रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत भेजकर स्वास्थ्य सचिव पर संसदीय विशेषाधिकार के हनन का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, सांसद का आरोप है कि उन्होंने जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर स्वास्थ्य विभाग को कई पत्र एवं स्मरण पत्र भेजे, लेकिन लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि 20 मई को हुई एक टेलीफोनिक बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया तथा कथित रूप से कहा, "जो करना है कर लो।" सांसद का कहना है कि यह एक जनप्रतिनिधि के संवैधानिक अधिकारों और संसदीय गरिमा के विपरीत है।
मामले को गंभीर मानते हुए सांसद ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत प्राप्त संसदीय विशेषाधिकारों के हनन का विषय बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से उचित कार्रवाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने शिकायत के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट (Factual Note) मांगी है।
फिलहाल, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की आधिकारिक जांच एवं प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना शेष है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच समन्वय, संवाद तथा प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। हालांकि, मामले के सभी तथ्यों का अंतिम निर्धारण संबंधित संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत भेजकर स्वास्थ्य सचिव पर संसदीय विशेषाधिकार के हनन का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, सांसद का आरोप है कि उन्होंने जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर स्वास्थ्य विभाग को कई पत्र एवं स्मरण पत्र भेजे, लेकिन लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि 20 मई को हुई एक टेलीफोनिक बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया तथा कथित रूप से कहा, "जो करना है कर लो।" सांसद का कहना है कि यह एक जनप्रतिनिधि के संवैधानिक अधिकारों और संसदीय गरिमा के विपरीत है।
मामले को गंभीर मानते हुए सांसद ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत प्राप्त संसदीय विशेषाधिकारों के हनन का विषय बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से उचित कार्रवाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने शिकायत के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट (Factual Note) मांगी है।
फिलहाल, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की आधिकारिक जांच एवं प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना शेष है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच समन्वय, संवाद तथा प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। हालांकि, मामले के सभी तथ्यों का अंतिम निर्धारण संबंधित संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


Journalist खबरीलाल















