रायपुर । छत्तीसगढ़ में बिनायक सेन,
कालीचरण, पत्रकार कन्हैया लाल शुक्ला उर्फ कमल शुक्ला समेत कई लोगों पर
राजद्रोह के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें कुछ लोगों को जमानत पर रिहा किया जा
चुका है। पत्रकार कमल शुक्ला के मामले में पुलिस ने चार्जशीट पेश नहीं की
है। उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में एक वर्ष पहले देशद्रोह कानून को चुनौती
दी थी। इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह पर रोक लगाई है। सुप्रीम
कोर्ट के आए फैसले के अनुसार अब 124(ए) पर कोई भी नया मुकदमा दर्ज नहीं
किया जाएगा। साथ ही पहले से चल रहे राजद्रोह के मामले 124(ए) पर कार्रवाई
नहीं होगी और इसे निलंबित माना जाएगा। लेकिन आरोपित पर दूसरे मामले दर्ज
हैं तो उन पर कार्रवाई होगी। बस्तर
के पत्रकार कमल शुक्ला ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले कानून को चुनौती
देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। उनके साथ मणिपुर के
पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी शामिल
हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मेरे मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं
की है। उधर, विधि विशेषज्ञों ने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार अगर
कोई आरोपित राजद्रोह के मामले में जेल में बंद है तो वह अब जमानत के लिए
अदालत में आवेदन लगा सकता है। इसके साथ ही अगर किसी आरोपित पर राजद्रोह का
मामला अदालत में चल रहा है तो अभी की स्थिति में धारा 124(ए) के मामले को
निलंबित माना जाएगा। बताया
जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि
राज्य शासन जब तक 124(ए) के मामलों पर विचार कर रही है, तब तक राजद्रोह की
कोई भी नई एफआइआर दर्ज नहीं होगी। अधिवक्ता मेहुल जेठानी ने बताया कि
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राजद्रोह के मामले में कोई नया केस दर्ज नहीं
होगा। साथ ही जो आरोपित जेल में बंद हैं, वे जमानत के लिए आवेदन लगा सकते
हैं।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में बिनायक सेन,
कालीचरण, पत्रकार कन्हैया लाल शुक्ला उर्फ कमल शुक्ला समेत कई लोगों पर
राजद्रोह के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें कुछ लोगों को जमानत पर रिहा किया जा
चुका है। पत्रकार कमल शुक्ला के मामले में पुलिस ने चार्जशीट पेश नहीं की
है। उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में एक वर्ष पहले देशद्रोह कानून को चुनौती
दी थी। इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह पर रोक लगाई है। सुप्रीम
कोर्ट के आए फैसले के अनुसार अब 124(ए) पर कोई भी नया मुकदमा दर्ज नहीं
किया जाएगा। साथ ही पहले से चल रहे राजद्रोह के मामले 124(ए) पर कार्रवाई
नहीं होगी और इसे निलंबित माना जाएगा। लेकिन आरोपित पर दूसरे मामले दर्ज
हैं तो उन पर कार्रवाई होगी। बस्तर
के पत्रकार कमल शुक्ला ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले कानून को चुनौती
देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। उनके साथ मणिपुर के
पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी शामिल
हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मेरे मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं
की है। उधर, विधि विशेषज्ञों ने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार अगर
कोई आरोपित राजद्रोह के मामले में जेल में बंद है तो वह अब जमानत के लिए
अदालत में आवेदन लगा सकता है। इसके साथ ही अगर किसी आरोपित पर राजद्रोह का
मामला अदालत में चल रहा है तो अभी की स्थिति में धारा 124(ए) के मामले को
निलंबित माना जाएगा। बताया
जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि
राज्य शासन जब तक 124(ए) के मामलों पर विचार कर रही है, तब तक राजद्रोह की
कोई भी नई एफआइआर दर्ज नहीं होगी। अधिवक्ता मेहुल जेठानी ने बताया कि
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राजद्रोह के मामले में कोई नया केस दर्ज नहीं
होगा। साथ ही जो आरोपित जेल में बंद हैं, वे जमानत के लिए आवेदन लगा सकते
हैं।



Journalist खबरीलाल














