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खेल post authorJournalist खबरीलाल Thursday ,February 02,2023

पूर्व फुटबॉलर परिमल डे का निधन:

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भारत के पूर्व फुटबॉलर परिमल डे का बुधवार को लंबी बीमारी के चलते
निधन हो गया। परिमल 81 साल के थे और कोलकाता में उन्होंने आखिरी सांस ली।
परिमल का जन्म 4 मई 1941 को हुआ था। उन्होंने पांच मैचों में भारत का
प्रतिनिधत्वि किया। कोरिया के खिलाफ ब्रोन्ज मेडल मैच में उनके इकलौते
इंटरनेशनल गोल की बदौलत भारत ने 1966 मरडेका कप में तीसरा स्थान हासिल किया
था।

उन्होंने क्लब स्तर पर ईस्ट बंगाल का प्रतिनिधत्वि करते हुए 84
गोल दागे। परिमल ने अपने शानदार करियर में कलकत्ता फुटबॉल लीग और आईएफए
शील्ड तीन-तीन बार जीते थे। इसके अलावा वह डूरंड कप (दो बार) और रोवर्स कप
(तीन बार) जीतने वाली टीमों का हिस्सा रहे थे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ
(एआईएफएफ) के अध्यक्ष कल्याण चौबे ने परिमल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा,
'परिमल डे का निधन भारतीय फुटबॉल की बहुत बड़ी क्षति है। हमारे जंगला दा
1960 के दशक के सबसे बेहतरीन योजनाकारों में से एक थे। वह फुटबॉल प्रेमियों
के दिलो-दिमाग में आज भी मौजूद हैं। उनके परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं
हैं।'

परिमल ने 1971 में मोहन बागान में शामिल होने के बाद एक बार फिर
रोवर्स कप जीता था। राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने 1962 और 1968 में दो बार
बंगाल की कप्तानी करते हुए संतोष ट्रॉफी का खिताब जीता था।


भारत के पूर्व फुटबॉलर परिमल डे का बुधवार को लंबी बीमारी के चलते
निधन हो गया। परिमल 81 साल के थे और कोलकाता में उन्होंने आखिरी सांस ली।
परिमल का जन्म 4 मई 1941 को हुआ था। उन्होंने पांच मैचों में भारत का
प्रतिनिधत्वि किया। कोरिया के खिलाफ ब्रोन्ज मेडल मैच में उनके इकलौते
इंटरनेशनल गोल की बदौलत भारत ने 1966 मरडेका कप में तीसरा स्थान हासिल किया
था।

उन्होंने क्लब स्तर पर ईस्ट बंगाल का प्रतिनिधत्वि करते हुए 84
गोल दागे। परिमल ने अपने शानदार करियर में कलकत्ता फुटबॉल लीग और आईएफए
शील्ड तीन-तीन बार जीते थे। इसके अलावा वह डूरंड कप (दो बार) और रोवर्स कप
(तीन बार) जीतने वाली टीमों का हिस्सा रहे थे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ
(एआईएफएफ) के अध्यक्ष कल्याण चौबे ने परिमल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा,
'परिमल डे का निधन भारतीय फुटबॉल की बहुत बड़ी क्षति है। हमारे जंगला दा
1960 के दशक के सबसे बेहतरीन योजनाकारों में से एक थे। वह फुटबॉल प्रेमियों
के दिलो-दिमाग में आज भी मौजूद हैं। उनके परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं
हैं।'

परिमल ने 1971 में मोहन बागान में शामिल होने के बाद एक बार फिर
रोवर्स कप जीता था। राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने 1962 और 1968 में दो बार
बंगाल की कप्तानी करते हुए संतोष ट्रॉफी का खिताब जीता था।


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