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सामाजिक बहिष्कार जैसी कुरीति के खिलाफ सक्षम कानून बनाया जाये - डॉ. मिश्र:

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00 राज्य के सभी विधायकों को पत्र लिखकर कर रहे हैं आग्रह
रायपुर।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि,हमारे
यहाँ सामाजिक और जातिगत स्तर पर सक्रिय पंचायतों द्वारा सामाजिक बहिष्कार
के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। पिछले दिनों जशपुर में 1 परिवार,
कोंडागांव में 1 परिवार, केशकाल में 10 परिवारों, सरायपाली में 5 परिवारों,
बगीचा कांसाबेल में 1 परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने की घटना सामने आई
है ग्रामीण अँचल में ऐसी घटनाएँ बहुतायत से होती है जिसमें जाति व समाज से
बाहर विवाह करने, समाज के मुखिया का कहना न मानने, पंचायतों के मनमाने
फरमान व फैसलों को सिर झुकाकर न पालन करने पर किसी व्यक्ति या उसके पूरे
परिवार को समाज व जाति से बहिष्कार कर दिया जाता है व उसका समाज में हुक्का
पानी बंद कर दिया जाता है।


कुछ मामलों में तो स्वच्छता मित्र बनने पर,
तो ककहीं आर.टी.आई. लगाने पर भी समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है।  पूरे
प्रदेश में 30 हजार से अधिक व्यक्ति सामाजिक बहिष्कार जैसी ककुरीति के
शिकार हैं। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति सामाजिक बहिष्कार जैसी सामाजिक
कुरीति के खिलाफ जनजागरण एवं प्रताडि़त लोगों की मदद के लिए पिछले कुछ
वर्षों से लगातार कार्य कर रही है। समिति सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर
आगामी विधानसभा सत्र में सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कानून बनाने की मांग
कर रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में महाराष्ट्र विधानसभा में सभी सदस्यो ने
सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम के संबंध में महत्वपूर्ण कानून को बिना
किसी विरोध के सर्वसम्मति से11 अप्रैल 2016 को पारित कर दिया तथा 20 जून
2017 को माननीय राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद 3 जुलाई 2017 से
पूरे महाराष्ट्र में लागू कर दिया गया। इसी प्रकार हमारे प्रदेश में भी
सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम की महती आवश्यकता महसूस की जा रही है।



00 राज्य के सभी विधायकों को पत्र लिखकर कर रहे हैं आग्रह
रायपुर।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि,हमारे
यहाँ सामाजिक और जातिगत स्तर पर सक्रिय पंचायतों द्वारा सामाजिक बहिष्कार
के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। पिछले दिनों जशपुर में 1 परिवार,
कोंडागांव में 1 परिवार, केशकाल में 10 परिवारों, सरायपाली में 5 परिवारों,
बगीचा कांसाबेल में 1 परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने की घटना सामने आई
है ग्रामीण अँचल में ऐसी घटनाएँ बहुतायत से होती है जिसमें जाति व समाज से
बाहर विवाह करने, समाज के मुखिया का कहना न मानने, पंचायतों के मनमाने
फरमान व फैसलों को सिर झुकाकर न पालन करने पर किसी व्यक्ति या उसके पूरे
परिवार को समाज व जाति से बहिष्कार कर दिया जाता है व उसका समाज में हुक्का
पानी बंद कर दिया जाता है।


कुछ मामलों में तो स्वच्छता मित्र बनने पर,
तो ककहीं आर.टी.आई. लगाने पर भी समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है।  पूरे
प्रदेश में 30 हजार से अधिक व्यक्ति सामाजिक बहिष्कार जैसी ककुरीति के
शिकार हैं। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति सामाजिक बहिष्कार जैसी सामाजिक
कुरीति के खिलाफ जनजागरण एवं प्रताडि़त लोगों की मदद के लिए पिछले कुछ
वर्षों से लगातार कार्य कर रही है। समिति सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर
आगामी विधानसभा सत्र में सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कानून बनाने की मांग
कर रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में महाराष्ट्र विधानसभा में सभी सदस्यो ने
सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम के संबंध में महत्वपूर्ण कानून को बिना
किसी विरोध के सर्वसम्मति से11 अप्रैल 2016 को पारित कर दिया तथा 20 जून
2017 को माननीय राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद 3 जुलाई 2017 से
पूरे महाराष्ट्र में लागू कर दिया गया। इसी प्रकार हमारे प्रदेश में भी
सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम की महती आवश्यकता महसूस की जा रही है।



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