशील, जवाबदेह और बाल-अनुकूल संरक्षण तंत्र विकसित करने के लिए सभी हितधारकों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, शिक्षा और श्रम विभाग, सेंदरी मानसिक चिकित्सालय, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, एनसीपीसीआर के प्रतिनिधियों तथा हस्तक्षेप पुलिस थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। अंत में सभी हितधारकों ने विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाते हुए बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और सकारात्मक विकास के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बिलासपुर। कानून से संघर्ष की स्थिति में आने वाले बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और उनके बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस ने बुधवार को पुलिस ग्राउंड स्थित विकासगुड़ी हॉल में जिला स्तरीय बाल संरक्षण हितधारकों की तीसरी अभिसरण बैठक आयोजित की। बैठक में विभिन्न विभागों, न्यायिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए साझा कार्ययोजना पर चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कुमार चोहान तथा काउंसिल टू सिक्योर जस्टिस की वरिष्ठ निदेशक डॉ. उर्वशी तिलक विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
बैठक में कानून से संघर्ष की स्थिति में आए बच्चों के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं को मजबूत करने, पुनर्वास व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा स्कूल से बाहर बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रात्रिकालीन विद्यालय जैसी पहलों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी संबंधित विभागों ने इन विषयों पर समन्वित प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी विभागों और संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने संवेदनशील, जवाबदेह और बाल-अनुकूल संरक्षण तंत्र विकसित करने के लिए सभी हितधारकों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, शिक्षा और श्रम विभाग, सेंदरी मानसिक चिकित्सालय, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, एनसीपीसीआर के प्रतिनिधियों तथा हस्तक्षेप पुलिस थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। अंत में सभी हितधारकों ने विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाते हुए बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और सकारात्मक विकास के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


Journalist खबरीलाल















