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NEWS RAIPUR:: कमल विहार को जोड़ने वाला ओवरब्रिज 15 फरवरी तक शुरू होगा:

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 रायपुर।  राजधानीवासियों को न्यू
राजेन्द्र से कमल विहार जाने के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा
क्योंकि इनको जोड़ने वाले निर्माणधीन ओवरब्रिज के दोनों तरफ के एप्रोच रोड
का डामरीकरण का काम शुरू हो गया है। यह काम होने पर ठेका एजेंसी 11 और 12
फरवरी को लोड टेस्टिंग के बाद गर्डर के ऊपर डामरीकरण का काम श्ाुरू करेगी।
15 फरवरी के बाद ओवरब्रिज लोगों के लिए खोलने की उम्मीद है।


ओवरब्रिज
का काम पूरा होने से करीब डेढ़ लाख लोगों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काम तेजी से चल रहा है, जल्द इसे शुरू
किया जाएगा। गौरतलब है कि न्यू राजेन्द्र नगर से कमल विहार को जोड़ने के लिए
एनएच-38 के ऊपर 25 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से ओवरब्रिज का निर्माण किया
जा रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने ओवरब्रिज का टेंडर 18 मई 2017 को किया
था। लखनऊ की जीएस एक्सप्रेस-वे कंपनी को काम का जिम्मा सौंपा गया था।
ओवरब्रिज की लंबाई 786.00 मीटर तथा चौड़ाई 08.40 है। कंपनी ने शुरूआत में
काम तेजी से शुरू किया था, जो बाद में धीमी पड़ गई। पीडब्ल्यूडी विभाग के
अनुबंध के तहत 8 माह में काम पूरा होना था, जो अब तक नही हो पाया है।



 रायपुर।  राजधानीवासियों को न्यू
राजेन्द्र से कमल विहार जाने के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा
क्योंकि इनको जोड़ने वाले निर्माणधीन ओवरब्रिज के दोनों तरफ के एप्रोच रोड
का डामरीकरण का काम शुरू हो गया है। यह काम होने पर ठेका एजेंसी 11 और 12
फरवरी को लोड टेस्टिंग के बाद गर्डर के ऊपर डामरीकरण का काम श्ाुरू करेगी।
15 फरवरी के बाद ओवरब्रिज लोगों के लिए खोलने की उम्मीद है।


ओवरब्रिज
का काम पूरा होने से करीब डेढ़ लाख लोगों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काम तेजी से चल रहा है, जल्द इसे शुरू
किया जाएगा। गौरतलब है कि न्यू राजेन्द्र नगर से कमल विहार को जोड़ने के लिए
एनएच-38 के ऊपर 25 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से ओवरब्रिज का निर्माण किया
जा रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने ओवरब्रिज का टेंडर 18 मई 2017 को किया
था। लखनऊ की जीएस एक्सप्रेस-वे कंपनी को काम का जिम्मा सौंपा गया था।
ओवरब्रिज की लंबाई 786.00 मीटर तथा चौड़ाई 08.40 है। कंपनी ने शुरूआत में
काम तेजी से शुरू किया था, जो बाद में धीमी पड़ गई। पीडब्ल्यूडी विभाग के
अनुबंध के तहत 8 माह में काम पूरा होना था, जो अब तक नही हो पाया है।



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