रायपुर। प्रदेश के सैकड़ों रोजगार सहायकों ने नियमित करने समेत अपनी आधा
दर्जन मांगों को लेकर आज यहां जमकर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी
दी है कि मांगें पूरी ना होने पर वे सभी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस बीच भीड़ इतनी ज्यादा हो गई थी कि कोविड-19 के सारे नियम कायदों को धता
बता दिया गया।
ग्राम रोजगार सहायक संघ के अध्यक्ष संतोष सोनवानी, संजय
सोनवानी व अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि वे सभी अपनी मांगों को लेकर
शासन-प्रशासन से कई बार चर्चा कर चुके हैं। इसके बाद भी उनकी मांगों पर कोई
विचार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे सभी अपनी मांगों को लेकर
समय-समय पर सड़क पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी हो रही
है।
उनकी मांगों में ग्रेड पे तय कर नियमित करने, जिन ग्राम पंचायतों
को नगर निगम/नगर पंचायत में शामिल किया जा रहा है, वहां के रोजगार सहायकों
को संबंधित निकाय में शामिल करने या अन्य रिक्त ग्राम पंचायत में सेवा पर
रखने, ग्राम रोजगार सहायकों की सचिव पद पर वरीयता के आधार पर सीधी भर्ती
करने एवं रोजगार सहायकों को सहायक सचिव घोषित करने शामिल हैं। दूसरी तरफ 3
से 4 माह तक मानदेय भुगतान ना करने, मोबाइल-नेट खर्च ना देने व स्थानांतरण
नीति ना बनाने की भी समस्या है।
रायपुर। प्रदेश के सैकड़ों रोजगार सहायकों ने नियमित करने समेत अपनी आधा
दर्जन मांगों को लेकर आज यहां जमकर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी
दी है कि मांगें पूरी ना होने पर वे सभी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस बीच भीड़ इतनी ज्यादा हो गई थी कि कोविड-19 के सारे नियम कायदों को धता
बता दिया गया।
ग्राम रोजगार सहायक संघ के अध्यक्ष संतोष सोनवानी, संजय
सोनवानी व अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि वे सभी अपनी मांगों को लेकर
शासन-प्रशासन से कई बार चर्चा कर चुके हैं। इसके बाद भी उनकी मांगों पर कोई
विचार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे सभी अपनी मांगों को लेकर
समय-समय पर सड़क पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी हो रही
है।
उनकी मांगों में ग्रेड पे तय कर नियमित करने, जिन ग्राम पंचायतों
को नगर निगम/नगर पंचायत में शामिल किया जा रहा है, वहां के रोजगार सहायकों
को संबंधित निकाय में शामिल करने या अन्य रिक्त ग्राम पंचायत में सेवा पर
रखने, ग्राम रोजगार सहायकों की सचिव पद पर वरीयता के आधार पर सीधी भर्ती
करने एवं रोजगार सहायकों को सहायक सचिव घोषित करने शामिल हैं। दूसरी तरफ 3
से 4 माह तक मानदेय भुगतान ना करने, मोबाइल-नेट खर्च ना देने व स्थानांतरण
नीति ना बनाने की भी समस्या है।


Journalist खबरीलाल












