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कोरोना का साइड इफेक्ट-स्वस्थ होने के बाद भी नहीं आ रही नींद,कमजोरी अधिक:

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रायपुर। राजधानी में जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए, उन्हें दो
महीने बाद भी स्वास्थ्य से जुड़ी मामूली समस्याएं हैं जो अब तक चल रही हैं।
इनमें सबसे ज्यादा शिकायत नींद नहीं आने की है। अंबेडकर अस्पताल के पोस्ट
कोरोना ओपीडी में रोजाना ऐसे लोग आ रहे हैं, जिसमें औसतन लोगों की शिकायत
है कि उन्हें नींद नहीं आ रही है। बचे हुए मरीजों को थकान, कमजोरी और
हांफने या सांस फूलने की शिकायतें हैं।
पोस्ट कोरोना विशेष ओपीडी में
चेस्ट एक्सपर्ट के साथ मनोरोग विशेषज्ञ व फिजियोथैरेपिस्ट भी मरीजों का
इलाज कर रहे हैं। यह ओपीडी अंबेडकर अस्पताल में अक्टूबर में चालू की गई थी,
क्योंकि कोरोना से स्वस्थ हुए काफी लोग छोटी-छोटी तकलीफ के साथ अंबेडकर
अस्पताल पहुंच रहे थे। दरअसल कोरोना से ठीक हुए मरीज अब इसी तरह की
दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।  


यही नहीं, कुछ स्वस्थ लोग डिप्रेशन का
भी शिकार हो रहे हैं। मनोरोग विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि एक मानसिक
एंजाइटी डिसऑर्डर के मरीजों में चिंता व भय के लक्षण होते हैं। इस कारण
उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती है। यह एक मानसिक रोग है, जिसमें
मरीज को तेज बेचैनी के साथ नकारात्मक विचार, चिंता व डर का आभास होता है।
जैसे अचानक हाथ कांपना, पसीने आना आदि। डॉक्टरों के अनुसार अगर समय पर सही
इलाज न किया जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। हालांकि एंजाइटी के हर मरीज को
दवा नहीं दी जा रही है। उन्हें जरूरी एक्सरसाइज करने को कहा जा रहा है।
जिन्हें ज्यादा समस्या है, दवा केवल उन्हें दी जा रही है। 




रायपुर। राजधानी में जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए, उन्हें दो
महीने बाद भी स्वास्थ्य से जुड़ी मामूली समस्याएं हैं जो अब तक चल रही हैं।
इनमें सबसे ज्यादा शिकायत नींद नहीं आने की है। अंबेडकर अस्पताल के पोस्ट
कोरोना ओपीडी में रोजाना ऐसे लोग आ रहे हैं, जिसमें औसतन लोगों की शिकायत
है कि उन्हें नींद नहीं आ रही है। बचे हुए मरीजों को थकान, कमजोरी और
हांफने या सांस फूलने की शिकायतें हैं।
पोस्ट कोरोना विशेष ओपीडी में
चेस्ट एक्सपर्ट के साथ मनोरोग विशेषज्ञ व फिजियोथैरेपिस्ट भी मरीजों का
इलाज कर रहे हैं। यह ओपीडी अंबेडकर अस्पताल में अक्टूबर में चालू की गई थी,
क्योंकि कोरोना से स्वस्थ हुए काफी लोग छोटी-छोटी तकलीफ के साथ अंबेडकर
अस्पताल पहुंच रहे थे। दरअसल कोरोना से ठीक हुए मरीज अब इसी तरह की
दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।  


यही नहीं, कुछ स्वस्थ लोग डिप्रेशन का
भी शिकार हो रहे हैं। मनोरोग विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि एक मानसिक
एंजाइटी डिसऑर्डर के मरीजों में चिंता व भय के लक्षण होते हैं। इस कारण
उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती है। यह एक मानसिक रोग है, जिसमें
मरीज को तेज बेचैनी के साथ नकारात्मक विचार, चिंता व डर का आभास होता है।
जैसे अचानक हाथ कांपना, पसीने आना आदि। डॉक्टरों के अनुसार अगर समय पर सही
इलाज न किया जाए तो यह खतरनाक हो सकता है। हालांकि एंजाइटी के हर मरीज को
दवा नहीं दी जा रही है। उन्हें जरूरी एक्सरसाइज करने को कहा जा रहा है।
जिन्हें ज्यादा समस्या है, दवा केवल उन्हें दी जा रही है। 



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