जगदलपुर। छत्तीसगढ़ व झारखंड की सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ में नक्सलियों
ने जगह-जगह प्रेशर बम व बारूदी सुरंग बिछा रखा है इसका रहस्योद्घटन
नक्सलियों के कब्जे में 13 दिनों तक रहने के बाद मुक्त होकर घर आए बाक्साइट
खदान के सुपरवाईजर व सुरक्षा कर्मियों ने किया है। मुख्यमंत्री के दौरे की
वजह से वरिष्ठ अधिकारियों ने नक्सलियों के चंगुल से रिहा हुए कर्मचारियों
से पूछताछ नहीं की थी। अब यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कर्मचारियों की
ओर से दी जा रही जानकारी को इस लिए तथ्यपरक माना जा रहा है कि इस क्षेत्र
में नक्सली लैंड माइंस विस्फोट कर चुके है। फ़ोर्स को निशाना बनाने के
अलावा प्रेशर बम की चपेट में आने से मवेशी और चरवाहे की भी मौत हो चुकी है।
रिहा हुए कर्मियों ने दावा किया है कि नक्सलियों ने उन्हें जंगल में
मूवमेंट करने के लिए यह कहकर साफ मना किया था कि चारों तरफ प्रेशर बम लगाए
गए हैं।
जंगल में जमीन के अंदर कई स्थानों पर बम लगे होने की बात कहने
से वे सहम गए थे। वहां नक्सली भी आने- जाने के लिए एक निश्चित लीक (पतला
रास्ता) का ही इस्तेमाल करते है।
कोई भी कहीं ज्यादा मूवमेंट नहीं कर रहा
था। नक्सली बार-बार कह रहे थे कि इधर-उधर जाओगे तो उड़ जाओगे। बताते चले कि
नक्सलियों ने जिन तीन कर्मचारी का अपहरण किया था वे घरों को लौट आए है।
उनके द्वारा दी गई जानकारी को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इलाके में
नक्सली पहले भी लैण्डमाइंस विस्फोट कर कई घटनाओं को अंजाम दे चुके है। जमीन
के भीतर बारूद बिछाकर विस्फोट करना नक्सलियों के हमले का पुराना तरीका रहा
है। नक्सल विरोधी अभियान में पुलिस आए दिन केन बम, प्रेशर बम और
लैण्डमाइंस बरामद करती रही है। कई बार जाने-अनजाने में ग्रामीण लोग व मवेशी
भी इसके शिकार हो जाते हैं।
बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों के खिलाफ लगातार
संयुक्त अभियान के बावजूद यहां नक्सलियों की मौजूदगी और चोरी-छिपे
छत्तीसगढ़ में प्रवेश की सूचनाएं मिलती रहती है। बूढ़ा पहाड नक्सलियों का
सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। फ़ोर्स को रोकने नक्सलियों द्वारा
आईईडी लगाने की सूचनाएं पूर्व में भी मिलती रही है। नक्सली कमांडर अरविंद
की मौत के बाद उक्त क्षेत्र की कमान सुधाकर के पास ही थी। सुधाकर के
आत्मसमपर्ण के बाद अब विमल ने फ़ंड इक_ा करने की जिम्मेदारी अपने हाथो ली
हैं।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ व झारखंड की सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़ में नक्सलियों
ने जगह-जगह प्रेशर बम व बारूदी सुरंग बिछा रखा है इसका रहस्योद्घटन
नक्सलियों के कब्जे में 13 दिनों तक रहने के बाद मुक्त होकर घर आए बाक्साइट
खदान के सुपरवाईजर व सुरक्षा कर्मियों ने किया है। मुख्यमंत्री के दौरे की
वजह से वरिष्ठ अधिकारियों ने नक्सलियों के चंगुल से रिहा हुए कर्मचारियों
से पूछताछ नहीं की थी। अब यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कर्मचारियों की
ओर से दी जा रही जानकारी को इस लिए तथ्यपरक माना जा रहा है कि इस क्षेत्र
में नक्सली लैंड माइंस विस्फोट कर चुके है। फ़ोर्स को निशाना बनाने के
अलावा प्रेशर बम की चपेट में आने से मवेशी और चरवाहे की भी मौत हो चुकी है।
रिहा हुए कर्मियों ने दावा किया है कि नक्सलियों ने उन्हें जंगल में
मूवमेंट करने के लिए यह कहकर साफ मना किया था कि चारों तरफ प्रेशर बम लगाए
गए हैं।
जंगल में जमीन के अंदर कई स्थानों पर बम लगे होने की बात कहने
से वे सहम गए थे। वहां नक्सली भी आने- जाने के लिए एक निश्चित लीक (पतला
रास्ता) का ही इस्तेमाल करते है।
कोई भी कहीं ज्यादा मूवमेंट नहीं कर रहा
था। नक्सली बार-बार कह रहे थे कि इधर-उधर जाओगे तो उड़ जाओगे। बताते चले कि
नक्सलियों ने जिन तीन कर्मचारी का अपहरण किया था वे घरों को लौट आए है।
उनके द्वारा दी गई जानकारी को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इलाके में
नक्सली पहले भी लैण्डमाइंस विस्फोट कर कई घटनाओं को अंजाम दे चुके है। जमीन
के भीतर बारूद बिछाकर विस्फोट करना नक्सलियों के हमले का पुराना तरीका रहा
है। नक्सल विरोधी अभियान में पुलिस आए दिन केन बम, प्रेशर बम और
लैण्डमाइंस बरामद करती रही है। कई बार जाने-अनजाने में ग्रामीण लोग व मवेशी
भी इसके शिकार हो जाते हैं।
बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों के खिलाफ लगातार
संयुक्त अभियान के बावजूद यहां नक्सलियों की मौजूदगी और चोरी-छिपे
छत्तीसगढ़ में प्रवेश की सूचनाएं मिलती रहती है। बूढ़ा पहाड नक्सलियों का
सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। फ़ोर्स को रोकने नक्सलियों द्वारा
आईईडी लगाने की सूचनाएं पूर्व में भी मिलती रही है। नक्सली कमांडर अरविंद
की मौत के बाद उक्त क्षेत्र की कमान सुधाकर के पास ही थी। सुधाकर के
आत्मसमपर्ण के बाद अब विमल ने फ़ंड इक_ा करने की जिम्मेदारी अपने हाथो ली
हैं।


Journalist खबरीलाल












