जांजगीर-चांपा। वर्ष 2008 में बारहवीं परीक्षा के प्रावीण्य सूची में
पोराबाई फर्जीवाड़े में प्रथम श्रेणी न्यायाधीश सुबोध मिश्रा ने सोमवार को
फैसला सुनाते हुए इस प्रकरण के सभी 9 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस
प्रकरण में माननीय न्यायाधीश ने कहा कि जिन आशंकाओं को लेकर मामले की
शुरुआत हुई उन आशंकाओं को अभियोजन सही साबित करने में असफल रहा इसलिए सभी
नौ आरोपितों को दोषमुक्त किया जाता है।
अभियोजन के अनुसार 2008 में
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित बारहवीं की परीक्षा में जांजगीर-चांपा
जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बिर्रा की छात्रा पोरा बाई सरस्वती
शिशुमन्दिर केंद्र से शामिल हुई थी। 26 मई को परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ
जिसमें वह मेरिट की सूची में प्रथम स्थान पर रही। माशिम के सचिव को संदेह
होने पर उन्होंने उपसचिव पीके पांडेय से मामले की जांच कराई जांच में उसका
प्रवेश गलत ढंग से पाया गया। वहीं जांच प्रतिवेदन के आधार पर पोरा बाई सहित
नौ लोगों प्राचार्य एसएल जाटव, केंद्राध्यक्ष फूलसाय, सहायक केंद्राध्यक्ष
बालचंद भारती, सहित नौ लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 420, 467, 468
471,120 बी व परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया और अभियोग पत्र
न्यायालय में पेश किया मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट चाम्पा में हुई ।
इस फैसले के साथ ही 12 वर्ष पुराने इस मामले का पटाक्षेप आरोपियों की बरी
होने के साथ हुआ।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में संपन्न हुई बारहवीं
परीक्षा की घोषित प्रावीण्य सूची में सरस्वती शिशु मंदिर मे अध्ययरत
पोराबाई पोरा बाई ने प्रावीण्य सूची में पहला स्थान प्राप्त किया था। उसके
प्रावीण्यसूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर संदेह होने पर जब मामले की
जांच शुरू हुई तो उनकी उत्तरपुस्तिका बदली हुई मिली जिसमे उसकी हैंडराइटिंग
नही थी। इस आधार पर जांच हुई और अपराध दर्ज किया गया। जबकि आरोपितों ने
इसी को ढाल बनाया कि उसकी उत्तर पुस्तिका को आखिर किसने बदला इसके लिए पोरा
बाई जिम्मेदार नहीं है क्योंकि उसने अपनी उत्तरपुस्तिका केंद में जमा कर
दी थी। इस आधार पर उसे और अन्य आरोपितों को बरी किया गया।
जांजगीर-चांपा। वर्ष 2008 में बारहवीं परीक्षा के प्रावीण्य सूची में
पोराबाई फर्जीवाड़े में प्रथम श्रेणी न्यायाधीश सुबोध मिश्रा ने सोमवार को
फैसला सुनाते हुए इस प्रकरण के सभी 9 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस
प्रकरण में माननीय न्यायाधीश ने कहा कि जिन आशंकाओं को लेकर मामले की
शुरुआत हुई उन आशंकाओं को अभियोजन सही साबित करने में असफल रहा इसलिए सभी
नौ आरोपितों को दोषमुक्त किया जाता है।
अभियोजन के अनुसार 2008 में
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित बारहवीं की परीक्षा में जांजगीर-चांपा
जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बिर्रा की छात्रा पोरा बाई सरस्वती
शिशुमन्दिर केंद्र से शामिल हुई थी। 26 मई को परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ
जिसमें वह मेरिट की सूची में प्रथम स्थान पर रही। माशिम के सचिव को संदेह
होने पर उन्होंने उपसचिव पीके पांडेय से मामले की जांच कराई जांच में उसका
प्रवेश गलत ढंग से पाया गया। वहीं जांच प्रतिवेदन के आधार पर पोरा बाई सहित
नौ लोगों प्राचार्य एसएल जाटव, केंद्राध्यक्ष फूलसाय, सहायक केंद्राध्यक्ष
बालचंद भारती, सहित नौ लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 420, 467, 468
471,120 बी व परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया और अभियोग पत्र
न्यायालय में पेश किया मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट चाम्पा में हुई ।
इस फैसले के साथ ही 12 वर्ष पुराने इस मामले का पटाक्षेप आरोपियों की बरी
होने के साथ हुआ।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में संपन्न हुई बारहवीं
परीक्षा की घोषित प्रावीण्य सूची में सरस्वती शिशु मंदिर मे अध्ययरत
पोराबाई पोरा बाई ने प्रावीण्य सूची में पहला स्थान प्राप्त किया था। उसके
प्रावीण्यसूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर संदेह होने पर जब मामले की
जांच शुरू हुई तो उनकी उत्तरपुस्तिका बदली हुई मिली जिसमे उसकी हैंडराइटिंग
नही थी। इस आधार पर जांच हुई और अपराध दर्ज किया गया। जबकि आरोपितों ने
इसी को ढाल बनाया कि उसकी उत्तर पुस्तिका को आखिर किसने बदला इसके लिए पोरा
बाई जिम्मेदार नहीं है क्योंकि उसने अपनी उत्तरपुस्तिका केंद में जमा कर
दी थी। इस आधार पर उसे और अन्य आरोपितों को बरी किया गया।


Journalist खबरीलाल












