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News Bilaspur:: छत्तीसगढ़ में बोरे-बासी की मची धूम, कलेक्टर से लेकर जनप्रनिधियोें ने चखा स्वाद:

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  बिलासपुर । रविवार एक मई को
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस है। छत्तीसगढ़ में दिवस विशेष से नई परंपरा की
शुस्र्आत हुई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज राजधानी से लेकर प्रदेश के
सभी जिला मुख्यालयों में सुबह से ही बोरे बासी की धूम मची हुई है। कलेक्टर
डा सारांश मित्तर ने सुबह अपने बंगले पर बासी खाया और वीडियो जारी कर लोगों
को बोरे बासी की विशेषता के बारे में बताते हुए बोरे बासी खाने की अपील
की।  तखतपुर की विधायक व संसदीय सचिव रश्मि सिंह ने बासी खाते हुए इंटरनेट
मीडिया के जरिए फोटो व वीडियो अपलोड किया है। वीडियो व फोटो अपलोड करने के
साथ ही इसकी विशेषता के बारे में भी जानकरी दी है। ग्रामीणों व शहरवासियों
को प्रतिदिन बोरे बासी खाने की अपील भी की है। मजदूर दिवस के अवसर पर
रविवार को सुबह से ही अलग-अलग श्रमिक संगठनों द्वारा पारंपरिक तरीके से
दिवस विशेष के तहत कार्यक्रम मनाए जा रहे हैं। श्रमिक संगठनों ने भी बोरे बासी खाने की अपील की है। यह पहली बार है जब
कार्यक्रमों के दौरान नाश्ता के बजाय बोरे बासी की बटकी और थाली नजर आ रही
है।


सुबह से ही सत्ताधारी दल से जुड़े जनप्रतिनिधियों और दिग्गजों के बीच
बासी खाते हुए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो व फोटो अपलोड करने की
प्रतिस्पर्धा चल रही है। बासी खाते सत्ता से जुड़े दिग्गज वीडियो और फोटो
अपलोड कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की समृद्धि परंपरा तथा विरासत के लगातार प्रसार तथा इसे जन जन तक
पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के द्वारा मजदूर
दिवस के अवसर पर महनतकश कर्मठ मजदूरो के सम्मान दिवस पर बिलासपुर शहर के
विधायक माननीय शैलेष पाण्डेय एवं जिला कांग्रेस कमेटी के सम्माननीय
अध्यक्ष विजय केशरवानी नगर निगम के एल्डरमैन शैलेन्द्र जयसवाल,वरिष्ठ
पार्षद रामा बघेल, एल्डरमैन दिपांशु श्रीवास्तव, व मजदूर साथीयों के साथ
बोरे बासी का सेवन किया ।


राजधानी रवाना हुए 300 श्रमिक

राजधानी
में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में प्रदेशभर के नौ हजार श्रमिकों
का सम्मान कार्यक्रम रखा गया है। सीएम बघेल श्रमिकों के साथ बैठकर बोरे
खाएंगे। इसे लेकर आज सुबह से ही प्रशासनिक सरगर्मी तेजी के साथ बढ़ी हुई है।
जिले के 300 श्रमिकों को लेकर श्रम विभाग के अफसर राजधानी के लिए रवाना हो
गए हंै। श्रमिकों को उनके घर से राजधानी लेकर जाने और कार्यक्रम के बाद
वापस सुरक्षित घ्ार छोड़ने की जिम्मेदारी श्रम विभाग के अधिकारियों की है।


 


  बिलासपुर । रविवार एक मई को
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस है। छत्तीसगढ़ में दिवस विशेष से नई परंपरा की
शुस्र्आत हुई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज राजधानी से लेकर प्रदेश के
सभी जिला मुख्यालयों में सुबह से ही बोरे बासी की धूम मची हुई है। कलेक्टर
डा सारांश मित्तर ने सुबह अपने बंगले पर बासी खाया और वीडियो जारी कर लोगों
को बोरे बासी की विशेषता के बारे में बताते हुए बोरे बासी खाने की अपील
की।  तखतपुर की विधायक व संसदीय सचिव रश्मि सिंह ने बासी खाते हुए इंटरनेट
मीडिया के जरिए फोटो व वीडियो अपलोड किया है। वीडियो व फोटो अपलोड करने के
साथ ही इसकी विशेषता के बारे में भी जानकरी दी है। ग्रामीणों व शहरवासियों
को प्रतिदिन बोरे बासी खाने की अपील भी की है। मजदूर दिवस के अवसर पर
रविवार को सुबह से ही अलग-अलग श्रमिक संगठनों द्वारा पारंपरिक तरीके से
दिवस विशेष के तहत कार्यक्रम मनाए जा रहे हैं। श्रमिक संगठनों ने भी बोरे बासी खाने की अपील की है। यह पहली बार है जब
कार्यक्रमों के दौरान नाश्ता के बजाय बोरे बासी की बटकी और थाली नजर आ रही
है।


सुबह से ही सत्ताधारी दल से जुड़े जनप्रतिनिधियों और दिग्गजों के बीच
बासी खाते हुए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो व फोटो अपलोड करने की
प्रतिस्पर्धा चल रही है। बासी खाते सत्ता से जुड़े दिग्गज वीडियो और फोटो
अपलोड कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की समृद्धि परंपरा तथा विरासत के लगातार प्रसार तथा इसे जन जन तक
पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के द्वारा मजदूर
दिवस के अवसर पर महनतकश कर्मठ मजदूरो के सम्मान दिवस पर बिलासपुर शहर के
विधायक माननीय शैलेष पाण्डेय एवं जिला कांग्रेस कमेटी के सम्माननीय
अध्यक्ष विजय केशरवानी नगर निगम के एल्डरमैन शैलेन्द्र जयसवाल,वरिष्ठ
पार्षद रामा बघेल, एल्डरमैन दिपांशु श्रीवास्तव, व मजदूर साथीयों के साथ
बोरे बासी का सेवन किया ।


राजधानी रवाना हुए 300 श्रमिक

राजधानी
में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में प्रदेशभर के नौ हजार श्रमिकों
का सम्मान कार्यक्रम रखा गया है। सीएम बघेल श्रमिकों के साथ बैठकर बोरे
खाएंगे। इसे लेकर आज सुबह से ही प्रशासनिक सरगर्मी तेजी के साथ बढ़ी हुई है।
जिले के 300 श्रमिकों को लेकर श्रम विभाग के अफसर राजधानी के लिए रवाना हो
गए हंै। श्रमिकों को उनके घर से राजधानी लेकर जाने और कार्यक्रम के बाद
वापस सुरक्षित घ्ार छोड़ने की जिम्मेदारी श्रम विभाग के अधिकारियों की है।


 


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