प्रयागराज. मौनी अमावस्या पर मंगलवार को दोपहर 12 बजे
तक लगभग 1.30 करोड़ लोगों ने यहां गंगा और संगम में स्रान किया। सोमवार की
रात 11 बजे तक तक करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने यहां गंगा और संगम में स्रान
किया था। मेला कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को दोपहर 12
बजे तक लगभग 1 करोड़ 30 लाख श्रद्धालुओं ने यहां चल रहे माघ मेले में गंगा
और संगम में डुबकी लगाई। माघ मेला क्षेत्र में यजमानों को सुबह से ही ंिपडदान करा रहे तीन तुमड़ी
निशान के पंडा भोला त्रिपाठी ने बताया कि मौनी अमावस्या का मुहूर्त सोमवार
दोपहर 2:20 बजे से लग गया जो मंगलवार सुबह 11:16 बजे तक था। हालांकि
श्रद्धालुओं के शाम तक गंगा स्रान करने की संभावना है। उन्होंने बताया कि धर्मशास्त्रों के मुताबिक, यदि अमावस्या की तिथि
सोमवार को सूर्यास्त से कुछ क्षण पहले प्रारंभ हो जाती है तो इसे सोमवती
अमावस्या कहा जाता है जिसमें पितरों के कार्य भी किए जा सकते हैं। उनके
अनुसार, ऐसा माना जाता है कि अमावस्या को ंिपडदान और तर्पण करने से पितरों
की तृप्ति होती है। मेला कार्यालय के मुताबिक, सुगम आवागमन व सुरक्षित संगम स्रान के लिये
संपूर्ण मेला क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर पुलिस के विभिन्न टीमों के
जवान तैनात किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र की सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों के
माध्यम से निगरानी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि रविवार को प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने
मौनी अमावस्या पर एक करोड़ श्रद्धालुओं के गंगा स्रान करने की उम्मीद जताई
थी। उन्होंने पूरे मेला क्षेत्र का भ्रमण कर सुविधाओं का जायजा लिया था।
प्रयागराज. मौनी अमावस्या पर मंगलवार को दोपहर 12 बजे
तक लगभग 1.30 करोड़ लोगों ने यहां गंगा और संगम में स्रान किया। सोमवार की
रात 11 बजे तक तक करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने यहां गंगा और संगम में स्रान
किया था। मेला कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को दोपहर 12
बजे तक लगभग 1 करोड़ 30 लाख श्रद्धालुओं ने यहां चल रहे माघ मेले में गंगा
और संगम में डुबकी लगाई। माघ मेला क्षेत्र में यजमानों को सुबह से ही ंिपडदान करा रहे तीन तुमड़ी
निशान के पंडा भोला त्रिपाठी ने बताया कि मौनी अमावस्या का मुहूर्त सोमवार
दोपहर 2:20 बजे से लग गया जो मंगलवार सुबह 11:16 बजे तक था। हालांकि
श्रद्धालुओं के शाम तक गंगा स्रान करने की संभावना है। उन्होंने बताया कि धर्मशास्त्रों के मुताबिक, यदि अमावस्या की तिथि
सोमवार को सूर्यास्त से कुछ क्षण पहले प्रारंभ हो जाती है तो इसे सोमवती
अमावस्या कहा जाता है जिसमें पितरों के कार्य भी किए जा सकते हैं। उनके
अनुसार, ऐसा माना जाता है कि अमावस्या को ंिपडदान और तर्पण करने से पितरों
की तृप्ति होती है। मेला कार्यालय के मुताबिक, सुगम आवागमन व सुरक्षित संगम स्रान के लिये
संपूर्ण मेला क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर पुलिस के विभिन्न टीमों के
जवान तैनात किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र की सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों के
माध्यम से निगरानी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि रविवार को प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने
मौनी अमावस्या पर एक करोड़ श्रद्धालुओं के गंगा स्रान करने की उम्मीद जताई
थी। उन्होंने पूरे मेला क्षेत्र का भ्रमण कर सुविधाओं का जायजा लिया था।


Journalist खबरीलाल












