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रूस - यूक्रेन वॉर, महंगे हो सकते हैं पेट्रोल, डीजल, खाद्य सामग्री....:

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नई द‍िल्‍ली। रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमला क‍िये जाने के बाद वैश्‍व‍िक स्‍तर पर इसका अलग-अलग तरह से असर पड़ रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्‍चा तेल सात साल के हाई लेवल 103.78 डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पहले अगस्‍त 2014 में क्रूड ऑयल का दाम 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल तक गया था। तेल के दामों में तेजी का असर आने वाले समय में घरेलू बाजार में देखने को म‍िलेगा।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जानकारों का कहना है क‍ि 5 राज्‍यों में व‍िधानसभा चुनाव खत्‍म होने के बाद और रूस – युक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के चलते पेट्रोल और डीजल के रेट में 15 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है। हालांक‍ि इसमें राहत वाली बात यह रहेगी क‍ि कीमतों में बढ़ोतरी तेल कंपन‍ियों की तरफ से दो से तीन चरण में लागू की जाएगी। आइए जानते हैं वो तीन बड़े कारण ज‍िनकी वजह से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।


भारत की बात करें तो यहां पिछले कुछ समय से खाने के तेल के दाम पहले से ही आसमान पर है और युद्ध के चलते सप्लाई रुकी तो इसकी कीमतों में और आग लगनी संभव है। इसके अलावा रूस भारत को खाद देता है और युद्ध के हालातों के बीच इसके आयात में भी रुकावट आ सकती है। देश में पहले से ही यूरिया संकट है तो हालात और खराब होंगे, इस समस्या का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।


आपको बता दें कि देश का ऑटोमोबाइल सेक्टर सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में रूस और यूक्रेन की बीच जारी जंग का प्रभाव इस क्षेत्र पर पड़ना तय है। दरअसल, यूक्रेन ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रभावित करने वाला होगा। इसका कारण ये है कि यूक्रेन सेमीकंडक्टर की खास धातु पेलेडियम और नियोन का उत्पादन करता है। जंग के हालात में इन धातुओं का उत्पादन प्रभावित होगा और सेमीकंडक्टर की कमी का ये संकट और भी अधिक बढ़ जाएगा।


गौरतबल है देश में खुदरा महंगाई पहले से ही उच्च स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी इसमें और इजाफा करने वाली साबित होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती होने वाली है। दरअसल, कच्चा तेल महंगा हुआ्, तो देश में पेट्रोल-डीजल और गैस पर पड़ने वाला है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई पर खर्च बढ़ेगा और सब्जी-फल समेत रोजमर्रा के सामनों पर महंगाई बढ़ेगी जो कि आपकी जेब पर सीधा असर डालेगी।


गौरतलब है कि रूस नेचुरल गैस का सबसे बड़ा सप्लायर है जो वैश्विक मांग का लगभग 10 फीसदी उत्पादन करता है। दोनों देशों के बीच युद्ध के कारण जाहिर है कि नेचुरल गैस की सप्लाई पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और ईंधन की कीमतों में आग लग जाएगी। बता दें कि यूरोप की निर्भरता रूस पर अधिक है। यूरोप में 40 फीसदी से ज्यादा गैस रूस से ही आती है। इसका सीधा असर आम आदमी पर होगा। इसके अलावा रूस विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल उत्पादक है। यूरोप के देश 20 फीसदी से ज्यादा तेल रूस से ही लेते हैं। इसके अलावा, ग्लोबल उत्पादन में विश्व का 10 फीसदी कॉपर और 10 फीसदी एल्युमीनियम रूस बनाता है।

इन चीजों के बढ़ेगी महंगाई:: पेट्रोल डीजल, सीएनजी रसोई गैस, सब्जी फल, खाने का तेल, खाद, मोबाइल, लैपटॉप, गैस


नई द‍िल्‍ली। रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमला क‍िये जाने के बाद वैश्‍व‍िक स्‍तर पर इसका अलग-अलग तरह से असर पड़ रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्‍चा तेल सात साल के हाई लेवल 103.78 डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पहले अगस्‍त 2014 में क्रूड ऑयल का दाम 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल तक गया था। तेल के दामों में तेजी का असर आने वाले समय में घरेलू बाजार में देखने को म‍िलेगा।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जानकारों का कहना है क‍ि 5 राज्‍यों में व‍िधानसभा चुनाव खत्‍म होने के बाद और रूस – युक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के चलते पेट्रोल और डीजल के रेट में 15 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है। हालांक‍ि इसमें राहत वाली बात यह रहेगी क‍ि कीमतों में बढ़ोतरी तेल कंपन‍ियों की तरफ से दो से तीन चरण में लागू की जाएगी। आइए जानते हैं वो तीन बड़े कारण ज‍िनकी वजह से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।


भारत की बात करें तो यहां पिछले कुछ समय से खाने के तेल के दाम पहले से ही आसमान पर है और युद्ध के चलते सप्लाई रुकी तो इसकी कीमतों में और आग लगनी संभव है। इसके अलावा रूस भारत को खाद देता है और युद्ध के हालातों के बीच इसके आयात में भी रुकावट आ सकती है। देश में पहले से ही यूरिया संकट है तो हालात और खराब होंगे, इस समस्या का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।


आपको बता दें कि देश का ऑटोमोबाइल सेक्टर सेमीकंडक्टर की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में रूस और यूक्रेन की बीच जारी जंग का प्रभाव इस क्षेत्र पर पड़ना तय है। दरअसल, यूक्रेन ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रभावित करने वाला होगा। इसका कारण ये है कि यूक्रेन सेमीकंडक्टर की खास धातु पेलेडियम और नियोन का उत्पादन करता है। जंग के हालात में इन धातुओं का उत्पादन प्रभावित होगा और सेमीकंडक्टर की कमी का ये संकट और भी अधिक बढ़ जाएगा।


गौरतबल है देश में खुदरा महंगाई पहले से ही उच्च स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी इसमें और इजाफा करने वाली साबित होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती होने वाली है। दरअसल, कच्चा तेल महंगा हुआ्, तो देश में पेट्रोल-डीजल और गैस पर पड़ने वाला है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई पर खर्च बढ़ेगा और सब्जी-फल समेत रोजमर्रा के सामनों पर महंगाई बढ़ेगी जो कि आपकी जेब पर सीधा असर डालेगी।


गौरतलब है कि रूस नेचुरल गैस का सबसे बड़ा सप्लायर है जो वैश्विक मांग का लगभग 10 फीसदी उत्पादन करता है। दोनों देशों के बीच युद्ध के कारण जाहिर है कि नेचुरल गैस की सप्लाई पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और ईंधन की कीमतों में आग लग जाएगी। बता दें कि यूरोप की निर्भरता रूस पर अधिक है। यूरोप में 40 फीसदी से ज्यादा गैस रूस से ही आती है। इसका सीधा असर आम आदमी पर होगा। इसके अलावा रूस विश्व का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल उत्पादक है। यूरोप के देश 20 फीसदी से ज्यादा तेल रूस से ही लेते हैं। इसके अलावा, ग्लोबल उत्पादन में विश्व का 10 फीसदी कॉपर और 10 फीसदी एल्युमीनियम रूस बनाता है।

इन चीजों के बढ़ेगी महंगाई:: पेट्रोल डीजल, सीएनजी रसोई गैस, सब्जी फल, खाने का तेल, खाद, मोबाइल, लैपटॉप, गैस


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