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तेंदुए को लगी लू, इलाज के दौरान तोड़ा दम...:

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बिलासपुर । भीषण गर्मी की चपेट में इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी आने लगे हैं। जंगल में एक तेंदुआ बेहोश पड़ा मिला। कटघोरा वन मंडल के एतमानगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोनकोना में तीन साल की उम्र का तेंदुआ बेहोशी की हालत में  पाया गया। उसे इलाज के लिए बिलासपुर के कानन पेंडारी जू ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, कटघोरा वन मंडल एतमानगर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कोनकोना में खेत में महुआ पेड़ के नीचे रविवार की सुबह नौ बजे तेंदुए को विचरण करते किसानों ने देखा। सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो पाया वह सुस्त है। कभी वह चहलकदमी करने लगता तो कभी लेट जाता था। ऐसी स्थिति में कानन पेंडारी जू से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। डा. पीके चंदन की नेतृत्व में रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद ट्रैंक्यूलाइज गन के जरिए उसे बेहोश किया गया। बेहोशी की अवस्था में पिंजरे में डालकर उसे पहले कटघोरा के कसनिया डिपो ले गए। जहां उसका इलाज किया गया। लेकिन, हालत में सुधार नहीं आया।

ऐसी स्थिति में रात करीब डेढ़ बजे कसनिया से कानन पेंडारी जू भेजा गया। जहां सोमवार की सुबह 8.30 बजे तेंदुआ की मौत हो गई। इस घटना से वन विभाग व कानन पेंडारी जू प्रबंधन सकते में है। श्रेणी एक के वन्य प्राणी की मौत को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। इस घटना को लेकर भी लापरवाही का आरोप लग रहा है। हालांकि वन अफसरों का कहना है कि तेंदुए की हालत बेहद खराब थी। शरीर का तापमान 108 डिग्री तक पहुंच गया था। जिसे कम करने के लिए हर संभव प्रयास किया गया। मौत के बाद जू में ही पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डिहाइड्रेशन की वजह से मौत होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया।


बिलासपुर । भीषण गर्मी की चपेट में इंसान ही नहीं बल्कि जानवर भी आने लगे हैं। जंगल में एक तेंदुआ बेहोश पड़ा मिला। कटघोरा वन मंडल के एतमानगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोनकोना में तीन साल की उम्र का तेंदुआ बेहोशी की हालत में  पाया गया। उसे इलाज के लिए बिलासपुर के कानन पेंडारी जू ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, कटघोरा वन मंडल एतमानगर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कोनकोना में खेत में महुआ पेड़ के नीचे रविवार की सुबह नौ बजे तेंदुए को विचरण करते किसानों ने देखा। सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो पाया वह सुस्त है। कभी वह चहलकदमी करने लगता तो कभी लेट जाता था। ऐसी स्थिति में कानन पेंडारी जू से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। डा. पीके चंदन की नेतृत्व में रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद ट्रैंक्यूलाइज गन के जरिए उसे बेहोश किया गया। बेहोशी की अवस्था में पिंजरे में डालकर उसे पहले कटघोरा के कसनिया डिपो ले गए। जहां उसका इलाज किया गया। लेकिन, हालत में सुधार नहीं आया।

ऐसी स्थिति में रात करीब डेढ़ बजे कसनिया से कानन पेंडारी जू भेजा गया। जहां सोमवार की सुबह 8.30 बजे तेंदुआ की मौत हो गई। इस घटना से वन विभाग व कानन पेंडारी जू प्रबंधन सकते में है। श्रेणी एक के वन्य प्राणी की मौत को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। इस घटना को लेकर भी लापरवाही का आरोप लग रहा है। हालांकि वन अफसरों का कहना है कि तेंदुए की हालत बेहद खराब थी। शरीर का तापमान 108 डिग्री तक पहुंच गया था। जिसे कम करने के लिए हर संभव प्रयास किया गया। मौत के बाद जू में ही पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डिहाइड्रेशन की वजह से मौत होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया।


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