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CGMSC घोटाला: ACB-EOW को मिली शशांक चोपड़ा की रिमांड:

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रायपुर । छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) घोटाले में गिरफ्तार मोक्षित कॉरपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को आज रायपुर कोर्ट में पेश किया गया। एसीबी/ईओडब्ल्यू ने आरोपी से गहन पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अब आरोपी 7 दिन तक एसीबी की हिरासत में रहेगा और 4 फरवरी को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।

क्या है मामला?
सीजीएमएससी द्वारा 2021-22 में हमर लैब योजना के तहत खरीदे गए मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स (रसायनों) में भारी अनियमितताएं पाई गईं। ईओडब्ल्यू की एफआईआर के अनुसार, बिना समुचित आकलन और प्रशासनिक अनुमोदन के 411 करोड़ रुपये की खरीदी की गई, जिससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

कई अनियमितताओं के आरोप
    सीजीएमएससी ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीद की।
    ब्लड सैंपल कलेक्शन के लिए उपयोग की जाने वाली EDTA ट्यूब, जो बाजार में 8.50 रुपये में मिलती है, उसे 2352 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा गया।

    300 करोड़ रुपये के रिएजेंट्स बिना मांग के उन स्वास्थ्य केंद्रों में भेजे गए, जहां इन्हें उपयोग करने वाली मशीनें ही मौजूद नहीं थीं।
    मोक्षित कॉरपोरेशन पर निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी कर अनियमित तरीके से ठेके हासिल करने का आरोप है।


ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि मोक्षित कॉरपोरेशन और सीबी कॉरपोरेशन के अलावा कुछ अन्य कंपनियों ने मिलकर निविदा प्रक्रिया में हेरफेर की, जिससे बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर मेडिकल उपकरण खरीदे गए।

आगे की कार्रवाई
शशांक चोपड़ा की 7 दिन की रिमांड के दौरान एसीबी/ईओडब्ल्यू उससे विस्तृत पूछताछ करेगी। साथ ही, अन्य संबंधित अधिकारियों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


रायपुर । छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) घोटाले में गिरफ्तार मोक्षित कॉरपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को आज रायपुर कोर्ट में पेश किया गया। एसीबी/ईओडब्ल्यू ने आरोपी से गहन पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अब आरोपी 7 दिन तक एसीबी की हिरासत में रहेगा और 4 फरवरी को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।

क्या है मामला?
सीजीएमएससी द्वारा 2021-22 में हमर लैब योजना के तहत खरीदे गए मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स (रसायनों) में भारी अनियमितताएं पाई गईं। ईओडब्ल्यू की एफआईआर के अनुसार, बिना समुचित आकलन और प्रशासनिक अनुमोदन के 411 करोड़ रुपये की खरीदी की गई, जिससे सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

कई अनियमितताओं के आरोप
    सीजीएमएससी ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीद की।
    ब्लड सैंपल कलेक्शन के लिए उपयोग की जाने वाली EDTA ट्यूब, जो बाजार में 8.50 रुपये में मिलती है, उसे 2352 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा गया।

    300 करोड़ रुपये के रिएजेंट्स बिना मांग के उन स्वास्थ्य केंद्रों में भेजे गए, जहां इन्हें उपयोग करने वाली मशीनें ही मौजूद नहीं थीं।
    मोक्षित कॉरपोरेशन पर निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी कर अनियमित तरीके से ठेके हासिल करने का आरोप है।


ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि मोक्षित कॉरपोरेशन और सीबी कॉरपोरेशन के अलावा कुछ अन्य कंपनियों ने मिलकर निविदा प्रक्रिया में हेरफेर की, जिससे बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर मेडिकल उपकरण खरीदे गए।

आगे की कार्रवाई
शशांक चोपड़ा की 7 दिन की रिमांड के दौरान एसीबी/ईओडब्ल्यू उससे विस्तृत पूछताछ करेगी। साथ ही, अन्य संबंधित अधिकारियों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


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