रायपुर । करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित बायो और ई-टायलेट बंद पड़े हैं। सार्वजनिक सुलभ शौचालय में से कुछ ही चालू हालत में हैं। ऐसे में शहर ओडीएफ कैसे हो सकता है? शहर को ओडीएफ घोषित करने के लिए नगर निगम दावा करता है। बावजूद इसके शहर में शौचालय निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
सार्वजनिक शौचालय बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हो रही है। सार्वजनिक स्थलों पर पहले से शौचालय का अभाव है। कुछ जगहों में बने भी हैं तो बंद पड़े हैं। दूसरी ओर अभी त्योहारी सीजन के कारण बाजार में शौचालय के अभाव में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
वहीं नगर निगम और स्मार्ट सिटी दावा करते हैं कि शहर के प्रमुख बाजारों में शौचालय की व्यवस्था करेंगे। हालांकि बाजारों में तो शौचालय बनवा भी रहे हैं, लेकिन इसके लिए रखरखाव के लिए निगम एजेंसी ही नियुक्त नहीं कर पा रहा है। इन सबकी लापरवाही का खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
शहर में निगम हाल में महिलाओं के लिए पिंक टायलेट प्रोजेक्ट लेकर आया है। भीड़भाड़ वाले शास्त्री बाजार, पंडरी कपड़ा बाजार समेत अन्य जगहों में पहले चरण में पिंक टायलेट का निर्माण किया गया। यहां भी कई पानी टंकियों से पानी गिरना जैसी शिकायत है तो कई सामान भी गायब हो गया है।
ई-टायलेट और वाटर एटीएम की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च
रायपुर एम्स के पास ई-टायलेट का हाल-बेहाल है। यहां दरवाजे में रस्सी बांध दी है। उचित देखरेख नहीं होने के कारण गंदगी का आलम है। वहीं एम्स जैसे बड़े अस्पताल में लोगों का 24 घंटों आना-जाना लगा रहता है। फिर भी नगर निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसी कारण सार्वजनिक शौलाचय जीई रोड वंदना आटो के पास लाखों रुपये बनाकर छोड़ दिया है, जहां इस वक्त ताला बंद है।
रायपुर एम्स के पास ई-टायलेट का हाल-बेहाल है। यहां दरवाजे में रस्सी बांध दी है। उचित देखरेख नहीं होने के कारण गंदगी का आलम है। वहीं एम्स जैसे बड़े अस्पताल में लोगों का 24 घंटों आना-जाना लगा रहता है। फिर भी नगर निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसी कारण सार्वजनिक शौलाचय जीई रोड वंदना आटो के पास लाखों रुपये बनाकर छोड़ दिया है, जहां इस वक्त ताला बंद है।
इसके अलावा लोगों की प्यास बुझाने के लिए वाटर एटीएम शहर के कई जगहों में लगाया गया है। कई जगहों पर वाटर एटीएम से पानी निकलना बंद हो गए। हालांकि पड़ताल में सामने आया कि नगर निगम द्वारा दुर्ग की एक कंपनी को वाटर एटीएम शहर में संचालित करने के लिए ठेका दिया है, जहां नगर निगम द्वारा मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है।
पड़ताल की जा रही है
ई-टायलेट और वाटर एटीएम बंद पड़े हैं। वहां की पड़ताल की जा रही है। उन सभी को दुरुस्त करके फिर से शुरू किया जाएगा। -लोकेश्वर साहू, अपर आयुक्त, नगर निगम
रायपुर । करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित बायो और ई-टायलेट बंद पड़े हैं। सार्वजनिक सुलभ शौचालय में से कुछ ही चालू हालत में हैं। ऐसे में शहर ओडीएफ कैसे हो सकता है? शहर को ओडीएफ घोषित करने के लिए नगर निगम दावा करता है। बावजूद इसके शहर में शौचालय निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
सार्वजनिक शौचालय बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हो रही है। सार्वजनिक स्थलों पर पहले से शौचालय का अभाव है। कुछ जगहों में बने भी हैं तो बंद पड़े हैं। दूसरी ओर अभी त्योहारी सीजन के कारण बाजार में शौचालय के अभाव में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
वहीं नगर निगम और स्मार्ट सिटी दावा करते हैं कि शहर के प्रमुख बाजारों में शौचालय की व्यवस्था करेंगे। हालांकि बाजारों में तो शौचालय बनवा भी रहे हैं, लेकिन इसके लिए रखरखाव के लिए निगम एजेंसी ही नियुक्त नहीं कर पा रहा है। इन सबकी लापरवाही का खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
शहर में निगम हाल में महिलाओं के लिए पिंक टायलेट प्रोजेक्ट लेकर आया है। भीड़भाड़ वाले शास्त्री बाजार, पंडरी कपड़ा बाजार समेत अन्य जगहों में पहले चरण में पिंक टायलेट का निर्माण किया गया। यहां भी कई पानी टंकियों से पानी गिरना जैसी शिकायत है तो कई सामान भी गायब हो गया है।
ई-टायलेट और वाटर एटीएम की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च
रायपुर एम्स के पास ई-टायलेट का हाल-बेहाल है। यहां दरवाजे में रस्सी बांध दी है। उचित देखरेख नहीं होने के कारण गंदगी का आलम है। वहीं एम्स जैसे बड़े अस्पताल में लोगों का 24 घंटों आना-जाना लगा रहता है। फिर भी नगर निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसी कारण सार्वजनिक शौलाचय जीई रोड वंदना आटो के पास लाखों रुपये बनाकर छोड़ दिया है, जहां इस वक्त ताला बंद है।
रायपुर एम्स के पास ई-टायलेट का हाल-बेहाल है। यहां दरवाजे में रस्सी बांध दी है। उचित देखरेख नहीं होने के कारण गंदगी का आलम है। वहीं एम्स जैसे बड़े अस्पताल में लोगों का 24 घंटों आना-जाना लगा रहता है। फिर भी नगर निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसी कारण सार्वजनिक शौलाचय जीई रोड वंदना आटो के पास लाखों रुपये बनाकर छोड़ दिया है, जहां इस वक्त ताला बंद है।
इसके अलावा लोगों की प्यास बुझाने के लिए वाटर एटीएम शहर के कई जगहों में लगाया गया है। कई जगहों पर वाटर एटीएम से पानी निकलना बंद हो गए। हालांकि पड़ताल में सामने आया कि नगर निगम द्वारा दुर्ग की एक कंपनी को वाटर एटीएम शहर में संचालित करने के लिए ठेका दिया है, जहां नगर निगम द्वारा मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है।
पड़ताल की जा रही है
ई-टायलेट और वाटर एटीएम बंद पड़े हैं। वहां की पड़ताल की जा रही है। उन सभी को दुरुस्त करके फिर से शुरू किया जाएगा। -लोकेश्वर साहू, अपर आयुक्त, नगर निगम


Journalist खबरीलाल












