रायपुर । छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शराबबंदी के अधूरा चुनावी वादे पर बयानों का घोड़ा उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश तक दौड़ रहा है। कांग्रेस ने भाजपा शासित मध्य प्रदेश में शराब दुकान की संख्या बढ़ाने पर भाजपा से सवाल पूछा है। वहीं भाजपा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यह कहकर घेरने की कोशिश कर रही है कि वे उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में छत्तीसगढ़ के शराब माडल का जिक्र कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शराबबंदी के नाम पर छाती पीटने वाले भाजपाई मध्य प्रदेश की शराब नीति पर चुप क्यों है? रोज सुबह उठकर शराबबंदी पर बयान देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह मध्य प्रदेश की शराब नीति का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं? सिंह ने भाजपा नेताओं पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शराब को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं की नीति हमेशा से दोहरी रही है। जब तक डा. रमन सिंह की सरकार थी, उन्होंने शराब ठेकेदारों के हाथ से शराब का व्यवसाय लेकर उसका सरकारीकरण कर दिया। इस निर्णय के साथ ही शराब दुकानों से निकलकर गांव-गांव तक पहुंच गई। उस समय ठेके पर कोचिए नियुक्त कर दिए गए थे। जैसे ही सत्ता हाथ से चली गई, शराब से अथाह प्रेम की जगह दिखावटी शराब विरोध ने ले लिया।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शराबबंदी के अधूरा चुनावी वादे पर बयानों का घोड़ा उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश तक दौड़ रहा है। कांग्रेस ने भाजपा शासित मध्य प्रदेश में शराब दुकान की संख्या बढ़ाने पर भाजपा से सवाल पूछा है। वहीं भाजपा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यह कहकर घेरने की कोशिश कर रही है कि वे उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में छत्तीसगढ़ के शराब माडल का जिक्र कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शराबबंदी के नाम पर छाती पीटने वाले भाजपाई मध्य प्रदेश की शराब नीति पर चुप क्यों है? रोज सुबह उठकर शराबबंदी पर बयान देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह मध्य प्रदेश की शराब नीति का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं? सिंह ने भाजपा नेताओं पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शराब को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं की नीति हमेशा से दोहरी रही है। जब तक डा. रमन सिंह की सरकार थी, उन्होंने शराब ठेकेदारों के हाथ से शराब का व्यवसाय लेकर उसका सरकारीकरण कर दिया। इस निर्णय के साथ ही शराब दुकानों से निकलकर गांव-गांव तक पहुंच गई। उस समय ठेके पर कोचिए नियुक्त कर दिए गए थे। जैसे ही सत्ता हाथ से चली गई, शराब से अथाह प्रेम की जगह दिखावटी शराब विरोध ने ले लिया।


Journalist खबरीलाल












